इनेलो नेता संपत सिंह ने हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की वजह से ग्रामीण परिवार के बच्चों को मजबूरन प्राइवेट स्कूलों में जाना पड़ रहा है.
Written By : कविता गाडरी | Updated at : 17 Sep 2026 07:55 AM (IST)

संपत सिंह ने हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
Source : instagram
इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के राष्ट्रीय संरक्षक और हरियाणा के पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह ने प्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि भाजपा सरकार जानबूझकर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर रही है. उन्होनें प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार को घेरते हुए कुछ आंकड़े पेश किए जिसमें सरकारी शिक्षकों की भर्ती को नियुक्ति को लेकर सवाल किए गए है. उनके बयान के मुताबिक शिक्षा व्यवस्था ठप होने की वजह से ग्रामीण परिवार के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. वहीं शिक्षकों से भी पढ़ाने की बजाय बीएलओ जैसे काम कराए जा रहे हैं. जिससे स्कूलों में पढ़ाई का स्तर तेजी से गिर रहा है.
34 प्रतिशत शिक्षक पद पड़े हैं खाली
सिंह के बयान के मुताबिक, सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में 1.22 लाख से अधिक पदों में से 34 प्रतिशत यानि की 40,971 पद खाली पड़े हैं. वहीं साल 2014 से प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों की भर्ती ठप पड़ी है. उन्होंने आरोप लगाए है कि सरकार जानबूझकर बार-बार नियमों में बदलाव कर के इन भर्तियों को रोकने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि एएमओ (AMO) भर्ती का परिणाम हाई कोर्ट के निर्देश पर चौथी बार बदला गया.
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स्कूलों के साथ-साथ कॉलेज भी संकट में
सम्पत सिंह के अनुसार स्कूलों के साथ-साथ प्रदेश की उच्च शिक्षा भी संकट में है. प्रदेश के 186 सरकारी कॉलेजों में 60 प्रतिशत अस्सिटेंट प्रोफेसर के पद खाली पड़े हैं. वहीं कई कॉलेज धर्मशाला, टिन शेड व जर्जर भवनों में चल रहे हैं और सरकारी छात्रों का नांमकन घटकर केवल 29 प्रतिशत ही रह गया है. 53 कॉलेजों में केवल 50 से कम छात्र ही रह गए हैं. वहीं कुछ कॉलेज में तो छात्रों की संख्या केवल एक अंक ही रह गई है.
सरकार के लिए काम कर रही है भर्ती रोको गैंग
सिंह ने यह भी कहा कि सरकार हमेशा भर्ती रोको गैंग का बहाना दे कर विपक्ष को जिम्मेदार ठहराती है. बल्कि असल में यह गैंग सरकार के लिए ही काम करती है. वहीं पिछले 12 सालों में 5000 से ज्यादा प्राइमरी स्कूलों को या तो बंद कर दिया गया है या तो उन्हें दूसरे स्कूलों के साथ जोड़ दिया गया है. लगभग 6000 प्री-प्राइमरी स्कूलों को चौपालों व वृद्धाआश्रमों में चलाए जा रहे हैं.
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About the author कविता गाडरी
कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है.
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए.
इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.
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Published at : 17 Sep 2026 07:55 AM (IST)
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