भारतीय मूल के नासा एस्ट्रोनॉट अनिल मेनन सोयुज MS-29 मिशन से ISS पहुँचे हैं। 8 महीने के इस मिशन में वे AI डॉक्टर तकनीक और सेमीकंडक्टर पर प्रयोग करेंगे। यह शोध भविष्य के चंद्र व मंगल मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
नासा के भारतीय मूल के एस्ट्रोनॉट अनिल मेनन ने इतिहास रच दिया है। वह सोयुज MS-29 मिशन के जरिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पहुंच गए हैं। उनके साथ रूस की स्पेस एजेंसी रॉसकॉसमॉस के प्योत्र डुबरोव और अन्ना किकिना भी हैं। उनकी सोयुज कैप्सूल कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से लॉन्च हुई थी। भारतीय समय के मुताबिक, रात 11:26 बजे कैप्सूल ने ISS से सफलतापूर्वक डॉकिंग की और आज सुबह करीब 2 बजे टीम ने स्पेस स्टेशन के अंदर कदम रखा। अनिल के पिता मलयाली हैं।
8 महीने का साइंटिफिक मिशन
अब अनिल मेनन और उनकी टीम के लिए अगले 8 महीने काफी व्यस्त रहने वाले हैं। इस दौरान बायोलॉजी, मेडिकल टेक्नोलॉजी और मटीरियल साइंस जैसे कई फील्ड्स में एक्सपेरिमेंट किए जाएंगे। इस मिशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से मेडिकल जांच करने से लेकर हाई-क्वालिटी वाले सेमीकंडक्टर क्रिस्टल बनाने तक के काम शामिल हैं। इन सभी रिसर्च से मिली जानकारी भविष्य में चांद और मंगल पर जाने वाले इंसानी मिशनों के लिए बेहद अहम साबित होगी।
AI की मदद से मेडिकल जांच
इस मिशन की सबसे खास बात है स्पेस में एक 'AI डॉक्टर' को टेस्ट करना। यानी, एक ऐसी टेक्नोलॉजी जो बिना धरती पर मौजूद डॉक्टरों की रियल-टाइम मदद के एस्ट्रोनॉट्स की सेहत की जांच कर सके। अनिल मेनन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) की मदद से अल्ट्रासाउंड करने का प्रयोग करेंगे। यह टेक्नोलॉजी भविष्य के लिए बहुत जरूरी है, खासकर जब इंसान लंबे समय के लिए चांद या मंगल पर जाएगा। क्योंकि इतनी दूरी से धरती पर बात करने में काफी समय लगता है, जिससे तुरंत मेडिकल मदद मिलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में AI सिस्टम खुद अल्ट्रासाउंड इमेज को एनालाइज करके जरूरी जानकारी दे सकेगा।
सेमीकंडक्टर रिसर्च में भी लेंगे हिस्सा
मेडिकल रिसर्च के अलावा, अनिल मेनन सेमीकंडक्टर क्रिस्टल बनाने से जुड़े प्रयोगों में भी हिस्सा लेंगे। स्पेस की जीरो-ग्रैविटी में बने ये क्रिस्टल बहुत हाई-क्वालिटी के होते हैं। इनसे भविष्य में पावरफुल कंप्यूटर, AI सिस्टम और एडवांस्ड मेडिकल डिवाइस बनाने में मदद मिलेगी।
स्पेसएक्स से नासा तक का सफर
अनिल मेनन को 2021 में नासा ने अपने एस्ट्रोनॉट प्रोग्राम के लिए चुना था। इससे पहले वह स्पेसएक्स के पहले फ्लाइट सर्जन के तौर पर काम कर चुके हैं। स्पेस में इंसानी शरीर पर पड़ने वाले असर को लेकर उन्हें लंबा अनुभव है। दिलचस्प बात यह है कि उनकी पत्नी अन्ना मेनन भी नासा की एस्ट्रोनॉट हैं और 2024 के पोलारिस डॉन मिशन का हिस्सा थीं।
अनुभवी हैं रूसी साथी
अनिल के साथ गए रूसी एस्ट्रोनॉट्स प्योत्र डुबरोव और अन्ना किकिना भी काफी अनुभवी हैं। यह दोनों की दूसरी स्पेस यात्रा है। किकिना इससे पहले स्पेसएक्स के क्रू-5 मिशन पर ISS जाने वाली पहली रूसी कॉस्मोनॉट बनकर इतिहास रच चुकी हैं।
भविष्य की उम्मीदें
नासा का लक्ष्य भविष्य में इंसानों को सुरक्षित रूप से चांद और फिर मंगल पर भेजना है। इस बड़े प्लान में स्पेस में इलाज की बेहतर सुविधाएं एक अहम हिस्सा हैं। इसलिए, अनिल मेनन के इस AI डॉक्टर वाले एक्सपेरिमेंट के नतीजों पर पूरी दुनिया के स्पेस साइंटिस्ट्स की नजरें टिकी हैं।
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