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Allahabad High Court Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश; गवाहों के बयानों की अनिवार्य हो ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग - Haribhoomi

September 18, 2026

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पुलिस जांच और आपराधिक मामलों की सुनवाई को अधिक निष्पक्ष व पारदर्शी बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है। अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 180 के तहत गवाहों के बयान दर्ज करते समय उनकी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने पर विचार किया जाए।

Allahabad High Court

इलाहाबाद हाई कोर्ट

  • Published: 18 Sep 2026, 11:59 AM IST
  • Last Updated: 18 Sep 2026, 11:59 AM IST

उत्तर प्रदेश की पुलिस जांच प्रणाली में बड़े पैमाने पर सुधार लाने और अदालती कार्यवाहियों को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अक्सर मामलों की सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा लिखे गए बयानों पर फर्जीवाड़े और मनमानी के आरोप लगते रहते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने यूपी के डीजीपी से गवाहों के बयानों की डिजिटल/इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने के संबंध में आवश्यक कदम उठाने को कहा है।

आगरा के दहेज मामले की सुनवाई में सामने आई लापरवाही
यह महत्वपूर्ण निर्देश इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने आगरा जिले से जुड़ी एक महिला (चंद्रकांत) की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि उसने पहली शिकायतकर्ता का बयान दर्ज करते समय ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की थी। इस लापरवाही पर कोर्ट द्वारा जवाब मांगे जाने के बाद जांच अधिकारी ने अदालत के सामने बिना शर्त माफी मांगी।

वैकल्पिक छूट के दुरुपयोग पर जताई चिंता
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान डीजीपी के पिछले सर्कुलर का भी जिक्र किया। इसमें बलात्कार की पीड़िताओं के बयान दर्ज करते समय तो रिकॉर्डिंग अनिवार्य थी, लेकिन अन्य गवाहों के लिए इसे वैकल्पिक रखा गया था। हाईकोर्ट ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई जांच अधिकारी इस छूट का दुरुपयोग करते हैं ताकि वे यह छिपा सकें कि बयान उन्होंने खुद एफआईआर की कॉपी करके लिख दिया है।

निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों के लिए जारी किए 8 प्रमुख दिशा-निर्देश
अदालत ने कहा कि पुलिस का काम केवल आरोप लगाना नहीं, बल्कि सच्चाई सामने लाना होना चाहिए। निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिए:

  • तत्काल मौका-ए-वारदात: घटना की सूचना मिलते ही जांच अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और शिकायतकर्ता व गवाहों के बयान प्राथमिकता से रिकॉर्ड करे। रिकॉर्डिंग के लिए ई-साक्ष्य एप का इस्तेमाल किया जाए।
  • स्वतंत्र गवाहों की भूमिका: केवल पक्षकारों ही नहीं, बल्कि मौके पर मौजूद स्वतंत्र गवाहों के भी बयान दर्ज किए जाएं।
  • यौन अपराधों पर संवेदनशीलता: रेप व यौन अपराधों में पीड़िता का बयान उसके घर या सुविधाजनक स्थान पर महिला पुलिस अधिकारी द्वारा लिया जाए और 24 घंटे के भीतर मेडिकल कराया जाए।
  • तकनीकी व फोरेंसिक सबूत: अश्लील वीडियो या साइबर अपराध मामलों में मोबाइल जब्त कर FSL जांच कराई जाए और प्रासंगिक मामलों में कॉल डिटेल रिकॉर्ड व शिनाख्त परेड की कानूनी प्रक्रिया का कड़ाई से पालन हो।

न्यायिक प्रक्रिया और मुकदमों में मिलेगी बड़ी राहत
अदालत ने स्पष्ट किया कि गवाहों के बयान की डिजिटल रिकॉर्डिंग उपलब्ध होने से अदालतों को जमानत अर्जियों और ट्रायल के फैसले करने में बड़ी मदद मिलेगी। अक्सर दहेज उत्पीड़न, पॉक्सो और एससी/एसटी एक्ट जैसे मामलों में निर्दोषों को फर्जी फंसाने की प्रवृत्ति पर भी इस कदम से लगाम लगेगी और असली गुनहगारों को सजा दिलाई जा सकेगी।