मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा चयनित 3,567 प्रधानाचार्यों, प्रवक्ताओं (PGT) और सहायक अध्यापकों (TGT) को नियुक्ति पत्र वितरित किए।
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पिछले नौ वर्षों में 9.5 लाख से अधिक युवाओं को निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं।
- Published: 22 Sep 2026, 02:06 PM IST
- Last Updated: 22 Sep 2026, 02:15 PM IST
उत्तर प्रदेश में पारदर्शी एवं भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती प्रक्रिया को बढ़ावा देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की पुरानी प्रशासनिक व्यवस्था और तथाकथित 'सैफई सिंडिकेट' पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में अब योग्यता और मेरिट के आधार पर ही युवाओं को नौकरियां दी जा रही हैं। उन्होंने नवनियुक्त शिक्षकों को नए भारत और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
घूसखोरी और भ्रष्टाचार पर सीएम योगी का करारा प्रहार
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले किसी भी प्रधानाचार्य, प्रवक्ता या शिक्षक से किसी प्रबंधक अथवा व्यक्ति ने लेन-देन की बात की, तो उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी और उसे जेल जाना पड़ेगा।
उन्होंने 2015-16 के एक मामले का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे पहले योग्य अभ्यर्थियों से आठ लाख रुपये तक की रिश्वत मांगी जाती थी और पैसे न देने पर उन्हें नौकरी से वंचित कर दिया जाता था। सरकार ने पुरानी पूरी पारदर्शी विहीन प्रक्रिया को रद्द कर अब वास्तविक मेधावी अभ्यर्थियों को उनके हक का नियुक्ति पत्र सौंपा है।
9.5 लाख सरकारी नौकरियां और भविष्य का रोडमैप
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि पिछले नौ वर्षों के कार्यकाल में राज्य सरकार द्वारा 9.5 लाख से अधिक युवाओं को निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले छह महीनों के भीतर प्रदेश के एक लाख और युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां प्रदान की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश जो कभी 'बीमारू राज्य' माना जाता था, वह आज युवाओं की प्रतिभा और ऊर्जा के बल पर देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है।
धरनारत युवाओं के हित में NCTE को लिखा जाएगा पत्र
प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं के अवसरों और आयु सीमा को लेकर धरने पर बैठे अभ्यर्थियों के विषय पर मुख्यमंत्री ने संवेदनशील रुख अपनाया। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) को एक पत्र भेजकर इन युवाओं को नियमों में आवश्यक शिथिलता (रिलैक्सेशन) देने या ऐसा सिस्टम बनाने का अनुरोध किया जाए, जिससे वे आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित हो सकें।
शिक्षकों और कर्मचारियों को कैशलेस इलाज की सौगात
शिक्षकों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि शासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जोड़ दिया गया है।
इसके अलावा बेसिक शिक्षा विभाग के रसोइयों और शिक्षामित्रों को भी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है ताकि वे बिना किसी आर्थिक चिंता के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
नई पीढ़ी के चरित्र और नेतृत्व निर्माण में गुरुओं की भूमिका
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक शिक्षक का दायित्व केवल विद्यालय अनुशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह 2047 के विकसित भारत का नेतृत्व करने वाली भावी पीढ़ी का निर्माण करता है। उन्होंने भगवान श्रीराम, चाणक्य, महर्षि वाल्मीकि और डॉ. कलाम के उदाहरण देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में हमेशा गुरु की भूमिका सर्वोच्च रही है।
उन्होंने अध्यापकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को डिजिटल लाइब्रेरी, स्मार्ट क्लास और अटल टिंकरिंग लैब के माध्यम से आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ उच्च नैतिक मूल्य और संस्कार प्रदान करें।