Kazakhstan Military Exercise: सितंबर 2026 में कजाकिस्तान मध्य एशिया का इस साल का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास कर रहा है. रणनीतिक कमांड-एंड-स्टाफ अभ्यास 'बैटिल तोइतारिस 2026' में करीब 7,000 सैनिक और लगभग 2,000 हथियार व सैन्य उपकरण शामिल हैं.
इस अभ्यास की खास बात इसका बड़ा पैमाना ही नहीं, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल भी है. कजाकिस्तान यह परख रहा है कि उसकी थल सेना, वायुसेना, नौसेना, सैन्य कमांड और क्षेत्रीय बल एक साथ मिलकर कितनी प्रभावी तरीके से काम कर सकते हैं. अभ्यास में बिना पायलट वाले विमान यानी UAV और FPV ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, कई स्तरों वाली एयर डिफेंस, डिजिटल कमांड सेंटर, रोबोटिक सिस्टम और निगरानी जैसी तकनीकों को शामिल किया गया है. इसके अलावा सैनिकों की तेजी से तैनाती और अलग-अलग सैन्य इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल पर भी जोर दिया जा रहा है.
सैन्य तैयारियों को परख रहा कजाकिस्तान
इस अभ्यास के जरिए कजाकिस्तान आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के हिसाब से अपनी सैन्य तैयारियों को परख रहा है. इसमें जमीन, हवा और समुद्र से जुड़े सैन्य अभियानों के साथ नई तकनीकों को एक साथ इस्तेमाल करने की क्षमता का परीक्षण किया जा रहा है. 'बैटिल तोइतारिस 2026' को कजाकिस्तान की सैन्य तैयारियों और आधुनिक तकनीक को अपनाने की दिशा में एक अहम अभ्यास के तौर पर देखा जा रहा है. यह अभ्यास यह भी दिखाता है कि मध्य एशिया में सैन्य संगठन आधुनिक युद्ध तकनीक और डिजिटल सिस्टम पर कितना ध्यान दे रहे हैं.
कई हिस्से, एक रणनीतिक सोच
'बैटिल तोइतारीस' (Batyl Toitarys) की मुख्य खासियत यह है कि इसमें कई तरह की सेनाएं और गतिविधियां एक साथ शामिल होती हैं. हवाई हिस्से में एयर डिफेंस फोर्सेज की 'अश्याक अस्पन 2026' (Ashyk Aspan 2026) एक्सरसाइज शामिल है; जमीनी हिस्से में 'आइबाल्टा 2026' (Aibalta 2026); और समुद्री हिस्से में 'खज़ार' (KHAZAR) एक्सरसाइज. 'बेकेट 2026' (Beket 2026) में क्षेत्रीय और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल का पहलू शामिल है.
इन राष्ट्रीय युद्धाभ्यासों के साथ एक अलग अंतरराष्ट्रीय हिस्सा भी जुड़ा है: 'फ्रंटियर 2026' (Frontier 2026), जो कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइज़ेशन (CSTO) के सेंट्रल एशियन रीजन (CRDF CAR) की 'कलेक्टिव रैपिड डिप्लॉयमेंट फोर्सेज' की एक एक्सरसाइज है. 'फ्रंटियर' को 'बैटिल तोइतारीस' के साथ एक ही सोच के तहत आयोजित किया गया था। इसमें लगभग 1,500 जवान, 300 से ज़्यादा सैन्य और खास उपकरण, और 115 UAV शामिल थे. इसलिए कजाकिस्तान सिर्फ एक टैंक ब्रिगेड, एविएशन यूनिट या एयर-डिफ़ेंस सिस्टम का ही टेस्ट नहीं कर रहा है. वह यह भी देख रहा है कि क्या उसकी सेना के अलग-अलग हिस्से एक साथ मिलकर काम कर सकते हैं या नहीं.
