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दुर्लभ समुद्री पक्षी को बचाने के लिए हटाए खरगोश, ऑस्ट्रेलिया में सफल हुआ संरक्षण अभियान; 800 से ज्यादा जोड़ों ने बनाया बसेरा

October 13, 2026

ऑस्ट्रेलिया में एक दुर्लभ समुद्री पक्षी गोल्ड्स पेट्रेल (Gould's petrel) को बचाने के लिए चलाया गया संरक्षण अभियान सफल रहा। इस अभियान में पक्षियों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचा रहे खरगोशों को द्वीप से हटाया गया। इसके बाद पक्षियों के प्रजनन स्थल को सुरक्षित बनाने और उनकी आबादी को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए। यह अभियान इस बात का उदाहरण बन गया कि किसी बाहरी प्रजाति को नियंत्रित करके लुप्तप्राय वन्यजीवों के आवास को किस तरह बचाया जा सकता है।यह अभियान न्यू साउथ वेल्स के तट के पास स्थित कैबेज ट्री आइलैंड पर चलाया गया था। यहां यूरोपीय खरगोशों की मौजूदगी से प्राकृतिक वनस्पति को नुकसान पहुंच रहा था। इसका असर उन परिस्थितियों पर भी पड़ रहा था, जिन पर गोल्ड्स पेट्रेल जैसे समुद्री पक्षी अपने प्रजनन और जीवन के लिए निर्भर करते हैं।

गोल्ड्स पेट्रेल के लिए क्यों खतरा बन गए थे खरगोश?

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में पोर्ट स्टीफंस के पास स्थित कैबेज ट्री आइलैंड गोल्ड्स पेट्रेल के लिए एक महत्वपूर्ण प्रजनन स्थल है। इस पक्षी को सुरक्षित रखने के लिए द्वीप पर मौजूद प्राकृतिक वनस्पति का बचा रहना बेहद जरूरी था।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 1906 में यूरोपीय खरगोशों को द्वीप पर लाया गया था। इसके बाद वे वहां उगने वाले पौधों और नए पौधों को खाने लगे। खरगोशों के लगातार पौधे खाने से वनस्पति को दोबारा पनपने में मुश्किल होने लगी और द्वीप के प्राकृतिक पर्यावरण पर दबाव बढ़ गया।

कैबेज ट्री पाम सहित कई पौधे इस पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा थे। जब खरगोश छोटे पौधों को बड़ा होने से पहले ही खा जाते थे, तो प्राकृतिक वनस्पति के पुनर्जीवन की प्रक्रिया बाधित होती थी। इससे पक्षियों के आवास की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया।

गोल्ड्स पेट्रेल पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा था। ऐसे में खरगोशों के कारण आवास को होने वाला नुकसान उसके संरक्षण के लिए एक अतिरिक्त समस्या बन गया।

1997 में चलाया गया खरगोशों को हटाने का अभियान

खरगोशों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए संरक्षणवादियों ने वर्ष 1997 में कैबेज ट्री आइलैंड से उन्हें हटाने का अभियान चलाया। इसका उद्देश्य द्वीप की वनस्पति को दोबारा विकसित होने का मौका देना और गोल्ड्स पेट्रेल के प्रजनन स्थल को सुरक्षित बनाना था।

अभियान के दौरान खरगोशों की आबादी को खत्म करने के लिए कई उपाय अपनाए गए। इनमें हवाई तरीके से चारा डालना भी शामिल था। रिपोर्ट के अनुसार, इस चारे में ब्रोडिफाकौम नामक एंटीकोआगुलेंट जहर का इस्तेमाल किया गया था, जो रक्त के सामान्य रूप से जमने की प्रक्रिया को बाधित करता है।

बताया गया कि चारा डालने के अभियान के 13 दिनों के भीतर बचे हुए खरगोश भी खत्म हो गए। इसके बाद अगले छह महीनों तक निगरानी की गई और इस दौरान कोई जीवित खरगोश नहीं मिला।

यह अभियान द्वीप के पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। हालांकि, पक्षियों की आबादी में सुधार के लिए खरगोशों को हटाने के साथ-साथ अन्य संरक्षण उपाय भी जरूरी थे।

खरगोशों को हटाने के बाद गोल्ड्स पेट्रेल के संरक्षण के लिए आवास को बहाल करने और प्रजनन स्थलों को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया गया। न्यू साउथ वेल्स नेशनल पार्क्स एंड वाइल्डलाइफ सर्विस के अनुसार, पास के बूनडेलबाह आइलैंड पर भी इस पक्षी की एक अन्य प्रजनन कॉलोनी विकसित करने के प्रयास किए गए।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2000 तक बूनडेलबाह आइलैंड पर 800 से अधिक प्रजनन करने वाले जोड़े मौजूद थे। इनसे हर साल 400 से अधिक बच्चे पैदा होने का आंकड़ा सामने आया।

यह बदलाव संरक्षण कार्यक्रम के लिए उत्साहजनक था। इससे पता चला कि प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाने वाली प्रजातियों को हटाने और प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने से दुर्लभ पक्षियों के संरक्षण में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि पक्षियों की संख्या में सुधार केवल खरगोशों को हटाने का परिणाम नहीं था। आवास बहाली और प्रजनन कॉलोनी को विकसित करने जैसे कदम भी इस प्रक्रिया का हिस्सा थे।

वन्यजीव संरक्षण के लिए क्या है इस अभियान का सबक?

कैबेज ट्री आइलैंड का यह अभियान वन्यजीव संरक्षण के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को सामने लाता है। किसी दुर्लभ प्रजाति को बचाने के लिए केवल उस जीव की सुरक्षा करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाने वाले कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

इस मामले में खरगोशों के कारण वनस्पति को नुकसान हो रहा था। उन्हें हटाने से पौधों को दोबारा उगने का अवसर मिला और पक्षियों के आवास को बहाल करने की कोशिशों को मजबूती मिली। इसके साथ ही दूसरी प्रजनन कॉलोनी विकसित करने से संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिली।

दुनिया के कई द्वीपों पर बाहरी प्रजातियां स्थानीय वन्यजीवों और वनस्पति के लिए खतरा बन सकती हैं। ऐसे में वैज्ञानिक निगरानी, आवास बहाली और लंबे समय तक संरक्षण योजनाएं चलाना महत्वपूर्ण होता है।

दुर्लभ प्रजातियों को बचाने की दिशा में अहम उदाहरण

ऑस्ट्रेलिया का यह अभियान दिखाता है कि सही योजना और लगातार निगरानी के जरिए नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की दिशा में प्रगति की जा सकती है। गोल्ड्स पेट्रेल के लिए खरगोशों को हटाना केवल एक प्रजाति को नियंत्रित करने की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि उसके प्राकृतिक आवास और प्रजनन स्थलों को सुरक्षित बनाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा था।

यह सफलता वन्यजीव संरक्षण के लिए एक अहम संदेश देती है—यदि किसी प्रजाति के सामने मौजूद मूल खतरे की पहचान कर उसके आवास को बहाल किया जाए, तो उसके भविष्य को बेहतर बनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।