
ब्रिक्स समिट 2026 की तस्वीरेंImage Credit source: ANI/PTI/DD India
दिल्ली के भारत मंडपम में पीएम मोदी की अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन का आगाज हो चुका है. इस दौरान 21 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि मंडल शामिल हुए. पीएम मोदी के संबोधन के बाद सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई. पीएम मोदी ने कहा कि अभी दुनिया के कुछ देश फैसले ले रहे हैं, लेकिन सबकी आवाज सुनी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में सभी के समान अधिकार है, ब्रिक्स किसी के खिलाफ नहीं है.
ब्रिक्स समिट के दौरान भारत मंडपम में पीएम मोदी ने एक-एक करके सभी राष्ट्राध्यक्षों का स्वागत किया. रामेश्वरम मंदिर के बैकड्रॉप पर पीएम मोदी ने सभी के साथ फोटो खिंचवाए. इस दौरान पुतिन और जिनपिंग को रामेश्वर मंदिर के बारे में भी बताया. ब्रिक्स समिट के बाद सभी सदस्य देशों ने संयुक्त घोषणा-पत्र जारी किया, जिसमें एक साथ कई मुद्दों पर सहमति जताई. सभी सदस्य एकतरफा सैन्य एक्शन के खिलाफ हैं. साथ ही अमेरिका की टैरिफ नीति पर भी उन्होंने विरोध जताया. इसके अलावा एकजुट होकर विकास के लिए आपसी सहयोग के लिए सभी ने साथ होने का संकल्प लिया.
दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 की खास बातें
BRICS की मूल भावना
- आपसी सम्मान, संप्रभु समानता, एकजुटता, लोकतंत्र, खुलेपन और सहमति पर जोर
- विस्तारित BRICS में तीन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग: राजनीतिक और सुरक्षा, आर्थिक और वित्तीय, सांस्कृतिक एवं लोगों के बीच संपर्क
ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
- विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं (EMDCs) की वैश्विक संस्थाओं में ज्यादा भागीदारी की मांग
- अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका की आवाज को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व देने की बात
- BRICS खुद को ग्लोबल साउथ की आवाज उठाने वाले प्रमुख मंच के रूप में देखता है
UNSC में सुधार
- संयुक्त राष्ट्र और खासकर UNSC में सुधार की मांग दोहराई
- इसे ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने पर जोर
- भारत और ब्राजील की UNSC में बड़ी भूमिका की दावेदारी का समर्थन
- चीन और रूस ने विशेष रूप से भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका के समर्थन को दोहराया
- UN के शीर्ष पदों में विकासशील देशों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की बात
वैश्विक आर्थिक संस्थाओं में सुधार
- IMF और वर्ल्ड बैंक में विकासशील देशों की हिस्सेदारी और आवाज बढ़ाने की मांग
- ब्रेटन वुड्स संस्थाओं की गवर्नेंस स्ट्रक्चर को आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था के अनुरूप बदलने पर जोर
- IMF कोटा और वोटिंग पावर में विकासशील देशों का हिस्सा बढ़ाने की मांग
WTO और व्यापार
- WTO को मजबूत करने और नियम आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था बनाए रखने पर जोर
- एकतरफा टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स पर गंभीर चिंता
- संरक्षणवाद से ग्लोबल ट्रेड और सप्लाई चेन को नुकसान की बात
- WTO का विवाद समाधान तंत्र पूरी तरह बहाल करने की मांग
- इथियोपिया और ईरान की WTO मेंबरशिप की दावेदारी का समर्थन
एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध
- अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ लगाए गए एकतरफा प्रतिबंध और सेकेंड्री प्रतिबंध का विरोध
- BRICS का कहना है- इनका असर आम लोगों, फूड सिक्योरिटी, हेल्थ और डेवलपमेंट पर पड़ता है
- युद्ध और वैश्विक सुरक्षा
बातचीत से युद्धों का समाधान
- बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन और पोलराइजेशन पर चिंता
- संघर्षों के समाधान के लिए डायलॉग, डिप्लोमेसी और मेडिटेशन पर जोर
- संघर्ष की रोकथाम और उसके मूल कारणों को दूर करने की बात
परमाणु खतरे पर चिंता
- बढ़ते न्यूक्लियर रिस्क पर चिंता
- परमाणु निरस्त्रीकरण, आर्म्स कंट्रोल और non-proliferation व्यवस्था को मजबूत करने की बात
- आउटर स्पेस में हथियारों की होड़ रोकने का भी समर्थन
पश्चिम एशिया/मिडिल ईस्ट
गाजा पर स्पष्ट रुख
- गाजा में सीजफायर लागू करने और मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच की मांग
- फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन का विरोध
- गाजा की जनसांख्यिकीय या ज्योग्राफिक स्थिति बदलने का विरोध
- फिलिस्तीन के UN में फुल मेंबरशिप के समर्थन को दोहराया
- टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन
- 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीन की बात, जिसकी राजधानी पूर्वी यरूशलेम हो
इजराइल-फिलिस्तीन
- नागरिकों और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा पर जोर
- गाजा में भुखमरी को युद्ध के तरीके के रूप में इस्तेमाल करने और मानवीय सहायता रोकने की निंदाॉ
- UNRWA के mandate और भूमिका का समर्थन
लेबनान
- लेबनान में सीजफायर का स्वागत
- UNSC Resolution 1701 को पूरी तरह लागू करने की मांग
- लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात
- UNIFIL personnel और installations की सुरक्षा पर जोर
सीरिया
- सीरिया की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन
- Syrian-led और UN-facilitated political process की वकालत
- विदेशी आतंकवादी लड़ाकों और आतंकवाद के खतरे पर चिंता
सूडान
- सूडान में बिगड़ते मानवीय संकट पर गंभीर चिंता
- तत्काल और स्थायी सीजफायर की मांग
- बातचीत के जरिए समाधान
- ‘अफ़्रीकी समस्याओं का अफ़्रीकी समाधान’ के सिद्धांत का समर्थन
BRICS देशों ने की पहलगाम आतंकी हमले की निंदा
ब्रिक्स के संयुक्त बयान में रूस और चीन समेत BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है. देशों ने कहा कि आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने देने वालों पर कार्रवाई करने पर भी सहमति बनी है.
