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4 हजार साल पुराने इस मंदिर की मूर्ति से निकलता है खून, चौंका देंगी रहस्य्मय कहानी

July 28, 2026

Hemachala Narasimha Temple (धर्म) : भारत में ऐसे अनेक प्राचीन मंदिर हैं, जो अपनी वास्तुकला, धार्मिक महत्व और अनोखी मान्यताओं के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों से जुड़े कई रहस्य आज भी लोगों की जिज्ञासा का विषय बने हुए हैं। कुछ स्थानों पर प्राकृतिक चमत्कार देखने को मिलते हैं, तो कहीं ऐसी घटनाओं का उल्लेख मिलता है, जिन्हें श्रद्धालु दिव्य मानते हैं।

ऐसा ही एक प्रसिद्ध मंदिर दक्षिण भारत के तेलंगाना राज्य में स्थित हेमाचला लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर है। यह मंदिर अपनी प्राचीनता के साथ-साथ भगवान नरसिंह की अद्भुत प्रतिमा के कारण भी विशेष पहचान रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां स्थापित प्रतिमा में ऐसे चमत्कारी गुण हैं, जिन्हें देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

हजारों साल पुराना है यह पवित्र मंदिर

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हेमाचला लक्ष्मी नरसिंह स्वामी मंदिर लगभग चार हजार वर्ष पुराना माना जाता है। यह मंदिर तेलंगाना के वारंगल जिले के मल्लूर क्षेत्र में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित है।

करीब 1500 फीट की ऊंचाई पर बने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 150 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां का वातावरण शांत और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर दिखाई देता है, जिससे यहां आने वाले लोगों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।

भगवान नरसिंह की प्रतिमा है आकर्षण का केंद्र

इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण भगवान लक्ष्मी नरसिंह की प्राचीन प्रतिमा है। श्रद्धालुओं के बीच यह प्रतिमा अपनी अनोखी विशेषताओं के कारण विशेष आस्था का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्रतिमा का स्पर्श सामान्य पत्थर की मूर्तियों जैसा कठोर नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत कोमल महसूस होता है। यही कारण है कि यह प्रतिमा वर्षों से लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

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प्रतिमा से रक्त निकलने की प्रचलित मान्यता

मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता यह है कि यदि प्रतिमा के एक विशेष स्थान पर दबाव डाला जाए, तो वहां लाल रंग का निशान दिखाई देता है। कुछ श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि अधिक दबाव पड़ने पर प्रतिमा से रक्त जैसा लाल द्रव निकलता है।

इसी कारण यह मंदिर देशभर में रहस्य और आस्था का केंद्र माना जाता है। हालांकि इस विषय पर वैज्ञानिक रूप से कोई पुष्टि उपलब्ध नहीं है। यह मान्यता मुख्य रूप से स्थानीय परंपराओं और श्रद्धालुओं की आस्था पर आधारित है।

प्रतिमा पर लगाया जाता है चंदन का लेप

मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार, भगवान नरसिंह की प्रतिमा पर नियमित रूप से चंदन का लेप लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से प्रतिमा की विशेष स्थिति बनी रहती है। मंदिर के पुजारी वर्षों से इस परंपरा का पालन करते आ रहे हैं और श्रद्धालु भी इसे अत्यंत श्रद्धा के साथ देखते हैं।

स्वयंभू प्रतिमा होने की है मान्यता

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मंदिर में स्थापित भगवान नरसिंह की प्रतिमा स्वयंभू है, अर्थात यह किसी शिल्पकार द्वारा निर्मित नहीं, बल्कि स्वयं प्रकट हुई मानी जाती है। स्थानीय धार्मिक मान्यता कहती है कि यह प्रतिमा धरती के भीतर से प्रकट हुई थी। इसी कारण इस मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है तथा इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

निःसंतान दंपतियों से भी जुड़ी है मान्यता

मंदिर से जुड़ी एक और प्रचलित मान्यता यह है कि संतान सुख की इच्छा रखने वाले दंपति यहां श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि भगवान नरसिंह की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। इसी कारण वर्षभर यहां विशेष पूजा और अनुष्ठानों का आयोजन होता रहता है।

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