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मंदिर बंद करने से लेकर भोजन न खाने तक...सूर्य ग्रहण की 7 मान्यताओं पर क्या कहता है साइंस?

August 11, 2026

surya grahan myths facts science: सूर्य ग्रहण वैसे तो खगोलीय घटना है लेकिन भारत में इसे धर्म और ज्योतिष से जोड़कर देखा जाता है। इससे जुड़ी कईं मान्यताएं भी हैं, जो प्राचीन समय से चली आ रही हैं।

Solar Eclipse Myths: सूर्य ग्रहण को लेकर भारत में सदियों से कई धार्मिक और सामाजिक मान्यताएं चली आ रही हैं। इनमें ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर न निकलने, खाना-पानी न खाने, भोजन में तुलसी रखने, मंदिर के कपाट बंद रखने और ग्रहण के बाद स्नान करने जैसी बातें शामिल हैं। इन मान्यताओं का संबंध धार्मिक परंपराओं से है। लेकिन जब इन्हीं बातों को साइंस की कसौटी पर परखा जाता है, तो तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है। सूर्य ग्रहण अपने आप में कोई जहरीली या खतरनाक घटना नहीं है। असली खतरा सूर्य को नंगी आंखों से देखना है। सूर्य ग्रहण को सुरक्षा के साथ देखना होता है। आइए जानते हैं सूर्य ग्रहण से जुड़ी 7 सबसे फेमस मान्यता और इस पर क्या कहता है हमारा साइंस।

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मान्यता क्या है: ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।

मान्यता क्या है: ग्रहण के दौरान खाना नहीं खाना चाहिए।

साइंस का पक्ष क्या हैः परपंराओं में सूतक और ग्रहण के दौरान भोजन करने से बचना चाहिए, लेकिन साइंस कहता है- ग्रहण के समय खाना खाने से भोजन जहरीला नहीं हो जाता और न ही शरीर पर कोई गलत इंपैक्ट पड़ता है।

मान्यता क्या है: ग्रहण के दौरान पानी में तुलसी या कुश रखना जरूरी है।

साइंस का पक्ष क्या हैः ग्रहण से पहले भोजन और पानी में तुलसी की पत्ती या कुश रखने की परंपरा कई परिवारों में है। लेकिन तुलसी में कुछ एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीज (Antimicrobial properties) मतलब बैक्टीरिया-वायरस जैसे फंगस को मारने वाले गुण होते हैं। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि ग्रहण के दौरान भोजन या पानी में तुलसी डालने से ग्रहण के कारण पैदा हुई कोई खास नुकसानदायक चीज खत्म हो जाती है। ग्रहण के दौरान भोजन या पानी अचानक जहरीला हो जाता है, साइंस में इसका कोई प्रूफ नहीं है।

मान्यता क्या है: ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर देने चाहिए।

साइंस क्या कहता हैः भारत के कई मंदिरों में ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ रोकने या मंदिर के कपाट बंद रखने की परंपरा है। ग्रहण खत्म होने के बाद मंदिर की सफाई और पूजा दोबारा शुरू की जाती है। साइंस में मंदिर बंद करने से किसी प्रकार के नुकसान का कोई प्रमाण नहीं है। यह मुख्य रूप से धार्मिक परंपरा और मंदिर की पूजा-पद्धति से जुड़ा विषय है।

मान्यता क्या हैः ग्रहण खत्म होते ही स्नान करने से सबकुछ शुद्ध हो जाता है।

साइंस क्या कहता हैः ग्रहण के बाद स्नान करना हिंदू परंपरा में लंबे समय से चला आ रहा है। इसे शरीर और वातावरण शुद्ध हो जाता है। लेकिन साइंस कहता है- ग्रहण के बाद नहाना हेल्थ के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन ग्रहण के कारण शरीर पर जमा किसी विशेष 'निगेटिव एनर्जी' या विषैले पदार्थ को हटाने के लिए स्नान जरूरी है, साइंस में इसका कोई प्रूफ नहीं है।

मान्यता क्या है: ग्रहण में बाहर निकलना या रेगुलर काम करना अशुभ है।

साइंस क्या कहता हैः पुराने समय में ग्रहण अचानक होने वाली असामान्य खगोलीय घटना था। लोगों के पास इसके पीछे की वैज्ञानिक वजह समझने के साधन नहीं थे। इसलिए इसे डर, अशुभ संकेत या धार्मिक घटना से जोड़ा गया। लेकिन साइंस के मुताबिक - ग्रहण पहले से फिक्स एक खगोलीय घटना है। इसमें चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है और कुछ क्षेत्रों से देखने पर सूर्य का प्रकाश आंशिक या पूरी तरह ढक जाता है। इसलिए ग्रहण के दौरान सामान्य काम करना अपने आप में नुकसानदायक नहीं है।

मान्यता क्या है: सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखना खतरनाक नहीं है।

साइंस क्या कहता हैः सूर्य को बिना किसी उचित सुरक्षा के सीधे देखने से आंखों की रेटिना को नुकसान हो सकता है। खासकर आंशिक सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य को सीधे देखना खतरनाक है, क्योंकि कम चमक के बावजूद सूर्य की रोशनी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए सामान्य sunglasses, कैमरा फिल्टर या घर में बने साधारण कांच को solar protection का ऑप्शन नहीं माना जाना चाहिए। ग्रहण देखने के लिए ISO 12312-2 compliant eclipse glasses या उचित solar viewing filter का यूज करना चाहिए।

...तो फिर ये मान्यताएं शुरू कैसे हुईं?

इसका जवाब सिर्फ 'अंधविश्वास' है, यह नहीं कहा जा सकता है। पहले के समय में सूर्य ग्रहण एक दुर्लभ और असामान्य घटना थी। अचानक दिन के समय अंधेरा होना लोगों के लिए स्वाभाविक रूप से रहस्यमय अनुभव रहा होगा। इसके अलावा पुराने समय में भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के आधुनिक साधन नहीं थे। ग्रहण के दौरान कुछ घंटों तक भोजन खुले में पड़ा रहना और फिर उसके खराब होने की संभावना ज्यादा रहती थी।

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