
तीमारदारों के लिए क्या व्यवस्था है
देश के AIIMS और PGI अस्पतालों में हर साल इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनके साथ आने वाले तीमारदारों को बेहतर वेटिंग एरिया और शेल्टर देने के लिए सरकार के पास न तो कोई तय समयसीमा है और न ही अलग से बजट का ब्योरा है. हालांकि, लोकसभा में एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने बताया कि अभी फिलहाल देश के AIIMS और PGI संस्थानों में मरीजों और उनके परिजनों को वेटिंग रूम, रात्रि शेल्टर, पीने का साफ पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं दी जा रही हैं. सरकार के मुताबिक नए AIIMS में ओपीडी और आईपीडी मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इसलिए बढ़ते फुटफॉल के हिसाब से नाइट शेल्टर और वेटिंग एरिया का विस्तार एक सतत प्रक्रिया के तौर पर किया जा रहा है. मगर लोकसभा में दिए गए जवाब में सरकार ने किसी नए वेटिंग हॉल या नाइट शेल्टर के निर्माण की संख्या, इसके लिए तय बजट, किस AIIMS में कितनी कमी है और काम कब तक पूरा होगा, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई. यानी सरकार ने मरीजों की बढ़ती संख्या और सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत तो मानी, लेकिन कोई समयसीमा, बजट या विस्तृत एक्शन प्लान साझा नहीं किया.
सांसद डॉ. आनंद कुमार ने लोकसभा में सवाल उठाया था कि क्या सरकार ने दूर-दराज के इलाकों से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए उपलब्ध वेटिंग और शेल्टर सुविधाओं का आकलन किया है, और क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि कई मरीज और उनके परिजन इलाज या अपॉइंटमेंट का इंतजार करते हुए दिनों तक अस्पताल परिसर के बाहर रहने को मजबूर होते हैं, जहां उन्हें भीषण गर्मी, कड़ाके की ठंड और बारिश जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. जवाब में सरकार ने सीधे तौर पर इस समस्या को स्वीकार करते हुए कहा कि बड़ी वेटिंग रूम, रेस्ट एरिया, पीने का पानी, शौचालय जैसी सुविधाएं देने का प्रस्ताव लगातार बढ़ते मरीजों की जरूरत के आधार पर आगे बढ़ाया जाता है, लेकिन इसके लिए कोई ठोस एक्शन प्लान, समयसीमा या वित्तीय प्रावधान सामने नहीं रखा गया.

स्टाफ की भारी कमी बढ़ा रही मुश्किलें
तीमारदारों की सुविधाओं पर स्पष्टता की कमी के बीच एक और आंकड़ा सामने आया है, जो अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को उजागर करता है. संसद में दिए गए एक अलग जवाब के मुताबिक देश के सभी 20 कार्यरत AIIMS में फैकल्टी और नॉन-फैकल्टी मिलाकर कुल 17,340 पद खाली पड़े हैं, जिनमें 2,181 फैकल्टी और 15,159 नॉन-फैकल्टी पद शामिल हैं. सबसे ज्यादा 2,897 पद अकेले AIIMS दिल्ली में खाली हैं, जबकि AIIMS पटना में 1,191, रायपुर में 1,160, भुवनेश्वर में 1,144 और ऋषिकेश में 1,100 से ज्यादा पद रिक्त हैं. नॉन-फैकल्टी कैटेगरी में नर्सिंग, टेक्निकल और सपोर्ट स्टाफ के पद सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. सरकार ने इसकी वजह योग्य उम्मीदवारों की उपलब्धता, आरक्षण रोस्टर और संस्थान की भौगोलिक स्थिति जैसे कारणों को बताया है.
दिल्ली के बड़े अस्पतालों का भी यही हाल
सिर्फ AIIMS ही नहीं, दिल्ली के अन्य बड़े केंद्रीय अस्पतालों में भी स्टाफ की कमी की तस्वीर कुछ अलग नहीं है. सफदरजंग अस्पताल, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और नजफगढ़ के RHTC जैसे चार बड़े संस्थानों में डॉक्टर, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के कुल 1,523 पद खाली हैं. यह संख्या 2023-24 के 2,015 खाली पदों की तुलना में घटी जरूर है, लेकिन रोजाना 20 हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज करने वाले इन अस्पतालों के लिहाज से अब भी बड़ी है. अकेले सफदरजंग अस्पताल में हर दिन 10 हजार से ज्यादा ओपीडी मरीज पहुंचते हैं, जबकि यहां पैरामेडिकल स्टाफ के करीब 500 पद खाली हैं. लेडी हार्डिंग में रोजाना छह हजार से ज्यादा मरीज आते हैं, जबकि यहां डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के खाली पदों की संख्या पिछले तीन वर्षों में घटने के बजाय बढ़ी है.

भर्ती तेज करने के लिए सरकार के दावे
खाली पदों को भरने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाने का दावा किया है. सभी संस्थानों में स्टैंडिंग सेलेक्शन कमेटी बनाई गई है, नए AIIMS में 70 साल तक के रिटायर्ड फैकल्टी को कॉन्ट्रैक्ट पर रखने की सुविधा दी गई है और विजिटिंग फैकल्टी स्कीम के जरिए देश-विदेश के प्रोफेसरों को जोड़ा जा रहा है. नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती NORCET परीक्षा से, ग्रुप बी और सी कर्मचारियों की भर्ती कॉमन रिक्रूटमेंट एग्जाम से और रेजिडेंट डॉक्टरों की भर्ती INI-CET और INI-SS के जरिए की जा रही है. सरकार यह भी कहती है कि ओपीडी सेवाओं का विस्तार, ऑनलाइन अपॉइंटमेंट सिस्टम, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत डिजिटल हेल्थ सेवाएं और एक ही दिन में जांच जैसी सुविधाएं मरीजों को राहत देने के लिए शुरू की गई हैं.
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि सरकार ने संसद में यह तो स्वीकार किया है कि मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इसके साथ आने वाले तीमारदारों को बुनियादी सुविधाओं की सख्त जरूरत है, लेकिन इसके समाधान के लिए ठोस समयसीमा, बजट या विस्तृत कार्ययोजना नहीं दी गई. दूसरी तरफ 20 AIIMS में साढ़े सत्रह हजार से ज्यादा पद खाली होने और दिल्ली के प्रमुख केंद्रीय अस्पतालों में भी स्टाफ की कमी बने रहने से यह साफ है कि सुविधाओं के विस्तार का दावा जमीन पर उतरने में अभी वक्त लग सकता है. जब तक खाली पद भरे नहीं जाते और वेटिंग व शेल्टर सुविधाओं के लिए स्पष्ट रोडमैप सामने नहीं आता, तब तक दूर-दराज से इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को गर्मी, सर्दी और बारिश में भी अस्पताल परिसर के बाहर इंतजार करने की मजबूरी बनी रह सकती है.
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देवेश कुमार पांडेय
देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है. साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.
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