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'गरीबी को पर्दों से क्यों ढंका गया', BRICS के लिए सजी दिल्ली की खुली पोल, लोग बोले-ये है बढ़ती हुई GDP

September 12, 2026

Time Updated: Saturday, September 12, 2026, 14:47 [IST]

दिल्ली में BRICS Summit 2026 चल रहा है। दुनिया के कई बड़े नेता राजधानी में जुटे हैं। उनके स्वागत के लिए दिल्ली को सजाया गया है। इसी बीच शहर की चमक-दमक के पीछे छिपी बस्तियों को लेकर एक नया सवाल खड़ा हो गया है। सवाल सिर्फ पर्दे लगाने का नहीं है। सवाल यह है कि क्या किसी शहर की गरीबी को मेहमानों से छिपाना विकास की तस्वीर का हिस्सा होना चाहिए।

OneIndia Hindi की टीम ने खुद मौके पर जाकर हालात का जायजा लिया। इस ग्राउंड रिपोर्ट में स्थानीय लोगों ने पर्दों के पीछे की बदहाल तस्वीर सामने रखी। यह वही कुली कैंप है जिसे साल 2023 के G20 सम्मेलन के दौरान भी इसी तरह ढका गया था, क्योंकि यह विदेशी प्रतिनिधियों के रास्ते में पड़ता था।

BRICS Summit 2026

बस्ती के लोगों के लिए यह नजारा कोई नया नहीं है। दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों का कहना है कि तीन दिन के प्रतिबंधों से उनका कामकाज ठप्प हो जाता है। बाहर जाना, राशन लाना और अपनी छोटी-मोटी दुकानें चलाना मुश्किल हो जाता है। कुछ लोगों का कहना है कि यह पर्दे उनकी गरीबी छुपाने के लिए लगाए गए हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि शहर को सुंदर और साफ-सुथरा दिखाने के लिए यह कदम ठीक है।

कुली कैंप के सामने लगे पर्दे से स्थानीय निवासियों को क्या दिक्कत?

वसंत विहार का कुली कैंप इस तरह की व्यवस्था पहली बार नहीं देख रहा है। 2023 के जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान भी बस्ती के आसपास इसी तरह की स्क्रीन लगाई गई थीं। उस समय यह इलाका विदेशी प्रतिनिधियों के आने-जाने वाले रास्ते में पड़ता था।

तब कुछ निवासियों ने बताया था कि स्क्रीन लगने के बाद बस्ती बाहर से दिखाई नहीं देती थी। साथ ही सुरक्षा और आवाजाही से जुड़े प्रतिबंधों का असर उनके रोजमर्रा के कारोबार पर भी पड़ा था। अब 18वें BRICS शिखर सम्मेलन से ठीक पहले ऐसी स्क्रीन दोबारा नजर आई हैं। बस्ती के कुछ लोगों का मानना है कि इनका मकसद बाहर से आने वाले गणमान्य लोगों को बस्ती की हालत से दूर रखना है। हालांकि हर निवासी इस बात को लेकर नाराज नहीं है।

कुछ लोगों की राय अलग है। उनका कहना है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान दिल्ली को साफ-सुथरा और व्यवस्थित दिखाना गलत नहीं है। लेकिन रोज कमाने-खाने वालों के लिए असली चिंता कुछ और है।

कुली कैंप में रहने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल है कि वे अपने काम तक आसानी से कैसे पहुंचें। रोजमर्रा का सामान कैसे खरीदें। अपना छोटा-मोटा कारोबार कैसे चलाएं। सम्मेलन के दौरान ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था का सीधा असर उनकी आवाजाही पर पड़ सकता है।

यही वजह है कि पर्दों को लेकर बहस दो हिस्सों में बंटी दिखती है। एक तरफ दिल्ली को अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने बेहतर तरीके से पेश करने की कोशिश है। दूसरी तरफ उन लोगों की जिंदगी है, जो उसी चमकदार शहर के भीतर रोज संघर्ष करते हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों ने 7.8% GDP ग्रोथ पर तंज कसा

इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। यूजर्स 7.8% की बढ़ती GDP दर का हवाला देकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं। इंटरनेट पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

एक यूजर ने लिखा, "7.8% की रफ्तार से बढ़ती GDP को पर्दों से इसलिए ढका गया ताकि विदेशी मेहमान यह राज न सीख लें।" एक अन्य यूजर ने लिखा, "12 साल पहले कांग्रेस पर बरसने वाले लोग आज खुद झूठी शान के लिए पर्दा लगा रहे हैं। यह नाकामी छुपाने की कोशिश है।"

एक पोस्ट में तंज करते हुए कहा गया, "झुग्गियां ढक गईं तो क्या दिल्ली भी सज गई? तीन दिन की पाबंदियों के बाद जिन लोगों ने इन्हें झेला है, उन्हें यही तिरपाल वापस दे देना चाहिए।"

एक अन्य यूजर ने लिखा, "अगले बड़े आयोजन के लिए फिर नया पर्दा लगाया जाएगा। शहर की तस्वीर चमकती रहेगी और गरीबी उसके पीछे खड़ी रहेगी।"

कुछ पोस्ट में 7.8 प्रतिशत बढ़ती जीडीपी का भी व्यंग्यात्मक जिक्र किया गया। तंज यह था कि अगर देश की अर्थव्यवस्था इतनी तेजी से आगे बढ़ रही है तो राजधानी की गरीबी को पर्दों के पीछे छिपाने की जरूरत क्यों पड़ रही है। यह सोशल मीडिया की टिप्पणी है, इसे दिल्ली की जीडीपी का आधिकारिक आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

असल सवाल पर्दे से आगे का है

विकास के इस मॉडल पर उठ रहे सवाल अब गंभीर रूप ले चुके हैं। क्या अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में चमक-धमक दिखाने के लिए पर्दा डालना ही एकमात्र समाधान है? BRICS जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान शहर को सजाना और सुरक्षा व्यवस्था करना सामान्य बात है। लेकिन गरीबी और बस्ती की असली तस्वीर को पर्दे के पीछे कर देना एक अलग सवाल खड़ा करता है।

OneIndia की ग्राउंड रिपोर्ट ने इसी सवाल को सामने रखा है। क्या शहर को सुंदर बनाने का मतलब सिर्फ बाहर से तस्वीर बदलना है? या फिर उन बस्तियों की हालत सुधारना भी उसी विकास का हिस्सा होना चाहिए, जिन्हें हर बड़े आयोजन से पहले ढक दिया जाता है? BRICS Summit खत्म हो जाएगा। विदेशी मेहमान लौट जाएंगे। पर्दे भी हट जाएंगे। लेकिन कुली कैंप के लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी वहीं रहेगी। यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है।