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Bodhana Sivanandan ने तोड़ा 38 साल पुराना शतरंज रिकॉर्ड, सबसे कम उम्र की महिला इंटरनेशनल मास्टर बनीं

October 24, 2026

Bodhana Sivanandan ने तोड़ा 38 साल पुराना शतरंज रिकॉर्ड, सबसे कम उम्र की महिला इंटरनेशनल मास्टर बनीं

बोधना सिवानंदन का कमाल (Photo: Getty)

11 साल की भारतीय मूल की बोधना सिवानंदन ने शतरंज की दुनिया में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है. उन्होंने 38 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे कम उम्र की महिला इंटरनेशनल मास्टर (IM) का खिताब अपने नाम किया है. बोधना ने ये उपलब्धि 11 साल, सात महीने और 16 दिन की उम्र में हासिल की है. इससे पहले यह रिकॉर्ड महान शतरंज खिलाड़ी जुडिट पोल्गर के नाम था, जो उन्होंने 1988 में बनाया था. बोधना अब तक की सातवीं सबसे युवा खिलाड़ी (पुरुष या महिला) हैं. जिन्होंने इंटरनेशनल मास्टर का खिताब जीता है. वह सबसे युवा इंटरनेशनल मास्टर्स की लिस्ट में जवोखिर सिंदारोव से सिर्फ एक महीने पीछे हैं, और भारत के डी गुकेश से आगे निकल गई हैं.

बोधना ने कई रिकॉर्ड किए अपने नाम

ये पहली बार नहीं है जब बोधना ने ऐसा कोई रिकॉर्ड बनाया है. कुछ ही समय पहले वह सबसे युवा वुमन ग्रैंडमास्टर (WGM) भी बनी थीं. इसके अलावा, वह सबसे युवा वुमन इंटरनेशनल मास्टर (WIM) और वुमन फिडे मास्टर (WFM) का खिताब भी जीत चुकी हैं.

उन्होंने सबसे कम उम्र में किसी ग्रैंडमास्टर को हराने वाली लड़की का रिकॉर्ड भी बनाया था. बोधना अब अपनी निगाहें ग्रैंडमास्टर बनने पर गड़ाए हुए हैं.

बोधना का अगला लक्ष्य ग्रैंडमास्टर

एक मैच के बाद इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वो इंटरनेशनल मास्टर बनने से खुश हूं, लेकिन उम्मीद है कि अब वो जल्द ही ग्रैंडमास्टर का खिताब भी हासिल कर पाएंगी.

शतरंज से जुड़ाव और परिवार

बोधना के मात-पिता मूल रूप से तमिलनाडु के त्रिची से हैं, जो बाद में यूके चले गए थे. उनके पिता, शिवनंदन वेलायुथम ने 2007 में आईटी सेक्टर में काम करने के लिए यूके जाने की बात कही. उन्होंने बताया कि बोधना का जन्म और पालन पोषण लंदन में हुआ है. पिता के मुताबिक बोधना ने सिर्फ पांच साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू कर दिया था.

साकेत शर्मा

साकेत शर्मा

'कौन बनेगा करोड़पति' गेम शो से शुरू हुआ सफर न्यूज नेशन, इंडिया न्यूज, इंडिया डॉट कॉम और Editorji जैसे पड़ावों से गुजरा. इसी कड़ी में पिछले 5 सालों से मैं TV9 हिंदी के साथ जुड़ा हूं. यहां भी खेल की खबरों को बताना मेरा काम है. TV, डिजिटल और प्रोडक्शन हाउस, तीनों ही दुनिया की समझ और कुल मिलाकर एक दशक से भी ज्यादा का मेरे पास अनुभव है. हर रोज कुछ नया सीखने और नई क्रिएटिव चीज करने की कोशिश करता हूं. असफलता से घबराता नहीं और सफलता पर इतराता नहीं. बस कोशिश यही करता हूं कि हमेशा अपना बेस्ट दे सकूं. आज तक यही करता आया हूं और आगे भी इरादा ऐसा ही है. फिर चाहे काम डेस्क पर बैठकर खेल की खबरों को अपने शब्दों में पिरोने का हो या फिर फील्ड में उतरकर उसे कैमरे पर उतारने का. सीधी भाषा में कहें तो मैं खेल के मैदान पर होने वाली हर हलचल को आपतक पहुंचाने वाला एक खिलाड़ी हूं.

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