Published: Friday, October 16, 2026, 8:51 [IST]
दिल्ली में शुक्रवार 16 अक्टूबर को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तिरंगा मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कनॉट प्लेस में शाम 5 बजे होने वाले 'लहरा दो तिरंगा' मार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने 6,000 से ज्यादा जवानों की तैनाती की है। राजधानी में पहले से करीब 26,000 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के जवान भी तैनात हैं। प्रशासन ने सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्टूबर को आम लोगों के लिए बंद रखने का फैसला लिया है।
दिल्ली पुलिस के जवानों के अलावा करीब 26,000 सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) के कर्मियों को तैनात किया गया है। CJP फाउंडर अभिजीत दीपके के आह्वान पर आज शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में 'लहरा दो तिरंगा' मार्च निकाला जाना है। यह मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और चुनावी वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों के विरोध में बुलाया गया है।
दिल्ली में हाई अलर्ट क्यों?
CJP के मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस और पार्टी के बीच टकराव बना हुआ है। पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत पाबंदियां लागू की हैं। इसका मकसद भीड़ को नियंत्रित करना और सार्वजनिक व निजी संपत्ति को नुकसान से बचाना है।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस 30 हजार से 50 हजार लोगों की संभावित भीड़ को ध्यान में रखकर तैयारी कर रही है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जवान भी लगाए जा सकते हैं। कनॉट प्लेस में कई सड़कें मिलती हैं और यहां पैदल चलने वालों की भी काफी भीड़ रहती है। ऐसे में पुलिस बैरिकेडिंग, निगरानी कैमरों और ट्रैफिक डायवर्जन जैसे उपायों पर काम कर रही है। कैमरों के जरिए भीड़ की गतिविधियां रिकॉर्ड करने की तैयारी भी है, ताकि नियमों के उल्लंघन पर सबूत जुटाए जा सकें।
CJP आखिर क्यों निकाल रही है तिरंगा मार्च?
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने लोगों से अपील की है कि वे शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में तिरंगा लेकर पहुंचें। पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रही है। उसका आरोप है कि वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण यानी SIR में गड़बड़ियां हुई हैं। CJP का कहना है कि उसकी लड़ाई वोटिंग के अधिकार और चुनावी जवाबदेही के लिए है।
यह विवाद तब और बढ़ा, जब पार्टी के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोप है कि वे जंतर-मंतर पहुंचे थे, जिसे दिल्ली पुलिस ने निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया था। उन पर शांति बनाए रखने से जुड़ी शर्तों का उल्लंघन करने का भी आरोप है।
दीपके ने राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से वैचारिक मतभेद भुलाकर मार्च में शामिल होने की अपील की है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस पहल को समर्थन दिया है। छात्र संगठनों और दूसरे कार्यकर्ताओं के भी इसमें शामिल होने की उम्मीद है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने मार्च रोकने से क्यों किया इनकार?
मार्च से एक दिन पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने CJP और अभिजीत दीपके को सेंट्रल पार्क में प्रस्तावित प्रदर्शन करने से रोकने की मांग वाली याचिका पर राहत देने से इनकार कर दिया। याचिका कनॉट प्लेस के एक दुकानदार ने दायर की थी। उसने कारोबार और लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई थी।
सुनवाई के दौरान पुलिस ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, कोर्ट के इस फैसले को बिना किसी रोक-टोक के मार्च निकालने की अनुमति नहीं माना जा सकता। पुलिस ने साफ किया है कि निषेधाज्ञा लागू रहेगी और किसी भी सभा को मौजूदा नियमों का पालन करना होगा।
दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा है कि नियमों और राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा का पालन करने की शर्त पर लोगों के एक सीमित समूह को किसी उपयुक्त जगह पर तिरंगा लहराने और राष्ट्रगान गाने की सुविधा दी जा सकती है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत क्यों नहीं?
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। अब प्रदर्शन करने वालों को जरूरी अनुमति लेकर रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और CBD ग्राउंड जैसे दूसरे स्थानों पर जाने को कहा गया है।
CJP इस फैसले का विरोध कर रही है। पार्टी ने पाबंदियों के बाद भी जंतर-मंतर पर तिरंगे के साथ पहुंचकर अपना विरोध जताया था। अब कनॉट प्लेस में प्रस्तावित मार्च के जरिए वह चुनाव आयोग पर दबाव बनाने और प्रदर्शन स्थलों पर लगी पाबंदियों को चुनौती देने की कोशिश कर रही है।
आज दिल्ली पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
सेंट्रल पार्क दो दिन बंद है और हजारों जवान सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं। पुलिस के सामने चुनौती यह है कि संभावित भीड़ को नियंत्रित किया जाए और साथ ही कनॉट प्लेस में दुकानदारों, आने-जाने वालों और आम लोगों को कम से कम परेशानी हो। अब नजर इस बात पर रहेगी कि CJP का मार्च किस रूप में आगे बढ़ता है, पुलिस सीमित समूह को तिरंगा लहराने की सुविधा कहां देती है और प्रदर्शन के दौरान ट्रैफिक व कानून-व्यवस्था को कैसे संभाला जाता है।