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400 वकील बैठे, फिर सबसे बड़े कानून अफसर की ही कर दी छुट्टी; सरकार से बोले- करो बर्खास्त

August 13, 2026

Aug 13, 2026 10:06 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, शिलान्ग

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महाधिवक्ता अमित कुमार पर आरोप है कि उन्होंने शिलांग की सड़कों पर एक वकील के साथ मारपीट और परेड कराने के संबंध में हाई कोर्ट द्वारा शुरू किए गए एक स्वत: संज्ञान केस की सुनवाई के दौरान बार एसोसिएशन को निशाना बनाया था।

Meghalaya Bar Association

मेघालय हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने राज्य के एडवोकेट जनरल अमित कुमार को अपने वकीलों की लिस्ट से हटा दिया है।

मेघालय हाई कोर्ट बार एसोसिएशन और शिलांग बार एसोसिएशन ने राज्य के सबसे बड़े कानून अधिकारी यानी राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General- AG) अमित कुमार को ही अपने वकीलों की लिस्ट से हटा दिया है और सरकार से कहा है कि उन्हें AG के पद से तुरंत बर्खास्त करें। 5 अगस्त को 400 से अधिक वकीलों की मौजूदगी में हुई जॉइंट एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल बॉडी की मीटिंग के बाद हाल ही में पास हुए एक प्रस्ताव में, बार ने कहा कि महाधिवक्ता अमित कुमार ने आम बयान दिए थे, जिसमें दावा किया गया था कि बार एसोसिएशन महिला वकीलों की सुरक्षा करने और उन्हें सुरक्षित माहौल देने में नाकाम रही हैं।

वकीलों की मीटिंग के प्रस्ताव में कहा गया, “यह तय किया गया है कि अमित कुमार का नाम मेघालय हाई कोर्ट बार एसोसिएशन और शिलांग बार एसोसिएशन यानी दोनों एसोसिएशन के वकीलों की लिस्ट से हटाया जाता है और वह अब इन एसोसिएशन के सदस्य नहीं रहेंगे। इसके अलाना मीटिंग में यह भी तय किया गया कि दोनों बार एसोसिएशन के सभी सदस्य अब से अमित कुमार को मेघालय राज्य के एडवोकेट जनरल के तौर पर मान्यता नहीं देंगे।”

महाधिवक्ता पर क्या आरोप, वकीलों का संघ क्यों खफा

दरअसल, महाधिवक्ता अमित कुमार पर आरोप है कि उन्होंने शिलांग की सड़कों पर एक वकील के साथ मारपीट और परेड कराने के संबंध में हाई कोर्ट द्वारा शुरू किए गए एक स्वत: संज्ञान केस की सुनवाई के दौरान बार एसोसिएशन को निशाना बनाया था। वकील पर पहले एक इंटर्न के साथ छेड़छाड़ का भी आरोप था। आरोपी वकील को कथित तौर पर हाइनीवट्रेप नेशनल यूथ फ्रंट (HNYF) के सदस्यों द्वारा उसके चैंबर से बाहर निकालकर परेड कराने के बाद, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के साथ-साथ शिलांग बार एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे को एक रिप्रेजेंटेशन लिखकर राज्य के अधिकारियों पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया था।

चीफ जस्टिस के सामने AG ने क्या कहा था?

31 जुलाई को स्वत: संज्ञान केस की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रेवती मोहिते डेरे और जस्टिस डब्ल्यू डिएंगदोह की बेंच ने देखा कि घटना के समय मौजूद होने के बावजूद पुलिस पहली नज़र में कार्रवाई करने में नाकाम रही। 3 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान, एडवोकेट जनरल कुमार ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में HNYF से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन, क्योंकि पूरा विवाद एक इंटर्न के सेक्सुअल हैरेसमेंट से जुड़ा है, इसलिए कहा जा रहा है कि कुमार ने महिला वकीलों की सुरक्षा न कर पाने के लिए बार बॉडीज़ को भी दोषी ठहराया।

महाधिवक्ता से सवाल-जवाब

बार एंड बेंच के मुताबिक, इसके बाद हाई कोर्ट में हुए घटनाक्रम से वाकिफ एक सोर्स ने कहा कि बार एसोशिएशन ने शुरू में कुमार से यह बताने के लिए कहा कि उन्होंने कोर्ट के सामने ऐसे बयान किस आधार पर दिए। कहा जा रहा है कि कुमार के जवाब से मामला और बिगड़ गया, जिसके कारण उन्हें बार एसोसिएशन के मेंबर के पद से हटा दिया गया। सूत्रों ने कहा, “AG ने कोर्ट में कहा था कि बार फेल हो गया है और मेघालय में ऐसी कई घटनाएं हो रही हैं। लेकिन यहां ऐसी चीजें नहीं होतीं। यह अपनी तरह की अकेली घटना थी। बार आरोपी वकील का समर्थन करने के लिए किसी भी तरह से कोर्ट नहीं गया था, बल्कि सिर्फ इसलिए गया क्योंकि नॉन-स्टेट एक्टर्स ने उसे परेड कराया था।”

अगली सुनवाई 19 अगस्त को

3 अगस्त को मामले की सुनवाई के दौरान, बार के रिप्रेजेंटेटिव्स ने कोर्ट को बताया कि वे राज्य में प्रैक्टिस करने वाली महिला वकीलों के साथ-साथ युवा महिला इंटर्न्स की सुरक्षा और सम्मान के लिए कमिटेड हैं। इसके बाद कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ इंडिया दोनों को इस मामले में पार्टी रेस्पोंडेंट बनाया और उनसे अलग-अलग कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली महिला वकीलों/गर्ल इंटर्न की सुरक्षा और सम्मान पर बात करने को कहा। इस मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी। इस बीच, बार बॉडीज़ ने एडवोकेट जनरल अमित कुमार को वकीलों के संघ से ही हटा दिया और अब अपनी मांग पर राज्य के जवाब का इंतज़ार कर रही है।