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छत्तीसगढ़ के इस इलाके में भटक रहा है लोनर हाथी.. 6 महीने में उतार चुका है 10 लोगों को मौत के घाट, वन विभाग भी नतमस्तक | IBC24

October 13, 2026

Ambikapur Lone elephant killing people: अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में अकेले घूम रहे एक लोनर हाथी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 6 महीने में बलरामपुर और सूरजपुर जिले में इस हाथी के हमलों में 10 लोगों की मौत हो चुकी है। जंगल से निकलकर घरों और बस्तियों तक पहुंच रहे इस हाथी को रोकना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। लगातार कोशिशों के बावजूद हाथी की गतिविधियों पर लगाम नहीं लग पा रही है। अब वन विभाग उसे ट्रेंकुलाइज कर गले में कॉलर आईडी पहनाने की तैयारी कर रहा है, ताकि उसकी लोकेशन पर नजर रखी जा सके।

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अकेला घूमने वाला नर हाथी क्यों हो सकता है खतरनाक?

वयस्क नर हाथियों का अकेले घूमना सामान्य व्यवहार का हिस्सा हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ नर हाथी अक्सर अपने झुंड से अलग होकर विचरण करते हैं। हालांकि, मदकाल यानी मस्ट पीरियड के दौरान उनके व्यवहार में बदलाव आ सकता है। इस समय टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ने से कुछ नर हाथियों में आक्रामकता बढ़ सकती है।

मदकाल में हाथी दूसरे नर हाथियों के साथ वर्चस्व स्थापित करने और मादा हाथियों की तलाश में लंबी दूरी तय कर सकता है। ऐसे में इंसानों से अचानक सामना होने पर स्थिति खतरनाक हो सकती है। हालांकि, हाथी के आक्रामक होने की वजह केवल मदकाल नहीं है। उसका पिछला अनुभव, भोजन की उपलब्धता, आसपास का माहौल और इंसानों से होने वाला टकराव भी उसके व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं।

Ambikapur Lone elephant killing people: लोनर हाथी की निगरानी करना इसलिए भी मुश्किल है, क्योंकि वह किसी झुंड के साथ नहीं चलता। वह अलग-अलग रास्तों से घूमते हुए अचानक आबादी के करीब पहुंच सकता है। जंगल और बस्तियों के बीच बढ़ती आवाजाही, खेतों में फसल और हाथियों के पारंपरिक रास्तों पर मानवीय गतिविधियां भी संघर्ष की आशंका बढ़ाती हैं।

कॉलर आईडी से मिलेगी लोकेशन

लगातार हो रही मौतों के बीच वन विभाग अब हाथी को ट्रेंकुलाइज कर कॉलर आईडी पहनाने की तैयारी कर रहा है। योजना के मुताबिक, जरूरी अनुमति मिलने के बाद विशेषज्ञों की मदद से हाथी को नियंत्रित कर उसके गले में कॉलर आईडी लगाई जाएगी। इससे उसकी लोकेशन और आवाजाही पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।
कॉलर आईडी के जरिए वन विभाग यह पता लगा सकेगा कि हाथी किस दिशा में जा रहा है और किन इलाकों में उसकी मौजूदगी ज्यादा है। इससे प्रभावित गांवों को समय रहते सतर्क करने और वन अमले को मौके पर भेजने में मदद मिल सकती है।

वन विभाग की योजना हाथी की निगरानी तक सीमित नहीं है। उसे दूसरे हाथियों के दल के करीब पहुंचाने की भी तैयारी है, ताकि उसके झुंड के साथ जुड़ने की संभावना बन सके। हालांकि, इस रणनीति की सफलता हाथी के व्यवहार और परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

इंसान-हाथी के बीच टकराव रोकना सबसे बड़ी चुनौती

Ambikapur Lone elephant killing people: बलरामपुर और सूरजपुर में छह महीने के भीतर 10 लोगों की मौत ने मानव-हाथी संघर्ष की गंभीरता सामने ला दी है। केवल हाथी को एक जगह से दूसरी जगह खदेड़ना स्थायी समाधान नहीं है। उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखने, ग्रामीणों को समय पर चेतावनी देने और संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ाने की जरूरत है।

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अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कॉलर आईडी और हाथी को दूसरे दल के करीब पहुंचाने की रणनीति से हमलों में कमी आएगी? वन विभाग की इस योजना से निगरानी बेहतर होने की उम्मीद है, लेकिन इंसानों और हाथी के बीच बढ़ते टकराव को रोकने में इसकी वास्तविक सफलता आगे सामने आएगी।

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