हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और आधुनिक बदलाव होने जा रहा है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBSE) अब विद्यार्थियों को स्कूली स्तर से ही भविष्य की तकनीकों से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत प्रदेश के स्कू
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इस अनूठी पहल के लिए शिक्षा बोर्ड वैश्विक तकनीकी दिग्गज कंपनी इंटेल (Intel) के साथ मिलकर काम कर रहा है। इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार हो गए हैं। इसमें सीखने के तरीके को आसान करने के साथ ही बौद्धिकता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
यह होगी विशेषता
- प्रैक्टिकल पर जोर: इस पाठ्यक्रम को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह पारंपरिक 'रटने' की प्रणाली पर आधारित न होकर पूरी तरह 'केस स्टडी' और व्यावहारिक समझ पर केंद्रित हो।
- खेल-खेल में सीख: इसके माध्यम से विद्यार्थी खेल-खेल में जटिल तकनीकों, डिजिटल दुनिया की बुनियादी जानकारियों और डेटा एनालिसिस (Data Analysis) को समझ सकेंगे।
रोजगार की बदलती जरूरतों के लिए तैयारी
शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने इस योजना के बारे में बताते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को भविष्य की वैश्विक चुनौतियों और रोजगार की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। एआई विषय के तहत विद्यार्थियों को न केवल तकनीकी ज्ञान मिलेगा, बल्कि उनकी डिजिटल साक्षरता भी मजबूत होगी।
बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने जानकारी दी कि इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए विशेषज्ञों के साथ एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जा चुकी है। कार्यशाला से मिले अहम सुझावों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे अंतिम मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा। सरकार की हरी झंडी मिलते ही इसे चरणबद्ध तरीके से लागू कर दिया जाएगा।
परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव: अब पूछे जाएंगे 'केस स्टडी' आधारित प्रश्न
केवल पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि बोर्ड अपनी परीक्षा प्रणाली को भी पूरी तरह अपग्रेड करने जा रहा है। आगामी परीक्षाओं में अब केस स्टडी आधारित प्रश्नों को शामिल किया जाएगा। इन प्रश्नों के जरिए विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता (Logical Ability), विश्लेषणात्मक सोच (Analytical Thinking) और समस्या समाधान कौशल (Problem Solving Skills) का मूल्यांकन किया जाएगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि केवल रटकर परीक्षा पास करने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी और छात्रों में विषय की वास्तविक समझ पैदा होगी।
ओपन स्कूल के छात्रों के लिए 'स्किल सर्टिफिकेशन कोर्स'
़ शिक्षा से वंचित रह गए या पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले युवाओं के लिए भी बोर्ड ने हाथ आगे बढ़ाए हैं। ओपन स्कूल के माध्यम से जल्द ही कई तरह के 'स्किल सर्टिफिकेशन कोर्स' (कौशल प्रमाणन पाठ्यक्रम) शुरू किए जाएंगे। ये कोर्स युवाओं के पारंपरिक और आधुनिक कौशल को एक प्रमाणित पहचान देंगे, जिससे उन्हें रोजगार और स्वरोजगार (Self-employment) के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।