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CJP के प्रोटेस्ट देख दंग रह गई दुनिया! धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर BBC, CNN सहित वर्ल्ड मीडिया ने क्या कहा?

July 26, 2026

Time Published: Sunday, July 26, 2026, 13:51 [IST]

CJP Protest World Media Reaction: NEET पेपर लीक मामले के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के बड़े मीडिया संस्थानों का भी ध्यान खींचा है। पिछले 36 दिनों से जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आए इस घटनाक्रम को BBC, द गार्डियन, न्यूयॉर्क टाइम्स, CNN, अल जजीरा, डॉन, वॉल स्ट्रीट जर्नल और ब्लूमबर्ग जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने प्रमुखता से कवर किया।

कई रिपोर्टों में इसे छात्रों के दबाव के आगे सरकार के झुकने और हाल के वर्षों में भारत के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक बताया गया। वहीं कुछ रिपोर्टों ने इसे युवाओं के बढ़ते असंतोष, जवाबदेही की मांग और चुनावी राजनीति पर असर डालने वाली घटना के रूप में भी पेश किया।

CJP Protest World Media Reaction

BBC: छात्रों के दबाव के आगे सरकार को झुकना पड़ा

BBC ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि 2014 से सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आमतौर पर विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाती रही है और बड़े आंदोलनों के आगे शायद ही कभी झुकी। रिपोर्ट के मुताबिक किसान आंदोलन के बाद यह दूसरा बड़ा मौका है, जब सरकार पर जनदबाव निर्णायक साबित हुआ। BBC ने छात्र आंदोलन को इस्तीफे की बड़ी वजह बताया।

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द गार्डियन: 12 साल में पहली बार दबाव में मंत्री का इस्तीफा

द गार्डियन ने लिखा कि भाजपा के 12 वर्षों के शासन में पहली बार प्रधानमंत्री मोदी के सबसे करीबी और भरोसेमंद मंत्रियों में से एक को सार्वजनिक दबाव के कारण इस्तीफा देना पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया कि CJP के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे देशव्यापी छात्र विरोध में बदल गया और सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बन गया।

न्यूयॉर्क टाइम्स: 'बी-टीम' कहने वाले मंत्री को देना पड़ा इस्तीफा

न्यूयॉर्क टाइम्स ने याद दिलाया कि धर्मेंद्र प्रधान ने पहले छात्र प्रदर्शनकारियों को गंभीरता से नहीं लिया था और जून में दिए एक इंटरव्यू में उन्हें "आतंकवादियों की बी-टीम" तक कहा था। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन और तेज हुआ तथा अंततः वही छात्र सरकार पर इतना दबाव बनाने में सफल रहे कि शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।

CNN: मीम से शुरू हुआ आंदोलन राष्ट्रीय अभियान बना

CNN ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि जो आंदोलन शुरुआत में सोशल मीडिया मीम के रूप में दिख रहा था, वह धीरे-धीरे देशभर के छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं का बड़ा अभियान बन गया। रिपोर्ट में कहा गया कि यह सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और जवाबदेही जैसे मुद्दों को भी राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ले आया।

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अल जजीरा: छात्र आंदोलन की बड़ी जीत

अल जजीरा ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन की बड़ी जीत बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि हाल के वर्षों में यह मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में शामिल रहा। आंदोलन के जरिए युवाओं ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, परीक्षा प्रणाली और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया।

डॉन: 'कॉकरोच' आंदोलन की बड़ी सफलता

पाकिस्तान के अखबार डॉन ने लिखा कि पेपर लीक मामलों में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन आखिरकार अपनी सबसे बड़ी मांग मनवाने में सफल रहा। रिपोर्ट के मुताबिक इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय गान गाया, मिठाइयां बांटी और इसे लोकतांत्रिक संघर्ष की जीत बताया।

WSJ और ब्लूमबर्ग: हाल के वर्षों का सबसे बड़ा प्रदर्शन

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सोमवार के प्रदर्शन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने हाल के वर्षों की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। वहीं ब्लूमबर्ग ने लिखा कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया, जिससे सरकार पर दबाव लगातार बढ़ता गया। रिपोर्ट में इसे 2021 के किसान आंदोलन के बाद राजधानी का सबसे बड़ा प्रदर्शन बताया गया।

युवा असंतोष और चुनावी असर पर भी नजर

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने सिर्फ इस्तीफे पर ही नहीं, बल्कि इसके राजनीतिक असर पर भी चर्चा की। CNN ने भारत में युवा बेरोजगारी और रोजगार संकट का जिक्र करते हुए आंदोलन को व्यापक असंतोष से जोड़ा। वहीं ब्लूमबर्ग ने लिखा कि यह आंदोलन आने वाले चुनावों, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे अहम राज्यों में भाजपा के लिए नई राजनीतिक चुनौती का संकेत भी माना जा रहा है।