गुरुग्राम पुलिस ने 6 दिन दबाए रखा हत्या का सच: युवराज मर्डर केस SC पहुंचा तो सामने आईं 3 बड़ी मिस्टेक; डॉक्टर-आईओ पर भरोसा कर नपे SHO - gurugram News
October 8, 2026
गुरुग्राम पुलिस ने 6 दिन दबाए रखा हत्या का सच:युवराज मर्डर केस SC पहुंचा तो सामने आईं 3 बड़ी मिस्टेक; डॉक्टर-आईओ पर भरोसा कर नपे SHO
गुरुग्राम32 मिनट पहले
कॉपी लिंक
गुरुग्राम पुलिस को युवराज मनचंदा का शव 10 सितंबर को बादशाहपुर के पास एक नाले से मिला था। इनसेट में मृतक और हत्यारोपी आन्या और संयम की फोटो।
हरियाणा के गुरुग्राम के 31 वर्षीय रियल एस्टेट मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड में पुलिस, डॉक्टरों और फॉरेंसिक टीम की एक के बाद एक चौंकाने वाली लापरवाहियां उजागर हुई हैं। हत्या के इस मामले को दबाने और नाले में मिले शव को सामान्य हादसा मानकर पल्ला झाड़ने की कोशिश का मामला जब मृतक की बहन हरसिमरन मनचंदा सुप्रीम कोर्ट लेकर पहुंचीं, तो पूरे सिस्टम में हड़कंप मच गया। सुनवाई करते हुए कोर्ट ने माना-
अगर दिल्ली पुलिस इस मामले को नहीं खोलती, तो डॉक्टर की गलत रिपोर्ट के आधार पर इस मर्डर केस की फाइल हमेशा के लिए बंद हो चुकी थी।
इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने बादशाहपुर थाने के एसएचओ राजेश को तुरंत निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही गलत पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट देने वाले मेडिकल अफसर डॉ. मानव चौहान के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो गई है। वहीं, फॉरेंसिक टीम की डॉ. रिचा शर्मा, उनके टीम मेंबर और पुलिस कंट्रोल रूम की एक महिला एसआई के खिलाफ भी विभागीय जांच बैठाई गई है।
इसके अलावा कई वरिष्ठ अफसरों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। जानिए, कैसे खाकी से लेकर खादी और मेडिकल सिस्टम की इन 3 बड़ी चूकों के कारण हत्या जैसा संगीन जुर्म दबा रहा…
युवराज की पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा ने 10 सितंबर को गोली मारकर युवराज की हत्या कर दी थी।
कैसे हुई थी युवराज की हत्या, दो पॉइंट में जानिए…
10 सितंबर को शव मिला, 14 को अंतिम संस्कार : अडानी रियल्टी के 31 वर्षीय सेल्स मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा 6 सितंबर को लापता हुए थे। 10 सितंबर को गुरुग्राम पुलिस को उनका शव बादशाहपुर के पास एक नाले से मिला। पहचान नहीं होने पर पुलिस ने शव को अज्ञात मान 14 सितंबर को अंतिम संस्कार कर दिया। बाद में पता चला कि शव युवराज का था।
तकनीकी जांच से हत्यारों तक पहुंची दिल्ली पुलिस : दिल्ली पुलिस की तकनीकी जांच में युवराज की पूर्व सहकर्मी आन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा का नाम सामने आया। दोनों को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने पैसों के विवाद में युवराज की गोली मारकर हत्या करने की बात कबूल की।
दिल्ली के सरिता विहार में इसी मकान में युवराज सिंह मनचंदा रहता था।
जानिए गुरुग्राम पुलिस की तीन बड़ी मिस्टेक…
ZIPNET पर जानकारी अपलोड करने में 6 दिन लेट: जब भी पुलिस को कोई अज्ञात शव मिलता है, तो उसकी तस्वीरें, कपड़ों का विवरण और पहचान के निशान तुरंत जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क पर अपलोड करने होते हैं। इसका उद्देश्य अंतर-राज्यीय पुलिस और लापता लोगों के परिवारों को तुरंत सूचित करना है। बादशाहपुर थाना पुलिस को युवराज का शव 10 सितंबर को ही नाले से मिल गया था, लेकिन जांच अधिकारी ने 16 सितंबर तक इस डेटा को पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। इस 6 दिन की सुस्ती के कारण शव की शिनाख्त नहीं हो सकी।
फॉरेंसिक टीम ने गोलियां के निशान नजरअंदाज किए: डी-कंपोज डेडबॉडी की जांच के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है, लेकिन फॉरेंसिक टीम यह पता नहीं कर पाई कि उसके शरीर पर किस तरह के चोट के निशान हैं। एक्सपर्ट ने शरीर पर मौजूद गोलियों के निशान को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और मौत की वजह सिर्फ 'डूबना' मानकर आगे की कार्रवाई कर दी गई।
पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर की लापरवाही: पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर ने भी जांच अधिकारी के आग्रह लेटर पर युवराज की मौत की वजह डूबना बता दिया। इसके बाद जांच अधिकारी साहुन खान ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई कर दी गई।
गुरुग्राम में युवराज मर्डर केस के दोनों आरोपियों आन्या वत्स और संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया था।
पुलिस की लापरवाही से अंतिम विदाई से वंचित रह गया परिवार
पुलिस ने शव की शिनाख्त के लिए दिल्ली या अन्य पड़ोसी राज्यों की पुलिस से कोई गंभीर संपर्क नहीं साधा, जबकि दिल्ली के लाजपत नगर थाने में युवराज की गुमशुदगी की रिपोर्ट पहले से दर्ज थी। पुलिस ने बिना ठोस प्रयास के शव को 'लावारिस' मान लिया और 14 सितंबर को ही उसका दाह-संस्कार कर दिया, जबकि ज़िपनेट पर एंट्री इसके दो दिन बाद की गई।
इस जल्दबाजी के कारण बदहवास घूम रहा परिवार अपने इकलौते बेटे का आखिरी बार चेहरा देखने और उसे सम्मानजनक अंतिम विदाई देने से वंचित रह गया। कोर्ट के अनुसार, इस कदम से मर्डर के कई अहम फॉरेंसिक सबूत भी हमेशा के लिए नष्ट हो गए।
बादशाहपुर पुलिस को युवराज का शव 10 सितंबर को मिल गया था, लेकिन जांच अधिकारी ने 16 सितंबर तक इस डेटा को पोर्टल पर अपलोड नहीं किया।
पुलिस अफसरों ने इस लापरवाही को इस नजरिए से देखा…
आईओ, फॉरेंसिक और डॉक्टर की लापरवाही से नपे एसएचओ : पुलिस अधिकारियों का भी मानना है कि आईओ साहुन खान, फॉरेंसिक इंचार्ज डॉ. रिचा शर्मा और डॉक्टर मानव चौहान की लापरवाही बादशाहपुर थाने के एसएचओ के सस्पेंड होने की सबसे बड़ी वजह रही। फॉरेंसिक और पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों की शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट और आईओ की जांच पर उन्होंने आंख मूंदकर भरोसा कर लिया।
दो गोलियां मारी थी, दिल्ली पुलिस की जांच में खुला राज: इस लापरवाही का पर्दाफाश तब हुआ जब दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की निशानदेही और सख्ती से पूछताछ के बाद यह बात सामने आई कि युवराज की मौत डूबने से नहीं, बल्कि दो गोलियां लगने की वजह से हुई थी। डॉक्टर, आईओ और फॉरेंसिक टीम शव पर मौजूद गोलियों के निशान देखने में नाकाम रही।
कोर्ट ने कहा- "सबूत मिटाने में डॉक्टर और पुलिस की भूमिका संदिग्ध"
मृतक की बहन की याचिका पर कोर्ट ने इस मेडिकल और पुलिसिया लापरवाही को बेहद गंभीरता से लिया। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि डॉक्टर और पुलिस द्वारा सबूतों को नष्ट करने और छुपाने के पहलू से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि अगर दिल्ली पुलिस इस मामले को नहीं खोलती, तो डॉक्टर की गलत रिपोर्ट के आधार पर इस मर्डर केस की फाइल हमेशा के लिए बंद हो चुकी थी।
-----------------------
युवराज मर्डर से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…
गुरुग्राम-महिला सहकर्मी ने किया कंपनी मैनेजर का मर्डर:लिवइन पार्टनर संग गर्दन में 2 गोली मारी, 7 घंटे कार में रखी डेडबॉडी; उत्तराखंड से पकड़े
गुरुग्राम में कंपनी मैनेजर युवराज हत्याकांड में खुलासा:पूर्व कलीग से ₹1 करोड़ लेने थे; फ्लैट पर मर्डर की प्लानिंग, 3 महीने पहले कट्टा खरीदा
2 दिन तक परिवार को मैसेज भेजते रहे हत्यारोपी:गुरुग्राम अडानी रियल्टी मैनेजर युवराज मर्डर केस; लिखा- मुंबई जा रहा हूं, जल्द लौटूंगा
शादी से एक महीने पहले हुआ कंपनी मैनेजर का मर्डर:गुरुग्राम में पूर्व कलीग को पैसे उधार दिए थे, युवक बोला- मांगने पर मार डाला
अडानी कंपनी के मैनेजर मर्डर केस में SHO सस्पेंड:अज्ञात मान शव का संस्कार किया था, जानकारी शेयर नहीं की; बहन सुप्रीम कोर्ट पहुंची
.
खबरें और भी हैं...
गज पर होगा मां दुर्गा का आगमन, नवरात्र 11 से
कॉपी लिंक
शेयर
करनाल मंडी में धान खरीद का जमीनी सच: किसानों का दावा-MSP से में बेच रहे, खाते में आएगा पूरा पैसा, आढ़ती वापस लेगा
कॉपी लिंक
शेयर
हरियाणा सिविल सर्विसेज रिजल्ट, सोनीपत के इंजीनियर अभिषेक टॉपर: 5 बार UPSC से चूके, मां सरकारी टीचर; 52 हजार ने दिया एग्जाम
0:43
कॉपी लिंक
शेयर
हरियाणवी लेडी कोच बोलीं-पूर्व मंत्री के गुर्गों से धमकियां मिलीं: कहा- खट्टर ने संदीप सिंह को संरक्षण दिया, चालान पेश हुआ तो इस्तीफा लेना पड़ा