Amitabh Bachchan Court Hearing: दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को उनके 'पर्सनैलिटी राइट्स' मामले में 16 नवंबर को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। अगर तब तक समझौता औपचारिक रूप से पूरा नहीं होता है, तो उन्हें खुद कोर्ट आना होगा।
Amitabh Bachchan Legal Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को एक अहम निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर उनके 'पर्सनैलिटी राइट्स' (व्यक्तित्व अधिकार) से जुड़े मामले में समझौता पूरा नहीं होता है, तो उन्हें अगली सुनवाई पर खुद अदालत में पेश होना होगा।
कोर्ट को औपचारिक समझौते का इंतजार
जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने यह आदेश तब दिया जब कोर्ट को बताया गया कि कुछ प्रतिवादियों (defendants) के साथ मध्यस्थता के जरिए आपसी समझौता हो गया है। हालांकि, बच्चन की तरफ से कुछ लॉजिस्टिक दिक्कतों की वजह से अभी तक समझौते पर औपचारिक रूप से साइन नहीं हो पाए हैं।
कोर्ट ने अमिताभ बच्चन को जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने और समझौते को रिकॉर्ड पर लाने के लिए समय दे दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
पेश होने का कानूनी आधार
अदालत ने साफ किया है कि अगर समझौता नहीं होता है या अधूरा रहता है, और बच्चन अपने दावों को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो उन्हें अगली तारीख पर व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहना होगा।
आदेश में बताया गया है कि उनकी मौजूदगी से कोर्ट को सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC), 1908 के आदेश X नियम 2 और आदेश V नियम 3, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 168 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।
क्या है पर्सनैलिटी राइट्स का यह मामला?
अमिताभ बच्चन ने अपने पर्सनैलिटी राइट्स को सुरक्षित रखने के लिए एक स्थायी रोक (permanent injunction) की मांग करते हुए यह मुकदमा दायर किया था। 25 नवंबर 2022 को हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में एकतरफा अंतरिम रोक (ex-parte ad-interim injunction) लगा दी थी।
सुनवाई के दौरान, दोनों पक्षों ने मध्यस्थता के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश की। ताजा आदेश के मुताबिक, कुछ लोगों के साथ समझौता हो गया है, लेकिन अभी इस पर साइन होना और इसे कोर्ट में पेश किया जाना बाकी है। यह मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है।
इस केस में अमिताभ बच्चन की तरफ से वकील ध्रुव आनंद, धनंजय खन्ना और भव्या वर्मा पेश हुए। वहीं, कुछ प्रतिवादियों की ओर से वकील विनय मोहन शर्मा, टीना गर्ग, एम. के. घोष, कुशल कुमार और ऋषभ सक्सेना ने पैरवी की।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बच्चन ने आरोप लगाया कि कई लोग और कंपनियां बिना उनकी इजाजत के उनके नाम, आवाज और तस्वीर का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर रहे हैं। उन्होंने अपने नाम और पहचान के इस गलत इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाने की मांग की थी।