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BHU में छात्रों ने कुलपति कार्यालय का किया घेराव: प्राक्टोरियल बोर्ड ने रोका, बोले- अस्पताल में MS के नियुक्ति के बाद चार्ज देने में क्यों हो रही देरी - Varanasi News

July 16, 2026

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वाराणसी1 घंटे पहले

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय में गुरुवार की दोपहर 3 बजे छात्रों ने सर सुंदरलाल चिकित्सालय के नवनियुक्त चिकित्सा अधीक्षक (मेडिकल सुपरिंटेंडेंट) एवं ट्रॉमा सेंटर प्रभारी को तत्काल कार्यभार ग्रहण कराने की मांग को लेकर कुलपति कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कुलपति को ज्ञापन सौंपा और जल्द निर्णय लेने की मांग की।

प्रदर्शन का नेतृत्व छात्र नेता शिवांश सिंह और हर्ष त्रिपाठी ने किया। छात्रों का कहना था कि संबंधित पदों पर नई नियुक्तियां किए जाने के बावजूद अब तक अधिकारियों को औपचारिक रूप से कार्यभार नहीं सौंपा गया है। इससे अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है और कर्मचारियों एवं आम लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

छात्रों ने वीसी को पत्र दिया छात्र नेता शिवांश सिंह ने कहा कि सर सुंदरलाल चिकित्सालय प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण चिकित्सा संस्थानों में से एक है। ऐसे संस्थान में नियुक्ति के बाद भी अधिकारियों को कार्यभार ग्रहण न कराना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि यदि समय पर कार्यभार हस्तांतरण नहीं होता है तो प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों में अनावश्यक बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि नई नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए ताकि अस्पताल का संचालन पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ हो सके।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन दो दिनों के भीतर इस मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं लेता है, तो छात्र आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र रूप देने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि छात्रों का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में सुचारु और पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित कराना है।

नियुक्तियों के बाद नहीं हो रहा नाम का ऐलान छात्र नेता हर्ष त्रिपाठी ने कहा कि नई नियुक्तियों के बाद भी पुराने प्रभारियों द्वारा कार्य जारी रहना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को बिना किसी विलंब के कार्यभार हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए, ताकि प्रशासनिक अधिकारों, अभिलेखों एवं वित्तीय दायित्वों का विधिवत हस्तांतरण सुनिश्चित हो सके। उनके अनुसार पारदर्शी प्रशासन ही विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता को मजबूत करता है।

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