Updated On: Jul 12, 2026 | 10:45 AM IST
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सार
Auto Companies Software Subscription: भारतीय कार खरीदार कनेक्टेड फीचर्स के लिए सब्सक्रिप्शन फीस देने से कतरा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि मुफ्त अवधि के बाद केवल 20% ग्राहक ही सेवा जारी रखते हैं।

सांकेतिक एआई फोटो
विस्तार
Auto Companies Software Subscription News In Hindi: भारत में कनेक्टेड कारों का इस्तेमाल और लोकप्रियता हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ी है। आज की नई कारों में इंटरनेट आधारित कई स्मार्ट फीचर्स मिलते हैं, जो ग्राहकों को आधुनिक अनुभव प्रदान करते हैं। इनमें मोबाइल ऐप के जरिए कार को दूर से ही लॉक या अनलॉक करना, रिमोटली एसी (AC) चालू करना और कार की लाइव लोकेशन देखना जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
हालांकि, ऑटो कंपनियों के लिए अब एक नई और बड़ी चुनौती सामने आ रही है। दरअसल, इन सेवाओं की मुफ्त (कॉम्प्लिमेंट्री) अवधि समाप्त होने के बाद अधिकांश ग्राहक इनके लिए भुगतान करने को तैयार नहीं हैं।
ऑटो कंपनियों के बिजनेस मॉडल को लगा झटका
मारुति सुजुकी, हुंडई और टाटा मोटर्स जैसी देश की प्रमुख वाहन कंपनियां अपनी कनेक्टेड कार सेवाएं शुरुआती एक से चार साल तक मुफ्त प्रदान करती हैं। कंपनियों की रणनीति यह थी कि इस मुफ्त अवधि के दौरान ग्राहकों को इन फीचर्स की आदत लग जाएगी और बाद में सब्सक्रिप्शन शुल्क लेकर सॉफ्टवेयर सेवाओं से नियमित कमाई की जाएगी।
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लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मुफ्त समय खत्म होते ही इन सेवाओं की मांग में भारी गिरावट देखी जा रही है, जिससे कंपनियों के नए डिजिटल बिजनेस मॉडल की सफलता पर सवालिया निशान लग गए हैं।
हुंडई के आंकड़े पेश कर रहे असली तस्वीर
हुंडई द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, भारत की सड़कों पर उसकी लाखों कनेक्टेड कारें दौड़ रही हैं। लेकिन चिंता की बात यह है कि जब मुफ्त सेवा अवधि समाप्त होती है, तो पांच में से केवल एक ग्राहक (20%) ही पैसे देकर सेवा जारी रखने का विकल्प चुनता है। हालांकि अन्य बड़ी कंपनियां अभी अपने वास्तविक आंकड़े साझा करने से बच रही हैं लेकिन ऑटो उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि ज्यादातर ब्रांड्स के लिए यह स्थिति एक जैसी ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
क्या है ग्राहकों की मानसिकता
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में लोग मोबाइल डेटा, इंटरनेट और विभिन्न OTT ऐप्स के लिए तो भुगतान करने के आदी हैं, लेकिन कार के स्मार्ट फीचर्स के लिए अतिरिक्त सब्सक्रिप्शन लेना उन्हें जरूरी नहीं लगता। समस्या केवल पैसे खर्च करने की नहीं, बल्कि इन फीचर्स की दैनिक जीवन में वास्तविक उपयोगिता की है।
ऑटो सेक्टर के जानकारों का मानना है कि अब सिर्फ ज्यादा फीचर्स देना काफी नहीं है कंपनियों को ऐसी डिजिटल सेवाएं विकसित करनी होंगी जो ग्राहकों की रोजमर्रा की जरूरत बन जाएं और जिनके बिना उनका काम अधूरा लगे। तभी ग्राहक हर साल या महीने इनकी फीस देने के लिए मानसिक रूप से तैयार होंगे।
EV सेगमेंट से जगी उम्मीद की किरण
भले ही वर्तमान में सॉफ्टवेयर सब्सक्रिप्शन की दर कम है, लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते बाजार ने कंपनियों के लिए नई उम्मीदें जगाई हैं। इलेक्ट्रिक सेगमेंट में बैटरी की सेहत की जानकारी, चार्जिंग स्टेशन की रियल-टाइम स्थिति और ट्रिप प्लानिंग जैसी सुविधाओं का उपयोग पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा हो रहा है।
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कंपनियां अब अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में लगातार नए और बेहतर फीचर्स जोड़ रही हैं ताकि ग्राहकों के अनुभव को उत्कृष्ट बनाया जा सके और उन्हें भविष्य में भुगतान वाली सेवाओं की ओर आकर्षित किया जा सके।
