रायपुर42 मिनट पहले
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साइबर ठगी रोकने के लिए पुलिस ने 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक 50 दिन का जागरूकता अभियान चलाया। पुलिस का दावा है कि इस दौरान प्रदेशभर में करीब दो करोड़ लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। इसके बावजूद ऑनलाइन ठगी की शिकायतें आती रहीं। इस दौरान रायपुर से साइबर क्राइम पोर्टल पर 955 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें कथित डिजिटल अरेस्ट, एपीके फाइल और अन्य तरीकों से ठगी के मामले शामिल हैं।
अभियान के दौरान प्रदेशभर से साइबर ठगी की 5220 शिकायतें पोर्टल पर पहुंचीं। इनमें करीब 20% मामलों में एफआईआर दर्ज हुई। रायपुर में लगभग 21% शिकायतों पर केस दर्ज किया गया, जबकि बाकी की जांच चल रही है। पुलिस के मुताबिक, रायपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में 4.12 लाख और ग्रामीण क्षेत्र में 50 हजार से अधिक लोगों को जागरूक किया गया।
इसके लिए स्कूल-कॉलेजों, बैंकों, महिला समूहों, वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं के बीच कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोगों को साइबर अपराध के नए तरीकों और उनसे बचाव की जानकारी दी गई। रायपुर में हर साल साइबर ठगी की चार हजार से अधिक शिकायतें आती हैं, लेकिन इनमें केवल 100 से 120 मामलों में एफआईआर दर्ज होने की जानकारी है।
ऐसे समझें डिजिटल अरेस्ट और एपीके फाइल से ठगी
नर्मदापारा की 62 वर्षीय रीता खन्ना को ठग ने महाराष्ट्र का एनआईए अधिकारी विक्रम सिंह बनकर मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने की धमकी दी। पांच दिन वीडियो कॉल पर रखकर 7 लाख रुपए ठगे। उरकुरा के 64 वर्षीय कारोबारी देवसिंह साहू और उनकी पत्नी को फर्जी सीबीआई और आईपीएस अधिकारी बनकर 6.80 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में फंसाने का डर दिखाया। 44 दिन में 8.50 लाख रुपए ठगे। रकम जुटाने के लिए जेवर भी बेचने पड़े। वहीं, एक कारोबारी को नेवता और रिटायर बैंककर्मी को पेंशन कार्ड के नाम पर एपीके फाइल भेजकर दोनों के खातों से 8.15 लाख रुपए निकाल लिए गए।
हर वर्ग पर अलग फोकस
- स्कूल-कॉलेज: डिजिटल सतर्कता और बुनियादी साइबर सुरक्षा
- बैंक व वित्तीय संस्थान: वित्तीय धोखाधड़ी और यूपीआई सुरक्षा।
- वरिष्ठ नागरिक: डिजिटल अरेस्ट और फर्जी कॉल से बचाव।
- महिला समूह: स्मार्टफोन की गोपनीयता और सुरक्षित ब्राउजिंग।
- युवा: नौकरी के नाम पर ठगी और फिशिंग से बचाव।
- आम नागरिक: डेटा गोपनीयता और सोशल मीडिया सुरक्षा।
- गांव-निकाय: साइबर मुक्त का संकल्प।
भास्कर एक्सपर्ट
मुकेश चौधरी, साइबर क्राइम एक्सपर्ट
केवल खाता उपलब्ध कराने वालों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं साइबर ठगी में केवल बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों पर कार्रवाई से मास्टरमाइंड तक पहुंचना मुश्किल है। डिजिटल अरेस्ट में फर्जी नोटिस और जांच एजेंसियों का डर दिखाया जाता है। रकम के लेन-देन, डिजिटल साक्ष्यों और विदेशी नेटवर्क की जांच, एजेंसियों में समन्वय, आईटी एक्ट की समीक्षा और नियमित जागरूकता जरूरी है।
आप तीन तरीकों से बच सकते हैं साइबर ठगी से
जानकारी, जागरूकता और सतर्कता से लोग साइबर ठगी से बच सकते हैं। ठगी की पांच प्रमुख वजहें हैं- लालच, डर, जल्दबाजी और बिना सत्यापन के भरोसा करना। इसलिए पुलिस लगातार लोगों को जागरूक कर रही है। इसके बावजूद लोग साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। -गौरव मंडल, एडिशनल डीसीपी, साइबर एंड क्राइम
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