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Agra News: अग्रवाल महासभा विवाद में नितेश अग्रवाल गुट को बड़ी राहत, सोसायटी रजिस्ट्रार ने चुनाव रद्द करने की मांग की खारिज - Up18 News

October 13, 2026

आगरा: ताजनगरी स्थित अग्रवाल महासभा की प्रबंध समिति को लेकर लंबे समय से चले आ रहे कानूनी व संगठनात्मक विवाद में वर्तमान अध्यक्ष नितेश अग्रवाल के नेतृत्व वाली समिति को बड़ी और निर्णायक राहत मिली है। फर्म, सोसायटी एवं चिट्स के रजिस्ट्रार ने वर्ष 2026-2028 के लिए संपन्न हुए निर्वाचन को रद्द करने और वर्तमान प्रबंध समिति को कालातीत (शून्य) घोषित करने की विरोधियों की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।

विभागीय स्तर पर की गई गहन जांच के बाद किसी भी तरह की समानांतर दावा पत्रावली उपलब्ध न होने के आधार पर शिकायतकर्ताओं के दावे को अमान्य कर दिया गया। इसके साथ ही संस्था के नवीनीकरण को हरी झंडी देते हुए वर्तमान प्रबंध समिति को ही अधिकृत रूप से कार्यभार संभालने का स्पष्ट आदेश जारी किया गया है।

अग्रवाल महासभा के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने इस विभागीय निर्णय की जानकारी साझा करते हुए कहा कि वर्तमान प्रबंध समिति संस्था के सभी कामकाज को सुचारू रूप से चलाने, पारदर्शिता लाने और संगठन को एकजुट व मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में संस्था के भीतर किसी भी तरह के मतभेद या विवाद से बचने, चुनाव प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और सदस्यों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने के उद्देश्य से जल्द ही संस्था के संविधान में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

43 लोगों ने निर्वाचन प्रक्रिया पर उठाए थे सवाल, नए सिरे से चुनाव की थी मांग

​गौरतलब है कि वर्ष 2026-2028 के कार्यकाल के लिए आयोजित अग्रवाल महासभा के चुनाव को लेकर कुल 43 लोगों के संयुक्त हस्ताक्षर से एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस शिकायत में चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दावा किया गया था कि चुनाव वैध व अद्यतन सदस्यता सूची के आधार पर आयोजित नहीं हुआ। शिकायतकर्ताओं ने संपन्न चुनाव को तुरंत निरस्त करने, वर्तमान कार्यकारिणी को अवैध ठहराने और नए सिरे से पारदर्शी चुनाव कराने की गुहार लगाई थी।

शिकायत करने वाले प्रमुख लोगों में विवेक गर्ग, आशीष गर्ग, अजय कुमार गर्ग, जगदीश प्रसाद गोयल और कुलवंत सिंह समेत अन्य सदस्य शामिल थे। इस पत्र में आशीष गर्ग को कार्यकारिणी सदस्य, अजय कुमार गर्ग को संगठन मंत्री और जगदीश प्रसाद गोयल को मंत्री पद का प्रत्याशी दर्शाया गया था। इन सभी ने चुनाव की वैधता को चुनौती देते हुए संबंधित विभाग से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की मांग की थी।

​विभाग ने मांगे थे साक्ष्य, समानांतर दावा न मिलने पर शिकायत खारिज

इस पूरे प्रकरण में 30 जून 2026 को सोसायटी निबंधक कार्यालय की ओर से शिकायतकर्ताओं को नोटिस जारी कर कथित अनियमितताओं से जुड़े पुख्ता साक्ष्य उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। इसके लिए 17 जुलाई 2026 तक की अंतिम तिथि तय की गई थी। हालांकि, निर्धारित समयावधि और विभागीय जांच प्रक्रिया के बाद शिकायतकर्ताओं की ओर से की गई मांग को स्वीकार नहीं किया गया।

​रजिस्ट्रार सोसायटी ने अपने अंतिम आदेश में आधार बनाते हुए स्पष्ट किया कि मामले में कोई दूसरा समानांतर दावा या पत्रावली प्रस्तुत नहीं की गई है, लिहाजा वर्तमान प्रबंध समिति को कालातीत घोषित करने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसके साथ ही विभाग ने संस्था के नवीनीकरण को पंजीकृत करते हुए नितेश अग्रवाल की टीम को ही कामकाज जारी रखने का अधिकार दे दिया। इस फैसले के बाद वर्तमान समिति के संचालन का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त हो गया है, यद्यपि विभागीय आदेश का दायरा उपलब्ध रजिस्टर्ड साक्ष्यों और तथ्यों तक ही सीमित है।