यह काबिलियत आधुनिक सेना की क्षमता को मापने का एक मुख्य पैमाना बनती जा रही है. अब सिर्फ काबिल एयरक्राफ्ट, टैंक या ज़मीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम का होना ही काफी नहीं है. इंटेलिजेंस, मज़बूत कम्युनिकेशन और कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के जरिए उन्हें आपस में जुड़ा होना चाहिए, ताकि टारगेट के बारे में जानकारी को जल्द से जल्द फैसले और फिर कार्रवाई में बदला जा सके.
हवा से होने वाले नए तरह के खतरों के खिलाफ एयर डिफेंस
एयर डिफेंस का पहलू खास तौर पर सीखने लायक है. सरीशागन में, बड़े पैमाने पर हवाई हमलों को रोकने की तैयारी को परखने के लिए 'बैटिल तोइतारिस' (Batyl Toitarys) के तहत 'अशिक अस्पन 2026' (Ashyk Aspan 2026) अभ्यास किया गया। इसमें एयर फ़ोर्स यूनिट्स, एयर-डिफेंस फॉर्मेशन्स और EW (इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर) यूनिट्स ने मिलकर काम किया. यह पारंपरिक एयर-डिफेंस स्थितियों से काफी अलग है. आज, हवाई खतरों में एक साथ एयरक्राफ्ट, मिसाइलें, टोही प्लेटफॉर्म, स्ट्राइक UAV और सस्ते FPV सिस्टम शामिल हो सकते हैं. ऐसे मिले-जुले खतरों का मुकाबला किसी एक हथियार सिस्टम से करना लगभग नामुमकिन है. इस अभ्यास में कई स्तरों वाली एयर डिफेंस, एयर-डिफेंस एम्बुश (घात लगाकर हमला), ऑफ़-बोर्ड टारगेट डेज़िग्नेशन (लक्ष्य की पहचान), तेजी से जगह बदलना और अलग-अलग तरह के UAV के खिलाफ जवाबी उपाय शामिल थे.
रडार और EW सिस्टम को एक साझा इंटेलिजेंस और सर्विलांस पिक्चर (निगरानी की जानकारी) में जोड़ा गया था. यह एक अहम बात है। कज़ाकिस्तान एयर डिफेंस का परीक्षण अलग-अलग बैटरी के समूह के तौर पर नहीं, बल्कि 'सिस्टम ऑफ़ सिस्टम्स' (कई सिस्टम के एक साथ काम करने वाले सिस्टम) के तौर पर कर रहा है, जिसमें लक्ष्य का पता लगाना, उसकी पहचान करना, इलेक्ट्रॉनिक असर डालना और हमला करना - ये सब एक ही कड़ी का हिस्सा होने चाहिए.
FPV ड्रोन युद्ध का आम हिस्सा बनते जा रहे हैं
कुछ साल पहले तक, FPV ड्रोन को एक खास तरह की टेक्नोलॉजी माना जाता था. अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं. सस्ते ड्रोन टोही और हमले के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले हथियार बन गए हैं. इससे सेनाओं को यूनिट की रणनीति, जमीनी किलेबंदी, छिपने के तरीकों और एयर डिफेंस के बारे में एक साथ नए सिरे से सोचने पर मजबूर होना पड़ा है.
दूसरी तरफ, नकली दुश्मन द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे ही सिस्टम के खिलाफ कई स्तरों वाली सुरक्षा है: जैसे EW (इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर), एयर डिफेंस, छिपने की तकनीक, फील्ड इंजीनियरिंग और पैंतरेबाजी. यह आज के दौर की लड़ाइयों की एक अहम खासियत है, और कजाकिस्तान साफ तौर पर इन सीखों को अपनी कॉम्बैट ट्रेनिंग में शामिल करने की कोशिश कर रहा है.
