Updated: Sunday, August 23, 2026, 15:58 [IST]
Cockroach Janata Party Accuses Center of Betrayal: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार पर युवाओं से किए गए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि 25 जुलाई को हुए समझौते के भरोसे देशभर में चल रहा आंदोलन वापस लिया गया था, लेकिन अब सरकार अपने वादों से पीछे हटती नजर आ रही है।
CJP के मुताबिक, आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने और NEET विवाद में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने का भरोसा दिया गया था। पार्टी का दावा है कि इन मुद्दों पर अभी तक सरकार की ओर से कोई साफ लिखित आश्वासन नहीं मिला है। इसी बीच 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई को लेकर भी CJP ने सवाल उठाए हैं। अब 24 अगस्त को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक होगी, जिसमें आगे के आंदोलन पर फैसला लिया जाएगा।
सरकार पर वादे से पीछे हटने का आरोप
CJP नेताओं का कहना है कि 25 जुलाई को सरकार के साथ बातचीत के बाद एक समझौते के आधार पर देशव्यापी आंदोलन वापस लिया गया था। उस समय युवाओं से जुड़े कई मुद्दों पर सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया था। अब पार्टी का आरोप है कि आंदोलन खत्म होने के बाद सरकार उन वादों को पूरा करने में गंभीरता नहीं दिखा रही है। CJP ने चेतावनी दी है कि अगर वादे पूरे नहीं किए गए तो देशभर में फिर से शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू किया जा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट में FIR को लेकर क्या हुआ?
CJP की लीगल टीम और नेताओं के अनुसार, 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई। पार्टी का दावा है कि सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR की पूरी सूची तीन बार मांगी। CJP का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करके सभी मामलों को एक साथ खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता था। इससे अलग-अलग मामलों में चल रही कानूनी प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता था।
हालांकि, पार्टी के मुताबिक केंद्र सरकार ने अदालत की ओर से बार-बार सूची मांगे जाने के बावजूद इसे उपलब्ध कराने को लेकर कोई साफ प्रतिबद्धता नहीं दिखाई।
'आंदोलन खत्म कराकर युवाओं को धोखा'
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के सह-संयोजक सौरव दास और लीगल अफेयर्स लीड रत्ना सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। दोनों नेताओं ने कहा कि आंदोलन वापस लेने के बाद अब युवाओं के साथ विश्वासघात किया जा रहा है। पार्टी का दावा है कि सरकार के वार्ता दल की ओर से अब तक यह नहीं बताया गया है कि समझौते में किए गए वादों पर कितना काम हुआ है।
क्या थे सरकार के दो मुख्य वादे?
CJP के अनुसार, बातचीत के दौरान सरकार की ओर से मुख्य रूप से दो बड़े भरोसे दिए गए थे।
पहला- छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस लेना: आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस लेने या रद्द करने की बात कही गई थी। पार्टी का दावा है कि भविष्य में भी इन मामलों को लेकर किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया गया था।
दूसरा- पीड़ित परिवारों को मुआवजा: NEET परीक्षा विवाद के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने की बात भी समझौते का हिस्सा बताई गई थी।
CJP का कहना है कि इन दोनों मुद्दों पर सरकार की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक लिखित आश्वासन नहीं मिला है।
24 अगस्त को होगी अहम बैठक
सरकार के रुख को लेकर बढ़ती नाराजगी के बीच CJP ने 24 अगस्त को राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाई है। इसमें अब तक हुए घटनाक्रम और सरकार की तरफ से उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि आगे सरकार पर दबाव बनाने के लिए क्या रणनीति अपनाई जाए। पार्टी ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर देशव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है।
'लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई'
CJP ने कहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उसके आंदोलन की पहली बड़ी सफलता थी। हालांकि, पार्टी का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ इस्तीफे तक सीमित नहीं है। पार्टी के मुताबिक, जब तक युवाओं से किए गए सभी वादे पूरे नहीं होते, तब तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। CJP ने देशभर के छात्रों, युवाओं और अपने कार्यकर्ताओं से 24 अगस्त की राष्ट्रीय कार्यसमिति के फैसलों के लिए तैयार रहने की अपील की है।