समिट के बाद जिनपिंग से मिले PM मोदी
ब्रिक्स समिट के अलावा द्विपक्षीय मुलाकातों का सिलसिला भी जारी है. समिट के बाद पीएम मोदी और चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मीटिंग हुई. इससे पहले जिनपिंग ने ब्रिक्स को लेकर बयान दिया और कहा कि ब्रिक्स देशों को साथ मिलकर काम करना होगा. निजी स्वार्थों को छोड़ना होगा, तभी ग्लोबल साउथ का नई महाशक्ति के रूप में उदय होगा.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं. ऐसे में दिल्ली में उनकी सुरक्षा व्यवस्था और काफिले ने भी लोगों का ध्यान खींचा, क्योंकि जिनपिंग के काफिले की गाड़ियों को काले कवर से ढका गया था. वजह ये है कि काफिले में शामिल ‘रेड फ्लैग’ जैसी हाई-सिक्योरिटी कारें सुरक्षा सुविधाओं से लैस होती हैं. ऐसे में इन्हें कवर करके रखा जाता है, ताकि वाहन से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां कोई हासिल न कर सके.
ईरानी राष्ट्रपति से मुलाकात पर विदेश मंत्रालय का बयान जारी
पीएम मोदी और ईरान के प्रेसिडेंट पेजेश्कियान की मुलाकात के बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है, जिसमें ईरान के साथ भारत के हजारों साल मैत्रीपूर्ण संबधों का जिक्र किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया, ‘भारत चाहता है ईरान से संबंधित मुद्दों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से हल किया जाना चाहिए’.
PM मोदी ने ब्रिक्स नेताओं के साथ लगाया पेड़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में ब्रिक्स के अन्य नेताओं के साथ एक बरगद का पेड़ लगाया और इसे समूह की बढ़ती ताकत, गहरी जड़ों और साझा भविष्य का प्रतीक बताया. पीएम मोदी ने एक्स (ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, ‘यह ब्रिक्स के आदर्शों का सटीक प्रतीक है. गहरी जड़ें, बढ़ती ताकत और साझा भविष्य के लिए एकजुट होना. आने वाले समय में हमारी साझेदारी और भी मजबूत होती रहे’. इसके अलावा पीएम मोदी ब्रिक्स नेताओं के साथ भारत मंडपम में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी में भी गए.
‘फिलहाल ब्रिक्स मुद्रा शुरू करने का प्रस्ताव नहीं’
विदेश मंत्रालय में आर्थिक मामलों के सचिव सुधाकर दलेला ने समिट के दौरान कहा कि ब्रिक्स देशों के भीतर फिलहाल कोई साझा ब्रिक्स मुद्रा शुरू करने का प्रस्ताव नहीं है. उन्होंने कहा कि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान पर कुछ समय से चर्चा चल रही है और यह कोई नया विषय नहीं है. दलेला ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार में लेनदेन लागत को कम करने के लिए स्थानीय मुद्रा निपटान एक व्यावहारिक तंत्र है और इसे वैश्विक भुगतान और निपटान प्रणाली के पूरक के रूप में प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि यह दृष्टिकोण विभिन्न देशों के बीच वैश्विक व्यापार की दक्षता में सुधार करने में सहायक हो सकता है.
पीएम मोदी ने नेताओं के लिए डिनर का किया आयोजन
अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में भाग लेने के बाद भारत से रवाना हो गए. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाम करीब 7.30 बजे वैश्विक नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए गाला डिनर का आयोजन किया, जिसमें रूसी राष्ट्रपति पुतिन से लेकर शी जिनपिंग, ईरान का राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए.
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