‘व्यक्तिगत मतभेदों और स्वार्थ के कारण संस्था का नुकसान नहीं होना चाहिए’

निर्णय के बाद अग्रवाल महासभा के अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि संस्था को बिना किसी बाधा के संचालित करना और पूरे समाज को एक मंच पर लाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने याद दिलाया कि अतीत में भी कुछ लोगों की वजह से संस्था को कालातीत घोषित होना पड़ा था। उनके मुताबिक, कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों और व्यक्तिगत रंजिश के चलते बार-बार निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर अनर्गल सवाल उठाते हैं, जिससे संगठन के सामाजिक और धार्मिक कार्यों पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ता है।

​नितेश अग्रवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि इन्हीं विरोधी तत्वों ने 9 अक्टूबर 2026 को थाना हरीपर्वत में एक प्रार्थना पत्र देकर 11 अक्टूबर को भव्य रूप से आयोजित होने वाले ‘अग्रसेन जयंती’ महोत्सव को रुकवाने की साजिश रची थी। उन्होंने इस कृत्य को समाज और संगठन के व्यापक हितों के पूरी तरह विपरीत बताया। उन्होंने अपील की कि संस्था के कार्यक्रमों को विवादों से परे रखा जाना चाहिए और यदि कोई शिकायत है तो उसका निस्तारण आपस में बैठकर या निर्धारित संवैधानिक प्रक्रियाओं के जरिए होना चाहिए।

संविधान संशोधन कर चुनाव प्रक्रिया को फुलप्रूफ बनाने की तैयारी

​रजिस्ट्रार कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद अध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने संस्था के मूल संविधान में दूरगामी सुधार करने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि संविधान के नियमों को और अधिक स्पष्ट, पारदर्शी व मजबूत बनाया जाएगा ताकि भविष्य में सदस्यता, जिम्मेदारी और चुनाव को लेकर कोई भ्रम या विवाद न पैदा हो सके। संस्था में ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी कि यदि किसी सदस्य को कोई शिकायत या आपत्ति हो, तो उसके निस्तारण का एक तय और स्पष्ट फोरम मौजूद रहे।

नितेश अग्रवाल ने आगे कहा कि संगठन को धरातल पर मजबूत बनाने के लिए उन सभी पुराने सदस्यों को पुनः बहाल करने का प्रयास किया जाएगा जो किसी वजह से निष्क्रिय हो गए थे। इसके साथ ही जल्द ही एक व्यापक सदस्यता अभियान चलाकर समाज के अधिक से अधिक लोगों को अग्रवाल महासभा से जोड़ा जाएगा, जिससे संस्था की सामाजिक सहभागिता और प्रभाव को बढ़ाया जा सके।

​वरिष्ठ सदस्यों ने जताया भरोसा, दीं शुभकामनाएं

​वर्तमान प्रबंध समिति को आधिकारिक मान्यता मिलने की खबर आते ही समाज के वरिष्ठ जनों और पूर्व पदाधिकारियों ने नितेश अग्रवाल और उनकी कार्यकारिणी को बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। बधाई देने वालों में पूर्व विधायक महेश गोयल, फूलचंद्र बंसल, एडवोकेट महेंद्र बंसल, जीवनराम मित्तल, अशोक अग्रवाल (अंबाह वाले), पूर्व अध्यक्ष कामता प्रसाद, रामरतन मित्तल, भगवान दास बंसल, मुरारीलाल अग्रवाल और सीताराम अग्रवाल समेत समाज के कई गणमान्य लोग शामिल हैं। नितेश अग्रवाल ने सभी वरिष्ठों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके अमूल्य मार्गदर्शन और सहयोग से वे समाज हित के कार्यों को नए आयाम तक पहुंचाएंगे।

​अब सिर्फ संगठन के विस्तार और मजबूती पर रहेगा ध्यान

सोसायटी रजिस्ट्रार के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अग्रवाल महासभा की प्रबंध समिति ने अपने सामाजिक व सांगठनिक कार्यक्रमों को गति देने का निर्णय लिया है। आने वाले दिनों में समिति की मुख्य प्राथमिकताओं में नियमावली में संवैधानिक संशोधन, निष्कासित या निष्क्रिय सदस्यों की ससम्मान वापसी, नया सदस्यता अभियान और बैठकों के जरिए सदस्यों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करना शामिल है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रस्तावित बदलावों और नए अभियानों के जरिए नितेश अग्रवाल की टीम संस्था के आंतरिक मतभेदों को समाप्त करने में कितनी सफल होती है, लेकिन फिलहाल कानूनी और प्रशासनिक रूप से नितेश अग्रवाल के हाथों में ही अग्रवाल महासभा की कमान बनी रहेगी।