माता सती के 51 शक्तिपीठों की स्थापना कैसे हुई थी? जानिए कहाँ-कहाँ गिरे थे देवी के अंग और इन पावन तीर्थस्थलों का रहस्य।
mata Sati 51 Shaktipeethas story
- Published: 05 Aug 2026, 04:05 PM IST
- Last Updated: 05 Aug 2026, 04:05 PM IST
Devi Sati 51 Shaktipeethas story: पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्रजापति दक्ष ने एक बार एक बहुत बड़े यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें उन्होंने समस्त देवी-देवताओं और ऋषियों को आमंत्रित किया था, लेकिन जानबूझकर अपनी पुत्री सती और उनके पति भगवान शिव को इस यज्ञ में नहीं बुलाया। जब माता सती को बिना बुलाए अपने पिता के घर जाने का पता चला, तो उन्होंने शिवजी के रोकने के बावजूद वहाँ जाने का निर्णय लिया।
यज्ञ स्थल पर पहुंचने पर माता सती और भगवान शिव का अपमान किया गया। अपने पति के प्रति पिता का ऐसा दुर्व्यवहार देखकर माता सती अत्यंत आहत हुईं और उन्होंने सहन न कर पाने के कारण उसी यज्ञ कुंड की प्रज्वलित योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए।
शिवजी का प्रलयकारी तांडव और चक्र सुदर्शन
माता सती के वियोग और उनके अपमान से भगवान शिव का कोप अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया। उन्होंने उग्र रूप धारण किया और सती के पार्थिव शरीर को अपने कंधे पर उठाकर पूरे ब्रह्मांड में प्रलयकारी तांडव करना शुरू कर दिया। शिवजी के इस भयंकर क्रोध से पूरी सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा और प्रलय की स्थिति उत्पन्न हो गई।
सृष्टि को इस आसन्न विनाश से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र का प्रयोग किया। सुदर्शन चक्र ने माता सती के शरीर को 51 भागों में विभाजित कर दिया, जो पृथ्वी पर अलग-अलग पावन स्थानों पर जाकर गिरे।
51 शक्तिपीठों की स्थापना और उनका महत्व
जहां-जहां माता सती के अंग, आभूषण या वस्त्र गिरे, वे सभी स्थान आगे चलकर 'शक्तिपीठ' के रूप में प्रसिद्ध हुए। वर्तमान भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे क्षेत्रों में कुल 51 प्रमुख शक्तिपीठ माने गए हैं।
इन सभी शक्तिपीठों में माता सती के विभिन्न अंगों की पूजा 'शक्ति' के रूप में की जाती है और उनके साथ भगवान शिव 'भैरव' के रूप में विराजमान रहते हैं। इन पवित्र स्थलों की यात्रा करने मात्र से भक्तों के समस्त पापों का नाश होता है और उन्हें आध्यात्मिक शांति व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई कथा पुराणों और सनातन धर्म की मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों तक भारतीय पौराणिक इतिहास और शक्तिपीठों के सांस्कृतिक महत्व की जानकारी पहुंचाना है।