भारत और उज्बेकिस्तान ने लॉन्ग-टर्म यूरेनियम सप्लाई फ्रेमवर्क और 5 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य पर सहमति जताई है। ताशकंद में पीएम मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिला।
PM Modi Uzbekistan visit
- Published: 30 Aug 2026, 04:25 PM IST
- Last Updated: 30 Aug 2026, 04:25 PM IST
PM Modi Uzbekistan visit: भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए आयाम पर पहुंचाते हुए लॉन्ग-टर्म यूरेनियम सप्लाई के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क तैयार करने पर सहमति व्यक्त की है। ताशकंद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव (Shavkat Mirziyoyev) के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अहम समझौते का ऐलान किया।
दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) में तब्दील करने का बड़ा फैसला लिया है और साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार का सालाना लक्ष्य 1 अरब डॉलर से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तय किया है।
— Narendra Modi (@narendramodi) August 30, 2026
प्रधानमंत्री मोदी ने वार्ता के दौरान कहा कि दोनों देश नागरिक परमाणु ऊर्जा जरूरतों के तहत उज्बेकिस्तान से यूरेनियम आयात को लेकर एक दीर्घकालिक व्यवस्था स्थापित करेंगे। ऊर्जा सहयोग के अलावा दोनों नेताओं ने रक्षा, बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर), क्रिटिकल मिनरल्स, डिजिटल तकनीक और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और अधिक प्रगाढ़ बनाने पर विस्तृत चर्चा की।
#WATCH | Tashkent, Uzbekistan: Prime Minister Narendra Modi says, "Uzbekistan is at the heart of Central Asia and at the heart of India's engagement with the region. India and Uzbekistan have deep similarities in their thinking and aspirations. Youth, innovation, inclusive growth… pic.twitter.com/e0O0Ny5CrZ
— ANI (@ANI) August 30, 2026
व्यापार, बुनियादी ढांचा और डिजिटल तकनीक पर खास जोर
इस उच्चस्तरीय बैठक में व्यापार, निवेश, खनन, स्वास्थ्य, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी जैसे क्षेत्रों पर भी मुख्य रूप से फोकस किया गया। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि भारत की कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र की ताकत उज्बेकिस्तान के बागवानी (हॉर्टिकल्चर) अनुभव के साथ मिलकर काम कर सकती है, साथ ही उज्बेकिस्तान की औषधीय जड़ी-बूटियों के क्षेत्र को भारत के आयुर्वेद ज्ञान के साथ जोड़ा जा सकता है।
#WATCH | Tashkent: Uzbekistan President Shavkat Mirziyoyev says, "During our discussions, we identified new areas where we can realize our existing potential. We aim to advance cooperation in sectors such as energy, culture, critical minerals, pharmaceuticals, jewelry, and… https://t.co/nIYACRDbND pic.twitter.com/pXT8CNzKuI
— ANI (@ANI) August 30, 2026
दोनों देशों के बीच माइनिंग, संस्कृति, शिक्षा, पर्यटन और आयुर्वेद से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा, ताशकंद और फयाज टेपा तथा कारा टेपा के बौद्ध स्थलों के संरक्षण के लिए एक 'लेटर ऑफ इंटेंट' पर भी सहमति बनी। कनेक्टिविटी और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए तीन नए सिस्टर-सिटी और सिस्टर-स्टेट समझौते स्थापित करने का निर्णय लिया गया, जिससे शहरी प्रबंधन, उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
#WATCH | Tashkent, Uzbekistan: Prime Minister Narendra Modi says, "We will work together to enhance win-win cooperation in infrastructure development. Collaboration in areas such as digital public infrastructure, AI, critical minerals, clean energy, space, and nuclear energy is… pic.twitter.com/2ROTtaeWHe
— ANI (@ANI) August 30, 2026
पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा गया
ताशकंद की इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान Order of "Oliy Darajali Dustlik" से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने कुक्सराय प्रेसिडेंशियल पैलेस में पीएम मोदी का गर्मजोशी से औपचारिक स्वागत किया और इस सम्मान के बाद दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाकर अपनी मित्रता का संदेश दिया।
#WATCH | Tashkent, Uzbekistan: During delegation-level talks with PM Narendra Modi, President Shavkat Mirziyoyev says, "India is our reliable strategic partner. Last year, our bilateral trade exceeded one billion dollars for the first time. In recent years, the number of joint… pic.twitter.com/FUCfZF7I3Z
— ANI (@ANI) August 30, 2026
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देश ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स, फार्मास्यूटिकल्स और स्टार्ट-अप जैसे क्षेत्रों के लिए सेक्टर-स्पेसिफिक रोडमैप तैयार करेंगे। इस यात्रा को दोनों देशों के रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे मध्य एशिया के साथ भारत के रिश्ते और अधिक मजबूत होंगे।