देहरादून (उत्तम हिन्दू न्यूज): उत्तराखंड में बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य व तंत्रिका विकास (न्यूरो-डेवलपमेंट) को लेकर चौंकाने वाले और चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। बेंगलुरु स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (NIMHANS), उत्तराखंड स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी और गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज के संयुक्त सर्वे के अनुसार, राज्य में 0 से 17 साल की उम्र के करीब 35,746 बच्चों में ऑटिज्म, अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD), एंग्जायटी या डिप्रेशन जैसी गंभीर मानसिक व विकासात्मक समस्याएं होने का अनुमान लगाया गया है।
चार जिलों के सर्वे में सामने आए आंकड़े, न्यूरो-डेवलपमेंट से जुड़ी समस्याएं सबसे ज्यादा
वर्ष 2024-25 के दौरान किए गए इस अध्ययन में राज्य के चार प्रमुख जिलों- देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा और नैनीताल के शहरी व ग्रामीण इलाकों को शामिल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 14,790 बच्चों और किशोरों में न्यूरो-डेवलपमेंटल विकार पाए जाने की आशंका है। इसके अतिरिक्त, लगभग 5,067 बच्चों में एंग्जायटी या डिप्रेशन, 2,445 में ऑटिज्म और 1,075 बच्चों में ADHD के लक्षण होने का अनुमान है। विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में डिप्रेशन और एंग्जायटी का बढ़ना बेहद गंभीर संकेत है। यह आंकड़े 2011 की जनगणना के आधार पर तय की गई जनसंख्या पर आकलित किए गए हैं।
माता-पिता में जागरूकता की भारी कमी, 5% लोग ही जानते हैं ADHD के बारे में
सर्वे की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अधिकांश अभिभावक बच्चों की मानसिक व न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की पहचान और समय पर इलाज को लेकर पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 78.16 प्रतिशत लोगों ने डिप्रेशन के बारे में तो सुना था, लेकिन सही न्यूरो-डेवलपमेंट न होने के बारे में केवल 12.15 प्रतिशत और ADHD के बारे में महज 5.40 प्रतिशत लोगों को ही जानकारी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि जानकारी और समझ के इसी अभाव के चलते परिवारों को बच्चों की बीमारी का समय रहते पता नहीं चलता, जिससे शुरुआती उपचार में भारी देरी हो जाती है।
बच्चे के व्यवहार में बदलाव को हल्के में न लें, समय पर लें डॉक्टरी सलाह
NIMHANS के विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सतर्क करते हुए कहा है कि बच्चों में मानसिक समस्याओं को आम नखरा या जिद समझकर नजरअंदाज न करें। यदि बच्चा लगातार उदास रहता है, बेवजह डर या अत्यधिक चिंता में दिखता है, पढ़ाई में अचानक पिछड़ने लगा है या उसका ध्यान केंद्रित नहीं हो पा रहा है, तो बिना झिझक तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों या बाल रोग विशेषज्ञों से संपर्क करना चाहिए। समय पर पहचान और काउंसलिंग से बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है।
You Might Be Interested In
- जर्मनी में इमारत में आग लगने से 3 भारतीय छात्रों की मौत, हत्या की आशंका में 41 साल का शख्स गिरफ्तार
- पानी की बोतल पर 2 रुपए ज्यादा वसूलना रेस्टोरेंट को पड़ा भारी, कंज्यूमर फोरम ने ठोका भारी भरकम जुर्माना
- कन्या पूजन में न मिलें पूरी 9 कन्याएं तो क्या करें? जानें शास्त्रों का सही नियम
- एक हो जाएंगे रूस और अमेरिका, धरती पर बनेगा नया सुपर कॉन्टीनेंट; वैज्ञानिकों का बड़ा दावा
- NPCI ने ‘तत्काल NPS’ किया शुरू, अब UPI के जरिए चुटकियों में खुल जाएगा पेंशन अकाउंट
- छत से पानी बहने की टेंशन हमेशा के लिए खत्म, घर लाएं यह स्मार्ट डिवाइस; टंकी भरते ही मोबाइल खुद बंद कर देगा मोटर