Published: Sunday, October 18, 2026, 13:19 [IST]
Shardiya Navratri Sandhi Puja 2026: शारदीय नवरात्रि के आखिरी दिनों में मां दुर्गा की पूजा का उत्साह बढ़ जाता है। घरों और मंदिरों में महाष्टमी और महानवमी की तैयारियां तेज हो जाती हैं। इन दोनों दिनों में भक्त मां दुर्गा की विशेष पूजा करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अष्टमी और नवमी के बीच कुछ ऐसे पल भी आते हैं, जिन्हें बेहद शुभ माना जाता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान की गई पूजा का विशेष महत्व होता है। यही वजह है कि दुर्गा पूजा पंडालों में इसके लिए पहले से तैयारियां की जाती हैं। खास बात यह है कि इस पूजा का संबंध मां दुर्गा के एक ऐसे स्वरूप से है, जिसने चंड और मुंड जैसे असुरों का वध किया था। आइए जानते हैं इस पूजा की परंपरा और इसके पीछे की मान्यता।
क्या होती है संधि पूजा?
नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि के मिलन पर की जाने वाली विशेष पूजा को संधि पूजा कहा जाता है। इसमें मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की आराधना होती है। दुर्गा पूजा की परंपरा में इसे प्रमुख अनुष्ठानों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस समय देवी की आराधना करने से भक्तों को साहस, सुरक्षा और सुख-शांति का आशीर्वाद मिलता है।
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48 मिनट क्यों हैं खास?
संधि पूजा के लिए कुल 48 मिनट का समय होता है। इसमें अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट शामिल होते हैं। दो तिथियों के इस मिलन को संधि काल कहा जाता है। इसका मुहूर्त पंचांग में अष्टमी तिथि समाप्त होने के समय से तय होता है। इसलिए हर साल संधि पूजा का समय बदल सकता है।
कैसे निकालें पूजा का सही समय?
मान लीजिए कि अष्टमी तिथि सुबह 11 बजे समाप्त हो रही है। ऐसी स्थिति में संधि पूजा सुबह 10 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर 11 बजकर 24 मिनट तक होगी। यह केवल समय समझाने के लिए उदाहरण है। वास्तविक मुहूर्त स्थानीय पंचांग से देखना चाहिए। संधि पूजा और संध्या पूजा को एक नहीं समझना चाहिए। संधि पूजा का संबंध शाम से नहीं, बल्कि तिथियों के मिलन से है।
मां चामुंडा से जुड़ी है कथा
दुर्गा सप्तशती के सातवें अध्याय में चंड और मुंड नाम के दो असुरों के वध का वर्णन मिलता है। कथा के अनुसार, देवी अंबिका के क्रोध से उनके ललाट से देवी काली प्रकट हुई थीं। युद्ध के दौरान देवी काली ने चंड और मुंड का वध किया। इसके बाद देवी चंडिका ने उन्हें चामुंडा नाम दिया। इसी कारण संधि पूजा में मां चामुंडा की आराधना की जाती है।
संधि पूजा में क्या किया जाता है?
इस दौरान भक्त मां दुर्गा से परिवार की रक्षा, सुख-शांति और कल्याण की प्रार्थना करते हैं। देवी चामुंडा को बुराई और अत्याचार का नाश करने वाली शक्ति माना जाता है। अलग-अलग मंदिरों और पूजा पंडालों में विशेष पूजा सामग्री चढ़ाई जाती है। कुछ स्थानों पर प्रतीकात्मक बलि की परंपरा भी निभाई जाती है।
पूजा से पहले रखें इन बातों का ध्यान
संधि पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को अपने मंदिर या पूजा पंडाल से सही मुहूर्त की जानकारी पहले लेनी चाहिए। पूजा की सामग्री समय रहते तैयार कर लें, ताकि निर्धारित समय में अनुष्ठान पूरा हो सके।
अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि कुछ भिन्न हो सकती है। इसलिए श्रद्धालु अपने पारिवारिक रीति-रिवाज और स्थानीय पंचांग के अनुसार संधि पूजा कर सकते हैं।
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