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Clothes Rules for Puja: क्या पूजा के लिए जरूरी है पारंपरिक कपड़े पहनना? जानिए शास्त्रों में क्या है सही नियम

July 28, 2026

Clothes Rules for Puja: क्या पूजा के लिए जरूरी है पारंपरिक कपड़े पहनना? जानिए शास्त्रों में क्या है सही नियम

पूजा पाठ के नियमImage Credit source: pexels

Traditional Clothes for Puja: अक्सर जब भी घर में कोई पूजा-पाठ, कथा या मंदिर जाने की बात होती है, तो पारंपरिक कपड़े जैसे कुर्ता-पजामा, धोती या साड़ी पहनने की सलाह देते हैं. लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई बार लोग जींस-टीशर्ट या कैजुअल कपड़ों में भी भगवान की पूजा कर लेते हैं या मंदिर चले जाते हैं. ऐसे में कई बार मन में यह सवाल उठता है कि क्या पूजा-पाठ के दौरान पारंपरिक कपड़े पहनना जरूरी होता है. हिंदू धर्म और शास्त्रों में पूजा के समय कपड़ों को लेकर क्या नियम बताए गए हैं, आइए विस्तार से जानते हैं.

पूजा के लिए कैसे कपड़े पहनने चाहिए?

धार्मिक परंपराओं में पूजा के समय साफ और धुले हुए कपड़े पहनने को विशेष महत्व दिया गया है. अगर हो सके तो स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा करनी चाहिए. कई लोग पूजा के लिए धोती-कुर्ता, कुर्ता-पायजामा, साड़ी या सलवार-सूट जैसे पारंपरिक कपड़े पहनना पसंद करते हैं. ऐसा करना धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे हर पूजा के लिए जरूरी नियम नहीं माना जाता. इसलिए घर पर रोजाना की पूजा के लिए साफ और शुद्ध कपड़े पहनना ही सबसे जरूरी होता है.

क्या पूजा में पारंपरिक कपड़े पहनना जरूरी है?

पूजा के लिए पारंपरिक कपड़े पहनना शुभ और सम्मानजनक माना जा सकता है, खासकर जब किसी बड़े धार्मिक अनुष्ठान, व्रत, यज्ञ या विशेष पूजा में शामिल होना हो. लेकिन सामान्य पूजा के लिए यह जरूरी नहीं है कि व्यक्ति केवल पारंपरिक कपड़े ही पहने. अगर कोई व्यक्ति साफ, धुले हुए और शालीन आधुनिक कपड़े पहनकर पूजा करता है, तो केवल कपड़ों के आधुनिक होने की वजह से उसकी पूजा को गलत नहीं माना जा सकता.

पूजा से पहले साफ-सफाई का क्यों है महत्व?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में शरीर और आसपास की जगह की स्वच्छता को पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है. यही वजह है कि लोग पूजा से पहले स्नान करते हैं और पूजा स्थल की साफ-सफाई करते हैं. इसलिए पूजा के लिए कपड़ों की शैली से ज्यादा उनके साफ होने पर ध्यान देना जरूरी माना जाता है.

क्या रोजाना की पूजा के लिए अलग कपड़े जरूरी हैं?

कई परिवारों में पूजा के लिए अलग कपड़े पहनने की परंपरा होती है. कुछ लोग पूजा के लिए एक अलग जोड़ी कपड़े रखते हैं, जबकि कुछ लोग स्नान के बाद पहने गए साफ कपड़ों में ही पूजा करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रोजाना की पूजा के लिए अलग कपड़े रखना जरूरी नहीं है. अगर कपड़े साफ हैं और व्यक्ति ने स्नान किया है, तो वह श्रद्धा के साथ पूजा कर सकता है.

पूजा में किन कपड़ों से बचना चाहिए?

पूजा के समय बहुत गंदे, मैले या बिना धुले कपड़े पहनने से बचने की परंपरा है. इसी तरह ऐसे कपड़े भी नहीं पहनने चाहिए, जिनमें बहुत अधिक असहजता महसूस हो और पूजा के दौरान मन बार-बार भटके. धार्मिक अवसर पर शालीन और साफ कपड़े पहनना बेहतर माना जाता है.

मंदिर जाने के लिए कैसे कपड़े पहनें?

मंदिर जाते समय साफ और शालीन कपड़े पहनना अच्छी परंपरा मानी जाती है. कुछ प्रसिद्ध मंदिरों में विशेष ड्रेस कोड भी हो सकता है. ऐसे स्थानों पर मंदिर प्रशासन के नियमों का पालन करना जरूरी होता है.अगर किसी मंदिर में पारंपरिक पोशाक पहनने की व्यवस्था या नियम है, तो वहां उसी के अनुसार कपड़े पहनना चाहिए. वहीं सामान्य मंदिरों में साफ-सुथरे और शालीन कपड़ों में दर्शन किए जा सकते हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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