ड्रोन से लेकर जमीनी रोबोट तक
इसमें एक कम साफ़ दिखने वाला तकनीकी पहलू भी है. कजाकिस्तान की सेना धीरे-धीरे बिना इंसानी मदद के चलने वाले जमीनी सिस्टम की क्षमता को परखने लगी है. इस काम से पहले 'शायकस' (Shaiqas) नाम की मिलिट्री-इंजीनियरिंग प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें हवाई और जमीनी सिस्टम की जांच की गई थी। इसके बाद, सबसे अच्छे डिजाइनों को सैनिकों के साथ मिलकर प्रैक्टिकल ट्रायल का मौका मिला.
इस तरीके पर ध्यान देना जरूरी है
मिलिट्री रोबोटिक्स किसी प्रदर्शनी में तो प्रभावशाली लग सकते हैं, लेकिन युद्ध के मैदान की जरूरतें बिल्कुल अलग होती हैं: जैसे भरोसेमंद होना, मुश्किल रास्तों पर चलने की क्षमता, मज़बूत कम्युनिकेशन सिस्टम, आसानी से मरम्मत और चलाने में आसान होना. इसलिए, किसी एक्सपेरिमेंटल सिस्टम को सीधे डेमो हॉल से निकालकर बड़े मिलिट्री अभ्यास में ले जाने से उसकी असल उपयोगिता काफी जल्दी पता चल सकती है. यहां तक कि साधारण रोबोटिक प्लेटफ़ॉर्म भी आगे चलकर ऐसे काम कर सकते हैं जिनमें लोगों के लिए ज्यादा जोखिम होता है, जैसे खतरनाक इलाकों की टोह लेना, गोला-बारूद पहुंचाना या घायलों को सुरक्षित बाहर निकालना.
एक नए बख्तरबंद वाहन से ज्यादा जरूरी एक डिजिटल हेडक्वार्टर हो सकता है. मेरी नजर में, 'बैटिल टॉयटारिस' (Batyl Toitarys) की सबसे दिलचस्प विशेषताओं में से एक है डिजिटल हेडक्वार्टर कॉन्सेप्ट का ट्रायल. मैटिबुलक में तैयारियों के दौरान, सीनियर जनरल स्टाफ अधिकारियों और डिजिटलाइजेशन के लिए जिम्मेदार रक्षा अधिकारियों ने अलग-अलग इसके कामकाज और सपोर्टिंग इन्फॉर्मेशन और कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच की.
मैदानों से कैस्पियन सागर तक
इलाके की विविधता इसमें शामिल फ़ोर्स की विविधता से मेल खाती है. हवाई पहलू को 'अश्याक अस्पन' (Ashyk Aspan), जमीनी पहलू को 'आइबाल्टा' (Aibalta), नौसैनिक पहलू को 'खजार' (KHAZAR) और क्षेत्रीय व अंतर-एजेंसी पहलू को 'बेकेट' (Beket) के जरिए दिखाया जाता है. कैस्पियन सागर में, नौसैनिक फोर्स को जमीनी ट्रेनिंग रेंज वाली यूनिट्स से बिल्कुल अलग काम करने पड़ते हैं.
सैन्य शक्ति के क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कजाकिस्तान
मध्य एशिया में अपनी सैन्य क्षमताओं का साफ़ तौर पर आधुनिकीकरण हो रहा है. इस क्षेत्र के देश नए विमान और बिना पायलट वाले सिस्टम (unmanned systems) हासिल कर रहे हैं, घरेलू रक्षा उद्योग विकसित कर रहे हैं, हवाई सुरक्षा को बेहतर बना रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग बढ़ा रहे हैं. इस पृष्ठभूमि में, 'बैटिल तोइतारीस 2026' (Batyl Toitarys 2026) का दायरा और महत्व कजाकिस्तान को मध्य एशिया में सैन्य शक्ति और सुरक्षा समन्वय के प्रमुख केंद्रों में से एक के रूप में देखने का आधार बनता है.
यह सिर्फ 7,000 जवानों और 2,000 उपकरणों की बात नहीं है.