दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को 19 वर्षीय साहिल लोचब के मामले में पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की, जो कथित तौर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान पेलेट लगने से घायल हुआ था. विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर धरने के करीब आठ घंटों बाद ये एफआईआर दर्ज हुई.
हालांकि एफआईआर में किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नामित नहीं किया गया है. पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 118 और 125 के तहत एफआईआर दर्ज की. धारा 118 खतरनाक हथियारों या साधनों का उपयोग करके स्वेच्छा से चोट पहुंचाने या गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित है, जबकि धारा 125 दूसरों की जान या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कृत्यों से संबंधित है.
धारा 118 में कितनी सजा: धारा 118 के तहत सामान्य चोट पहुंचाने पर 3 साल तक की जेल, या 20,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकता है. गंभीर चोट पहुंचाने पर 1 साल से लेकर 10 साल तक की कैद और जुर्माना, या कुछ मामलों में यह आजीवन कारावास तक भी हो सकती है.
धारा 125 में कितनी सजा: धारा 125 के तहत 3 महीने तक की जेल, या 2,500 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है. चोट लगने पर: 6 महीने तक की जेल, या 5,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों और गंभीर चोट लगने पर 3 साल तक की जेल, और 10,000 रुपये तक का जुर्माना का प्रावधान है.
संसद मार्ग थाने में दर्ज हुई FIR
संसद मार्ग पुलिस स्टेशन दर्ज FIR No: 0085 में कहा गया है कि प्लेस के पास पेलेट की चोट से मेरी दाहिनी आंख की रोशनी चले जाने की शिकायत और एफआईआर दर्ज करने की प्रार्थना.
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पीड़ित ने अपना नाम साहिल लोचब बताया है. उनके पिता का नाम दीपक है और वह मकान नं 5, अग्रवाल कॉलोनी, न्यू अनाज मंडी, नजफगढ़, दिल्ली का रहने वाला है. उसकी मेरी उम्र करीब 20 साल है.
उसने शिकायत में कहा कि वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) से पढ़ाई कर रहा हैं. उनके मेरे पिता दिव्यांग हैं और घर में वह सबसे बड़ा बेटा है. उसने लिखा, आज तक मेरे ऊपर न तो कभी कोई मुकदमा दर्ज हुआ और न ही कभी थाने से मेरा कोई वास्ता पड़ा है.
पीड़ित ने 20 जुलाई की घटना का किया जिक्र
उसने लिखा, 20 जुलाई, 2026 को जंतर-मंतर पर परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन था और वहां से संसद तक मार्च निकाला जा रहा था. मैं खुद एक छात्र हैं और 2025 में हुई दिल्ली पुलिस परीक्षा में धांधली व नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन में भाग लेने जंतर-मंतर पर गया. यहां पर दोपहर के समय लाठीचार्ज हुआ और भगदड़ मच गई और मैं भी अन्य युवाओं की भीड़ के साथ भागता-भागता पालिका कनॉट प्लेस एरिया के पास पहुंचा.
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उसने लिखा, और जब मैं भीड़ में आगे-आगे पहुंचा तो मेरे हाथ में भारत का तिरंगा झंडा था तथा हजारों छात्र व युवा वहां थे. वहां पर आंसू गैस व लाठीचार्ज हुआ, जिससे वहां भी भगदड़ मच गई और इसी समय में मेरा चेहरा दूसरी तरफ था, तो मुझे एकदम ऐसा लगा कि मेरे शरीर के दाहिनी ओर दिल के नजदीक छाती पर, बाजू व आंख पर कुछ फटा, तो मैंने मुड़कर देखा तो नीली पोशाक में एक व्यक्ति ने जिसके हाथ में बड़ी सी बंदूक थी, उससे मुझे बहुत सारे धातु के पेलेट लगे, जिसके बाद मेरी समझ में पेलेट लगने से कुछ नहीं आया और छात्रों की भीड़ मेरे आसपास जमा हो गई.
घायल होने से लेकर सर्जरी तक का जिक्र
उसने लिखा, मुझ पर पांच या छः बार धातु पेलेट चलाए गए, जिसके बाद मेरी आंख, चेहरे, हाथ व छाती से खून बह रहा था और मुझे दाहिनी आंख से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. इसके बाद मुझे बाइक पर बिठाया गया और लेडी हार्डिंग हॉस्पीटल में ले जाया गया, जहां उन्होंने मेरी पहली MLC की और उसके बाद मुझे सफदरजंग अस्पताल भेज दिया गया. इसके बाद मुझे AIIMS में भेज दिया गया. 21 जुलाई, 2026 को रात 1 बजे के करीब मुझे AIIMS, RPC Eye Center भेजा गया और इसके बाद मुझे AIIMS ट्रॉमा सेंटर भेजा गया.
