
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की आगामी अक्टूबर बैठक से ठीक पहले पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने के लिए एक नया पैंतरा चला है। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने आतंकियों की अपनी नई 'रेड बुक' जारी करते हुए जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के प्रमुख और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी मसूद अजहर पर इनाम की राशि 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी है।
भारतीय संसद (2001), पठानकोट एयरबेस (2016) और पुलवामा (2019) जैसे भीषण आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता मसूद अजहर को FIA ने एक बार फिर आधिकारिक रूप से 'भगोड़ा' घोषित किया है। इससे पहले 2021 में भी FIA ने उस पर 50 लाख का इनाम रखा था, जिसके बाद पाकिस्तान ने दावा किया था कि मसूद अजहर उसके देश में मौजूद नहीं है और अफगानिस्तान भाग गया है।
कंधार विमान अपहरण के बदले मिली थी रिहाइ
मसूद अजहर पहली बार जनवरी 1994 में फर्जी पहचान पत्र के साथ बांग्लादेश के रास्ते भारत आया था, जहां उसे श्रीनगर और अनंतनाग में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था।
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24 दिसंबर 1999: इंडियन एयरलाइंस के विमान (IC-814) को काठमांडू से टेकऑफ के बाद अगवा कर लिया गया।
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कंधार ड्रामा: अपहृत विमान को लाहौर और दुबई होते हुए अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया।
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बंधकों के बदले रिहाई: आतंकियों ने यात्रियों और क्रू की सुरक्षा के बदले मसूद अजहर, अहमद उमर सईद शेख और मुश्ताक अहमद जरगर की रिहाई की मांग की। 31 दिसंबर 1999 को भारत ने उन्हें रिहा किया।
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जैश की स्थापना: रिहाई के तुरंत बाद अजहर ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन 'जैश-ए-मोहम्मद' की नींव रखी।
ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था मसूद का परिवार
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को पाकिस्तान में आतंकवादियों के ठिकानों पर 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया था। बहावलपुर में हुए इस हमले में मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्यों समेत 14 लोग मारे गए थे।
मारे गए लोगों में उसकी बड़ी बहन, बहनोई, भतीजा, भतीजी और उसके बच्चे शामिल थे। हालांकि, उस समय मसूद अजहर मौके पर मौजूद नहीं था, जिससे उसकी जान बच गई थी। बीबीसी उर्दू के अनुसार, इस हमले के बाद अजहर ने एक बयान जारी कर कहा था, "काश! मैं भी इस हमले में मर जाता, तो खुद को खुशनसीब समझता।"
FATF की बैठक और पाकिस्तान की मजबूरी
पाकिस्तान पहले भी लंबे समय तक FATF की 'ग्रे लिस्ट' में रह चुका है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा था। अक्टूबर 2022 में वह बड़ी मुश्किल से इस सूची से बाहर आया था।
आगामी FATF समीक्षा बैठक से पहले मसूद अजहर जैसे वैश्विक आतंकी पर कागजी कार्रवाई और इनाम बढ़ाना पाकिस्तान की पुरानी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए वह दुनिया के सामने यह साबित करने की कोशिश कर रहा है कि वह टेरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कड़े कदम उठा रहा है।