अंग्रेजी शब्द बैंक का शुद्ध हिंदी पर्याय 'अधिकोष' या 'कोषागार' है। दैनिक बोलचाल में अत्यधिक प्रचलन के कारण अधिकतर लोग इसके वास्तविक हिंदी नाम से अनजान रहते हैं।
नई दिल्ली, 03 अगस्त, 2026 (दून हॉराइज़न)।
Bank Hindi Name : दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाले कई शब्द हमारी भाषा का इतना अटूट हिस्सा बन चुके हैं कि हम उनके मूल रूप पर ध्यान देना छोड़ देते हैं। बैंकिंग सेवाएं हर व्यक्ति की दिनचर्या का हिस्सा हैं, लेकिन ‘बैंक’ शब्द खुद अंग्रेजी भाषा का है।
अगर किसी सामान्य व्यक्ति से पूछा जाए कि बैंक का शुद्ध हिंदी शब्द क्या है, तो अधिकांश लोग सोच में पड़ जाते हैं। आम तौर पर 100 में से 90 लोग इसका सटीक उत्तर नहीं दे पाते। कोई इसे पैसे रखने की जगह कहता है तो कोई इसे तिजोरी या खजाना कहकर टाल देता है।
व्याकरण और शब्दकोश के अनुसार बैंक का सही और शुद्ध हिंदी नाम ‘अधिकोष’ अथवा ‘कोषागार’ है। प्राचीन समय में जहां धन, संपत्ति और राजकीय खजाने को सुरक्षित रखा जाता था, उस स्थान को कोषागार कहा जाता था।
वित्तीय संस्था के रूप में जब आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था विकसित हुई, तब इसके लिए ‘अधिकोष’ शब्द निर्धारित किया गया। अधिकोष का सीधा अर्थ होता है वह स्थान जहां धन का मुख्य कोष या संचय हो।
वर्तमान समय में आम बोलचाल की भाषा में ‘बैंक’ शब्द इतना ज्यादा घुल-मिल गया है कि ‘अधिकोष’ या ‘कोषागार’ जैसे शब्द प्रचलन से बाहर होते जा रहे हैं। छात्र, युवा और नौकरीपेशा वर्ग रोजमर्रा के जीवन में सीधे अंग्रेजी शब्दों को प्राथमिकता देने लगे हैं।
विद्यालयों, कॉलेजों और सामान्य विज्ञापनों में भी ‘अधिकोष’ के स्थान पर केवल ‘बैंक’ शब्द का ही प्रयोग होता है। इस वजह से नई पीढ़ी इन समृद्ध हिंदी शब्दों से पूरी तरह से अनभिज्ञ होती जा रही है।
देश के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में लोग अपनी क्षेत्रीय भाषा के हिसाब से इसे ‘पैसे जमा करने की जगह’ या ‘महाजन/साहूकार की कोठी’ भी कह देते हैं। शहरी क्षेत्रों में लोग सीधे बैंक शब्द का ही प्रयोग करते हैं।
यदि किसी सार्वजनिक स्थान पर ‘अधिकोष’ शब्द का प्रयोग किया जाए, तो लोग उसे समझने में कुछ पल का समय लेते हैं। भाषा विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूल और दफ्तरों में हिंदी के मूल शब्दों के घटते प्रयोग से यह स्थिति पैदा हुई है।
अस्पताल के लिए ‘हॉस्पिटल’, विद्यालय के लिए ‘स्कूल’ और अधिकोष के लिए ‘बैंक’ जैसे शब्द अब हिंदी भाषी क्षेत्रों की बोलचाल में पूरी तरह रच-बस चुके हैं। भाषा का यह बदलता रूप जहां संवाद को आसान बनाता है, वहीं मूल शब्दावली के अस्तित्व पर सवाल खड़े करता है।