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अमेरिकी सैनिक को गोली मारकर मौत की सजा दी जाएगी: 65 साल में पहला ऐसा मामला; धार्मिक नारा लगाकर 13 लोगों को मार दिया था

October 6, 2026

टेक्सास3 घंटे पहले

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निदाल हसन पर 13 लोगों की हत्या करने और 31 लोगों को घायल करने का आरोप है। - Dainik Bhaskar

निदाल हसन पर 13 लोगों की हत्या करने और 31 लोगों को घायल करने का आरोप है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पूर्व अमेरिकी सैनिक निदाल हसन को गोली मारकर मौत की सजा देने का आदेश दिया है। पेंटागन ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।

अगर हसन की सजा लागू होती है तो वह 1961 के बाद अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था के तहत मौत की सजा पाने वाला पहला व्यक्ति होगा। सैन्य व्यवस्था में आखिरी बार प्राइवेट जॉन ए. बेनेट को मौत की सजा दी गई थी।

हसन ने 2009 में टेक्सास के सैन्य अड्डे पर धार्मिक नारा लगाते हुए गोलीबारी की थी, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई थी।

टेक्सास के फोर्ट हुड पर हसन के हमले के बाद अमेरिकी सैनिक अपने साथी को स्ट्रेचर पर ले जाते हुए। तस्वीर 2009 की है।

टेक्सास के फोर्ट हुड पर हसन के हमले के बाद अमेरिकी सैनिक अपने साथी को स्ट्रेचर पर ले जाते हुए। तस्वीर 2009 की है।

हमले के बाद माना- जिहाद के लिए किया

5 नवंबर 2009 को सेना के मनोचिकित्सक मेजर निदाल हसन निजी पिस्तौल लेकर फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पहुंचा और सैनिकों व अन्य लोगों पर अचानक गोलीबारी कर दी। यह अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुई सबसे घातक सामूहिक गोलीबारी थी।

उस समय अमेरिका अफगानिस्तान और इराक में युद्ध लड़ रहा था। हसन ने बाद में कहा कि वह इन युद्धों को गैरकानूनी और अनैतिक मानता था और जिहाद के लिए हमला किया था।

गोलीबारी में हसन भी घायल हुआ और कमर के नीचे से लकवाग्रस्त हो गया। सैन्य अदालत में उसने हत्याओं की बात स्वीकार की। 2013 में उसे पहले से हत्या की योजना बनाने और हत्या की कोशिश के कुल 45 मामलों में दोषी ठहराया गया।

हसन ने हमले पर कोई पछतावा नहीं जताया। सैन्य मानसिक स्वास्थ्य पैनल के सामने उसने कहा कि वह चाहता था कि हमले में उसकी भी मौत हो जाती, ताकि वह शहीद बन सके। उसका यह तक कहा कि मौत की सजा मिलने पर भी वह खुद को शहीद मानेगा।

दोषी निदाल हसन 2010 में कोर्ट हियरिंग के दौरान।

दोषी निदाल हसन 2010 में कोर्ट हियरिंग के दौरान।

हमले से पहले कट्टर हुए थे धार्मिक विचार

मेजर हसन का जन्म वर्जीनिया के अर्लिंगटन में फिलिस्तीनी मूल के मुस्लिम माता-पिता के घर हुआ था। उसने वर्जीनिया टेक में पढ़ाई की और 1997 में सैन्य मेडिकल स्कूल की ट्रेनिंग शुरू की।

हमले से पहले के कुछ सालों में इस्लाम को लेकर उसके विचार कट्टर होते गए थे। पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने अपने बयान में हसन के जिहादी मकसद का जिक्र करते हुए उसे आतंकवादी बताया।

हालांकि, हसन पर आतंकवाद से जुड़ी धाराओं में मुकदमा नहीं चलाया गया था।

राष्ट्रपति बुश ने भी सैन्य कैदी की मौत की सजा मंजूर की थी

राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने 2008 में प्राइवेट रोनाल्ड ए. ग्रे की मौत की सजा मंजूर की थी। ग्रे को 1980 के दशक में बलात्कार और हत्याओं की एक सीरीज में दोषी ठहराया गया था।

लेकिन एक जज ने उसकी मौत की सजा पर रोक लगा दी थी। जज ने कहा था कि ग्रे को संघीय अदालत में अपील करने के लिए और समय मिलना चाहिए। 2026 तक ग्रे सैन्य डेथ रो में ही है।

अमेरिकी सैन्य डेथ रो में फिलहाल चार कैदी मौत की सजा का इंतजार कर रहे हैं। सैन्य व्यवस्था में किसी कैदी को तब तक मौत की सजा नहीं दी जा सकती, जब तक राष्ट्रपति खुद उस सजा की पुष्टि न करें।

हसन के मामले में ट्रम्प की मंजूरी के बाद अब सेना के सचिव को सजा की तारीख और जगह तय करनी है। इसके बाद भी कानूनी अपील के कारण सजा पर रोक लग सकती है।

गोली मारकर अब तक सिर्फ 6 को मौत की सजा

अमेरिका में मौत की सजा देने का सबसे आम तरीका इंजेक्शन है। 1976 में मौत की सजा दोबारा शुरू होने के बाद से अब तक 1488 लोगों को इंजेक्शन के जरिए मौत दी जा चुकी है।

इसके मुकाबले गोली मारकर सिर्फ 6 लोगों को मौत की सजा दी गई है। यानी यह तरीका अमेरिका में बेहद रेयर है।

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