उसने लिखा, 21 जुलाई, 2026 की दोपहर को मुझे दाखिल किया और 22 जुलाई की रात को मेरी आंख का पहला ऑपरेशन किया गया. डॉक्टर ने मेरी MLC में भी साफ लिखा है कि मेरी आंख में चोट पैलेट से लगी है और यह भी लिखा है कि आंख की रोशनी वापस आने की संभावना 1 प्रतिशत से भी कम है. AIIMS में मेरा CT Scan हुआ, जिसमें करीब 200 से अधिक छरें मेरे शरीर में हैं, जो कि आंख में, गर्दन में, छाती में दिल के पास, जबड़े में, बाजू में इत्यादि हैं. दाहिनी आंख के गढ़े में और उसके सबसे पीछे हैं, जो कि नस के पास हैं और उसे निकाला नहीं जा सकता. ऐसे ही दो छर्रे जीवन भर मेरी आंख के अंदर रहेंगे और मेरे दिल के पास भी और डॉक्टर ने मुझे कहा है कि इसका इलाज लंबा चलेगा व आंख के छर्रे नहीं निकाले जा सकते.
पीड़ित ने जांच में सहयोग का किया वादा
उसने कहा, 20 जुलाई, 2026 को जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस के भीतर और बाहर के घेरे, पटेल चौक, राजीव चौक, मेट्रो स्टेशन, ट्रैफिक पुलिस के सीसीटीवी तथा ड्रोन फुटेज आदि भी सुरक्षित करा ली जाए. मेरे ऑपरेशन के दौरान मेरे शरीर से जो धातु छर्रे निकाले गए हैं, वे मंगवाकर जांच के लिए भेजे जाएं.
उसने कहा किलेडी हार्डिंग हॉस्पीटल, सफदरजंग हॉस्पीटल, RPC Eye Center, AIIMS, Trauma Center, AIIMS आदि से मेरी MLC व इलाज के सब कागज मंगवा लिए जाएं. मेरे इलाज और मुआवजे के लिए मामले पर विचार किया जाए, क्योंकि मेरा इलाज बहुत लंबा चलेगा. मैं अपना बयान दर्ज कराने और जांच में सहयोग के लिए तैयार हूं.
इंसाफ की तरह यह पहला कदम… बोले राहुल गांधी
FIR दर्ज होने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि यह इंसाफ की तरफ पहला कदम है. केस रजिस्टर हो गया है. उसे पेलेट लगे एक महीना हो गया है. उसके शरीर में अभी भी पेलेट्स फंसे हुए हैं; तीन उसकी आंख में हैं, और वह उससे देख नहीं सकता. तीन या चार उसके दिल के पास हैं. उन्होंने कहा कि इस नौजवान के साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ है. हम आज सुबह 11:00 या 11:30 बजे यहां पहुंचे. हम इतने समय से यहां हैं—अभी लगभग पौने सात बज रहे हैं—और अब जाकर FIR दर्ज हुई है.
अन्याय के खिलाफ लड़ने से 👇 pic.twitter.com/MWRIPeY5f7
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राहुल गांधी ने सवाल किया कि जरा सोचिए: इस देश में कितनी औरतों के साथ रेप होता है, कितने बच्चों को मारा जाता है, कितने लोगों को गोली मारी जाती है, और कितने लोगों के शरीर में पेलेट्स होते हैं. यह पुलिस स्टेशन दिल्ली के ठीक बीच में है, फिर भी यहां इंसाफ नहीं हो रहा है.
उन्होंने कहा कि सोचिए किसी गांव या छोटे शहर के पुलिस स्टेशन पर क्या होता होगा? हमने यहां कुछ गलत नहीं किया; हमने बस एक भारतीय नागरिक के लिए—उसकी मां और पिता के लिए—इंसाफ मांगा था—और इसमें 8 घंटे लग गए. आखिरी मंजूरी—आखिरी ‘ठीक है’—आनी ही थी. होम सेक्रेटरी और खुद अमित शाह से बात कर यह FIR दर्ज हुई. तो, आप समझ सकते हैं कि FIR को कौन रोक रहा था. ये पुलिस ऑफिसर इसे रजिस्टर करना चाहते थे; दूसरे भी करना चाहते थे, लेकिन ऊपर से इंसाफ पर ब्रेक लगाए जा रहे थे.
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जितेन्द्र कुमार शर्मा
साल 2002 से क्राइम और इन्वेस्टिगेशन रिपोर्टिंग का अनुभव। नवभारत टाइम्स, अमर उजाला, शाह टाइम्स के अलावा टीवी मीडिया में BAG Films के नामी शो सनसनी और रेड अलर्ट में काम किया। उसके बाद न्यूज 24, इंडिया टीवी में सेवाए दी और टीवी 9 भारतवर्ष के साथ सफर जारी है।
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