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भारत सरकार अप्रैल 2029 से अप्रैल 2035 के बीच तीन चरणों में नए BS-VII उत्सर्जन नियम लागू करने जा रही है।

भारत में BS-VII (BS-7) उत्सर्जन नियम

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संक्षेप में पढ़ें
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। देश के बड़े शहरों में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। इसको लेकर भारत सरकार तरह-तरह से कदम उठा रही है। इसमें वाहनों से होने वाले एमिशन पर लगाम कसने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। भारत में जल्द ही BS-VII (BS-7) उत्सर्जन नियम को लेकर आने वाली है। अगर आप भविष्य में नई कार या कमर्शियल गाड़ी खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपके मन में भी यह सवाल जरूर होगा कि क्या इन नए नियमों के आने से आपकी मौजूदा गाड़ी कबाड़ हो जाएगी? या फिर इसके लागू होने के बाद पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों में क्या बड़े बदलाव आएंगे? आइए, आसान भाषा में समझते हैं BS-VII से जुड़ी हर वो बात के बारे में, जो आपके लिए जानना जरूरी है।
नए नियम कब से लागू होंगे?
- अप्रैल 2029: नई बनने वाली कारों और SUV के लिए।
- अप्रैल 2030: छोटे डिलीवरी वैन और पिक-अप ट्रकों के लिए।
- अप्रैल 2031: बसों और भारी कमर्शियल वाहनों (Heavy-duty vehicles) के लिए।
- दोपहिया वाहन: प्रदूषण में सबसे बड़ा योगदान देने वाले टू-व्हीलर्स के लिए नियम बाद में अधिसूचित किए जाएंगे।
क्या पुरानी गाड़ियों पर कोई असर पड़ेगा?
प्रस्तावित BS-VII के नियमों के मुताबिक इसका असर पुराने वाहनों पर नहीं पड़ने वाला है। यह केवल नए बनने वाले वाहनों पर ही लागू होंगे। मौजूदा वाहनों या उनके जीवनकाल (BS-VI मानक वाली गाड़ियों सहित) पर इसका कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
पेट्रोल-डीजल और इंजन में क्या बदलेगा?
जब BS-VI (BS-6) लागू हुआ था, तब रिफाइनरियों को नया पेट्रोल-डीजल बनाने के लिए अपने फ्रेम में बदलाव करना पड़ा था। बीएस-7 के लिए रिफाइनरी ढांचे में किसी बदलाव की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपने वाहनों के इंजन को जरूर अपग्रेड करना पड़ेगा।
BS-VII नियमों में नया क्या है?
- कारों और SUV के लिए उत्सर्जन सीमाएं BS-VI के समान ही रहेंगी, लेकिन पार्टिकुलेट नंबर (PN) को 23 नैनोमीटर से घटाकर 10 नैनोमीटर कर दिया गया है। इससे फेफड़ों की गहराई तक पहुंचने वाले अति-सूक्ष्म कणों को फिल्टर करने में मदद मिलेगी।
- इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर ट्रकों और भारी वाहनों पर पड़ेगा। इसके तहत उनके प्रदूषण को 20 से 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
- BS-VII में केवल साइलेंसर से निकलने वाले धुएं को ही नहीं मापा जाएगा, बल्कि ब्रेक के घिसने और टायर से होने वाले प्रदूषण को भी कंट्रोल किया जाएगा।
- वाहनों के प्रदूषण की निगरानी अब सिर्फ नियंत्रित लैब टेस्टिंग तक सीमित नहीं रहेगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गाड़ियां सड़क पर चलते समय भी तय सीमा का पालन करें।
- नए नियमों में टेस्टिंग एजेंसियां बाजार में चल रहे वाहनों की जांच करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे नियमों का पालन किया जा रहा है।
जल्द जारी होगा ड्राफ्ट नोटिफिकेशन
सड़क परिवहन मंत्रालय ने प्रस्तावित समय-सीमा को मंजूरी दे दी है और अगले कुछ दिनों में तीनों श्रेणियों के वाहनों के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी होने की उम्मीद है। 6 साल की इस लंबी समय-सीमा का उद्देश्य इंडस्ट्री और टेस्टिंग एजेंसियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय देना है।