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वंदे मातरम् पर कांग्रेस-BJP में रार, कर्नाटक सरकार के फैसले से क्या विवाद?

September 10, 2026

वंदे मातरम् पर कांग्रेस-BJP में रार, कर्नाटक सरकार के फैसले से क्या विवाद?

भाजपा, वंदे मातरम और शिवकुमार.

वंदे मातरम् को लेकर फिर से कांग्रेस शासित कर्नाटक सरकार और भाजपा आमने-सामने है. कर्नाटक सरकार ने वंदे मातरम् गीत के गायन संबंधी केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी है और आदेश दिया है कि राज्य सरकार के कार्यक्रमों में पूरे छह पैरा के बजाय केवल दो पैरा ही गाए जाएं.

यह महत्वपूर्ण घटनाक्रम कांग्रेस हाईकमान के नेताओं द्वारा 1937 के प्रस्ताव के अनुसार केवल पहले दो पैरा के गायन की इच्छा व्यक्त करने के बाद सामने आया है. इससे पहले केपीसीसी अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने भी वंदे मातरम् गीत के छह पैरा के गायन पर आपत्ति जताई थी.

राज्य सरकार के आदेश में क्या है?

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान देशवासियों में राष्ट्रवाद, एकता और देशभक्ति की भावना जगाने में वंदे मातरम् गीत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के आधिकारिक संस्करण और विभिन्न सरकारी एवं सार्वजनिक समारोहों में इसके गायन या वादन के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए हैं.

इन दिशानिर्देशों में राष्ट्रीय गीत के वादन और सामूहिक गायन के अवसरों का अलग-अलग उल्लेख किया गया है. सरकार ने राज्य में आयोजित विभिन्न सरकारी समारोहों और कार्यक्रमों के स्वरूप और संदर्भ के अनुसार, गीत के वादन/गायन में एकरूपता, सम्मान और उचित शिष्टाचार बनाए रखने की आवश्यकता को ध्यान में रखा है.

इस संदर्भ में, मंत्रिमंडल के निर्णय के अनुसार, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के अवर सचिव संदीप बीके के आदेशानुसार, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों को छोड़कर, शेष राज्य सरकारी कार्यक्रमों मेंवंदे मातरम् के केवल पहले दो पैरा ही गाए जाएंगे.

वंदे मातरम् पर कांग्रेस का 1937 वाला फॉर्मूला

डीके शिवकुमार सरकार का यह फैसला पार्टी के उस कड़े रुख को दिखाता है जिसमें वह केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस आदेश का विरोध कर रही है जिसमें कहा गया था कि सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत पूरा गाया जाए. पिछले महीने, कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने अपने 1937 के प्रस्ताव को मानने का फैसला किया था कि पार्टी कार्यक्रमों में केवल पहले दो पद ही गाए जाएंगे.

फरवरी में, केंद्र ने सार्वजनिक समारोहों और सरकारी कार्यक्रमों में पूरा वंदे मातरम् गाना जरूरी कर दिया था और संसद में एक बिल पास किया था, जिसमें राष्ट्रगीत के गायन में रुकावट डालना या उसे रोकना एक क्रिमिनल ऑफेंस बनाया गया था. कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि वंदे मातरम पर उसका रुख 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल की मौजूदगी में लिए गए टॉप लीडरशिप के फैसले के मुताबिक है.

अगस्त में, कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खरगे की गोवा में एक कार्यक्रम में वंदे मातरम् का “अधूरा” वर्जन गाने के लिए आलोचना हुई थी. भाजपा के तुष्टीकरण के आरोपों के जवाब में, उन्होंने कहा कि उन्होंने गांधी, नेहरू, पटेल और अटल बिहारी वाजपेयी का गाया हुआ वर्जन गाया है. उन्होंने रिपोर्टर्स से कहा था कि अगर यह वर्जन गाना जुर्म है, तो उन नेताओं के खिलाफ भी पुलिस केस दर्ज होने चाहिए.

भाजपा ने कर्नाटक सरकार के आदेश का किया विरोध

दूसरी ओर, इस संबंध में बीजेपी ने एक लिखित स्टेटमेंट जारी किया है. बयान में कहा गया है कि संसद के निर्णय की कांग्रेस शासित प्रदेश में अवमानना—क्या यह बाबा साहेब और संविधान का अपमान नहीं? बयान में कहा गया है किराष्ट्रहित में संसद द्वारा लिए गए निर्णयों का सम्मान करना संवैधानिक मर्यादा है, लेकिन कर्नाटक की कांग्रेस सरकार राजनीतिक दुराग्रह में इस मर्यादा को ही चुनौती दे रही है.

बयान में कहा गया है कि बाबा साहेब के संविधान की भावना के विरुद्ध यह आचरण क्यों? कांग्रेस बताए—राष्ट्रगीत के बाकी अंतरों से उसे आपत्ति क्यों है? वंदे मातरम् केवल गीत नहीं, भारत की स्वतंत्रता चेतना और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है. राष्ट्रभावना पर राजनीति नहीं, सम्मान होना चाहिए. देश संविधान से चलेगा, कांग्रेस की सुविधा से नहीं.

बता दें कि वंदे मातरम् – जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने नॉवेल आनंद मठ में लिखा था – सबसे पहले 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था, लेकिन बाद में मुस्लिम लीग के नेताओं ने इस गाने पर आपत्ति जताई और हिंदू देवी-देवताओं के रेफरेंस की वजह से इसे इस्लाम विरोधी बताया. 1937 में, कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने तय किया कि वंदे मातरम के सिर्फ दो हिस्से ही गाए जाएंगे.

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Amod Rai

Amod Rai

21 सालों से राजनीतिक, सामाजिक और पॉलिसी संबंधित विषयों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव। लगातार 2 दशक से बीजेपी, संघ परिवार, संसद और केंद्र सरकार की खबरों पर विशेष निगाह

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