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जेल में कैसे कट रही लेडी तस्कर नेहा की रातें: 5 दिनों से ठीक से खाया नहीं, घर से कपड़े मंगवाए; वार्डन से कहा- कैदियों को पढ़ाऊंगी - Samastipur News

September 11, 2026

समस्तीपुर में स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के एसी फर्स्ट क्लास के VIP कूपे से शराब के साथ पकड़ी गई नेहा झा की रात करवटें बदलकर गुजर रही है।

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नेहा को समस्तीपुर जेल के कस्तूरबा वार्ड में रखा गया है। पिछली 5 रातों में से पहले और दूसरे दिन वार्डन की सख्ती के बाद नेहा ने सिर्फ एक-एक रोटी ही खाई।

ट्रेन से शराब की खेप के साथ पकड़े गए नेहा के जीजा को सेंट्रल जेल में ही नेहा के वार्ड से 100 मीटर दूर कृष्णा वार्ड में रखा गया है।

हालांकि, महिला वार्ड की ओर पुरुष बंदियों के जाने की परमिशन नहीं है। दोनों को समस्तीपुर की रेल पुलिस ने 5 सितंबर की शाम करीब 6 बजे मंडल कारा भेजा था।

कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद दोनों को रात करीब 7 बजे कस्तूरबा और कृष्णा वार्ड में शिफ्ट किया गया।

शराब तस्करी की आरोपी नेहा झा की 2 तस्वीरें देखिए…

समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर महिला सिपाही के पास खड़ी नेहा झा।

समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर महिला सिपाही के पास खड़ी नेहा झा।

कार्रवाई के दौरान नेहा झा जेब में हाथ डालकर बेफिक्री से मोबाइल चलाती रही।

कार्रवाई के दौरान नेहा झा जेब में हाथ डालकर बेफिक्री से मोबाइल चलाती रही।

अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए जेल में कैसे कट रही नेहा की रात

जेल सूत्रों के अनुसार, नेहा को जब 5 सितंबर की देर शाम महिला वार्डेन उसके बैरक में ले जाया जा रहा था तब वो फूट-फूटकर रो रही थी। वार्ड में पहुंचने के बाद जेल मैनुअल के अनुसार उसे रोटी, सब्जी और अचार खाने के लिए दिया गया।

खाना दिए जाने के बाद वो काफी देर तक प्लेट को देखती रही और बार-बार छत की ओर देखती रही। देर रात करीब साढ़े 8 बजे महिला वार्डेन के कहने पर उसने एक रोटी खाई और खाना छोड़ दिया।

रात करीब 9 बजे सोने के लिए घंटी बजी और सभी बंदियों को अपने-अपने बेड पर जाने का निर्देश दिया गया। हालांकि, नेहा काफी देर तक अपने बिछावन पर बैठती और फिर उठती रही। एसी फर्स्ट क्लास के कूपे से सीधे जेल के बिछावन तक पहुंची नेहा के लिए माहौल बिल्कुल नया था।

नेहा झा की पहली रात करवटें बदलने में ही गुजर गई। जेल में गश्त कर रही वार्डेन ने नेहा को बताया कि जेल में सुबह जल्दी उठना पड़ता है, इसलिए सो जाओ, लेकिन नेहा को नींद नहीं आई।

वो कुछ देर के लिए बिछावन पर लेटी, लेकिन जब तक उसकी आंख लगती, सुबह उठने वाली घंटी बज गई। सुबह करीब छह बजे गिनती के लिए सभी बंदियों की तरह नेहा झा को भी लाइन में लगना पड़ा।

नेहा झा को 5 सितंबर की देर शाम जेल भेज दिया गया था।

नेहा झा को 5 सितंबर की देर शाम जेल भेज दिया गया था।

6 सितंबर की रात भी नेहा ने रात को सिर्फ एक ही रोटी खाई

6 सितंबर की सुबह हाजिरी के बाद बाकी बंदियों की तरह नेहा झा को भी नाश्ते में गुड़ और चना दिया गया। नाश्ता करने के बाद जब वो दोबारा अपने बिछावन की ओर जाने लगी तो वार्डेन ने उसे रोकते हुए जेल के नियमों का पालन करने की बात कही।

वार्डेन ने उसे समझाया कि जेल में सोने, उठने और बैठने समेत हर काम के लिए नियम तय हैं और उन्हीं के अनुसार दिनचर्या चलती है।

समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर नेहा के ट्रॉली बैग से करीब 75 लीटर विदेशी शराब की खेप बरामद की गई थी।

समस्तीपुर रेलवे स्टेशन पर नेहा के ट्रॉली बैग से करीब 75 लीटर विदेशी शराब की खेप बरामद की गई थी।

