Published: Thursday, October 15, 2026, 10:51 [IST]
Shardiya Navratri 2026 Ashtami and Navami Date: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करने वाले भक्तों के लिए अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व होता है। इन दोनों दिनों में व्रत रखने, कन्या पूजन करने और देवी की आराधना करने की परंपरा है। लेकिन इस बार नवरात्रि की तारीखों को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। इसकी वजह सप्तमी तिथि का दो दिनों तक रहना बताया जा रहा है।
कुछ पंचांगों के अनुसार अष्टमी और नवमी अलग-अलग दिन मनाई जाएंगी, जबकि कुछ में दोनों का व्रत एक ही दिन रखने की बात कही गई है। ऐसे में भक्त यह जानना चाहते हैं कि कन्या पूजन कब करना सही रहेगा और दशहरा किस दिन मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने इस भ्रम को दूर करते हुए तिथियों और पूजा के शुभ समय की जानकारी दी है।
इस बार 10 दिनों की नवरात्रि
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पूरे 10 दिनों की है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सप्तमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण अष्टमी और नवमी की तारीखों को लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर की सुबह से शुरू होकर 18 अक्टूबर को सुबह करीब 9 बजे तक रहेगी। व्रत के लिए सूर्योदय के समय मौजूद तिथि का विशेष महत्व होता है। इसलिए सप्तमी का व्रत 17 अक्टूबर को रखना उत्तम माना गया है।
अष्टमी व्रत कब रखा जाएगा?
इस बार शारदीय नवरात्रि का अष्टमी व्रत 18 अक्टूबर 2026, रविवार को रखना शुभ रहेगा। पंचांग के मुताबिक, अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी और 19 अक्टूबर, सोमवार को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। सप्तमी युक्त अष्टमी व्रत रखना उत्तम माना जाता है। इसी आधार पर 18 अक्टूबर को अष्टमी व्रत के लिए उचित बताया गया है।
नवमी व्रत किस दिन है?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, नवमी का व्रत 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को रखना मान्य रहेगा। नवमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट के बाद शुरू होगी और 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। नवरात्रि में अष्टमी युक्त नवमी व्रत रखने की परंपरा है। इसलिए 19 अक्टूबर को नवमी व्रत रखना उचित माना गया है।
क्या एक ही दिन मना सकते हैं अष्टमी-नवमी?
कुछ पंचांगों में तिथियों की गणना अलग होने के कारण अष्टमी और नवमी दोनों का व्रत 19 अक्टूबर को मान्य बताया गया है। जो भक्त दोनों व्रत एक ही दिन रखना चाहते हैं, वे 19 अक्टूबर को ऐसा कर सकते हैं। अष्टमी और नवमी का व्रत एक ही दिन रखने में कोई दोष नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा के साथ पूजा करने वाले भक्तों को मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।
संधि पूजा का शुभ समय
नवरात्रि में अष्टमी और नवमी के बीच होने वाली संधि पूजा का विशेष महत्व है। इस बार संधि पूजा 19 अक्टूबर को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक की जा सकेगी।
संधि पूजा में अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट शामिल किए जाते हैं। इस तरह पूजा के लिए कुल 48 मिनट का समय मिलेगा।
18 अक्टूबर को कन्या पूजन का मुहूर्त
जो भक्त 18 अक्टूबर को अष्टमी के अवसर पर कन्या पूजन करना चाहते हैं, उनके लिए दो शुभ समय बताए गए हैं।
- अमृत काल: सुबह 8:49 बजे से 10:32 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक।
इन समयों में भक्त अपनी परंपरा के अनुसार कन्याओं को भोजन कराकर उनका पूजन कर सकते हैं।
19 अक्टूबर को कन्या पूजन का मुहूर्त
नवमी पर कन्या पूजन करने वाले भक्तों के लिए भी शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।
- अमृत काल: सुबह 9:57 बजे से 11:42 बजे तक।
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:48 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक।
इस दिन अष्टमी और नवमी का व्रत एक साथ रखने वाले भक्त भी अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार कन्या पूजन कर सकते हैं।
दशहरा कब मनाया जाएगा?
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस वर्ष 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को दशमी का मान्य रहेगा। इसी दिन दशहरा यानी विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। इस त्योहार को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई तिथियां और शुभ मुहूर्त ज्योतिषाचार्य के बताए अनुसार हैं। अलग-अलग पंचांगों और स्थानीय परंपराओं में अंतर हो सकता है। पूजा से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग या जानकार पंडित से पुष्टि कर लें।