नेहा ने वार्डन से कहा- मैं पढ़ी-लिखी हूं, बंदियों को पढ़ा सकती हूं

नेहा ने जेल में मौजूद वार्डन से कहा कि मैं पढ़ी लिखी हूं, इसलिए मेरी इच्छा है कि मैं जेल में बंद महिलाओं को पढ़ाऊं। उसने कहा कि इससे मेरा मन भी लगा रहेगा। हालांकि, वार्डन ने उसे इसकी इजाजत नहीं दी और उसे जेल की लाइब्रेरी में जाकर किताबें पढ़ने की सलाह दी।

कुछ देर लाइब्रेरी में गुजारने के बाद नेहा सिलाई-कढ़ाई सीखने वाली महिला बंदियों के बीच जाकर बैठ गई। हालांकि, इस दौरान वो काफी गुमसुम रही और किसी से ज्यादा बातचीत नहीं की। दोपहर में उसने चावल, दाल और आलू-बैंगन की सब्जी खाई।

नेहा झा अपने जीजा के साथ दिल्ली से बिना टिकट स्वतंत्रता सेनानी सुपर फास्ट के फर्स्ट एसी के वीआईपी कूपे में यात्रा कर रही थी।

नेहा झा अपने जीजा के साथ दिल्ली से बिना टिकट स्वतंत्रता सेनानी सुपर फास्ट के फर्स्ट एसी के वीआईपी कूपे में यात्रा कर रही थी।

दूसरी रात भी देर तक जागती रही नेहा

जेल सूत्रों के अनुसार, दूसरी रात भी नेहा ने केवल एक रोटी खाई। इसके बाद वो रात करीब डेढ़ से दो बजे तक अपने बिछावन पर लेटी रही और छत और दीवारों को देखती रही।

हालांकि, बताया गया कि दूसरी रात उसे पहले की अपेक्षा नींद आ गई। सुबह हाजिरी के लिए घंटी बजने पर वह अन्य बंदियों के साथ लाइन में शामिल हुई।

जेल में उसकी 5 रातें लगभग इसी तरह बीती हैं। इस बीच परिवार के लोगों की ओर से नेहा और उसके जीजा ईशान के लिए घर से कपड़े उपलब्ध कराए गए हैं।

इधर, नाम न छापने की शर्त पर एक जेल अधिकारी ने कहा कि जेल के अंदर सभी बंदी एक समान हैं। जेल नियमावली के अनुसार सभी को सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और नियमों के तहत ही उनका रूटीन रहता है।

नेहा झा और उसके जीजा को समस्तीपुर मंडलकारा में रखा गया है।

नेहा झा और उसके जीजा को समस्तीपुर मंडलकारा में रखा गया है।

जेल में बंदियों के लिए क्या है मेन्यू और मैन्युअल

  • जेल के शेड्यूल के मुताबिक, सभी कैदियों को सुबह 4 बजे उठना होता है।
  • इस दौरान कैदियों या बंदियों को घंटी बजाकर उठाया जाता है।
  • 2 घंटे बाद यानी सुबह 6 बजे सभी कैदियों और बंदियों को लाइन में खड़ा होना होता है, ताकि उनकी गिनती की जाए।
  • एक घंटे बाद यानी सुबह 7 बजे कैदियों या बंदियों को चना और गुड़ नाश्ते के रूप में दिया जाता है।
  • दोपहर 12 से एक बजे के बीच में लंच दिया जाता है।
  • सुबह 7 बजे नाश्ता करने के बाद दोपहर 12 बजे के बीच बंदियों को सोना या फिर आराम नहीं करना होता है।
  • कैदियों को जेल में चलाए जा रहे ट्रेनिंग प्रोग्राम या फिर सिलाई-कढ़ाई जैसे काम को करना होता है। जेल वार्डन की ओर से कैदियों को काम सौंपा जाता है।
  • दोपहर के खाने में आमतौर पर चावल, दाल, सब्जी, रोटी दिया जाता है। लंच का टाइम 1 बजे खत्म हो जाता है।
  • इसके बाद कैदियों या फिर बंदियों को आराम करने को कहा जाता है।
  • शाम 4 बजे सभी कैदियों या बंदियों को साफ-सफाई पर लगाया जाता है।
  • शाम 6 बजे दोबारा कैदी या बंदी लाइन में खड़े होते हैं, जिसके बाद इनकी गिनती होती। इसके बाद ये लोग बैरक में चले जाते हैं।
  • 2 घंटे बाद यानी रात 8 बजे कैदियों या बंदियों को रात का खाना दिया जाता है। रात के खाने में रोटी, चावल, दाल, सब्जी दिया जाता है।
  • डिनर 9 बजे तक खत्म हो जाता है, इसके बाद कैदियों या फिर बंदियों को बैरक में शिफ्ट हो जाना होता है, इसके बाद वार्डन या जेल प्रहरी बैरक को बाहर से लॉक कर देते हैं।