world-news

3 अगस्त से बदल जाएगी Share Market की टाइमिंग! F&O ट्रेडिंग और क्लोजिंग में बड़ा बदलाव, निवेशकों पर क्या असर?| Navbharat Live

August 2, 2026

Updated On: Aug 02, 2026 | 07:16 PM IST

विज्ञापन

सार

Share Market: सोमवार, 3 अगस्त से घरेलू शेयर बाजार में लागू होने जा रहे नए फ्रेमवर्क का मकसद क्लोजिंग प्राइस डिस्कवरी की एफिशिएंसी और ट्रांसपेरेंसी को बेहतर बनाना है।

share market

शेयर मार्केट, (AI जेनरेटेड इमेज)

विस्तार

Share Market New Timing For Trade: भारतीय शेयर बाजार में 3 अगस्त, 2026 से एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में शामिल शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की शुरुआत की जा रही है। इससे क्लोजिंग प्राइस (बंद होने वाली कीमत) तय करने का तरीका बदल जाएगा, डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग का समय 10 मिनट बढ़ जाएगा और अलग-अलग सेगमेंट के लिए बाजार बंद होने का समय भी अलग-अलग हो जाएगा।

इस बदलाव से आम और लंबे समय के निवेशकों पर खास असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ट्रेडर्स, बड़े संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) और एसेट मैनेजरों के लिए यह काफी अहम है। आइए सबकुछ विस्तार से जानते है।

समय और ट्रेडिंग प्रक्रिया में मुख्य बदलाव

  • सामान्य (Non-F&O) शेयर: इनमें कोई बदलाव नहीं होगा। ये शेयर पहले की तरह दोपहर 3:30 बजे तक ट्रेड होते रहेंगे।
  • F&O वाले शेयर:  इन शेयरों में सामान्य ट्रेडिंग दोपहर 3:15 बजे ही बंद हो जाएगी। इसके बाद 3:15 PM से 3:35 PM तक ‘क्लोजिंग ऑक्शन सेशन’ चलेगा, जिसमें खरीदारी और बिकवाली के ऑर्डर मिलाकर एक तय कीमत निकाली जाएगी।
  • डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग (F&O):  स्टॉक और इंडेक्स डेरिवेटिव्स अब दोपहर 3:40 बजे तक ट्रेड होंगे। यानी इसमें 10 मिनट का अतिरिक्त समय मिलेगा। इसके बाद 3:50 PM से 4:00 PM तक पोस्ट-क्लोज सेशन रहेगा।

10 मिनट क्यों बढ़ा डेरिवेटिव्स का समय?

समय बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य कैश बाजार में नीलामी से तय हुई कीमतों के साथ डेरिवेटिव्स बाजार का तालमेल बिठाना है। इससे ट्रेडर्स को अपनी खुली पोजीशन को हेज करने, ऑक्शन के बाद ट्रेड्स को एडजस्ट करने, इंट्राडे पोजीशन से बाहर निकलने और एक्सपायरी वाले दिन की हलचल को संभालने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाएगा।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन कैसे काम करेगा?

  • 3:15 PM- 3:20 PM: बाजार सामान्य ट्रेडिंग से ऑक्शन फेज़ में जाएगा और रेफरेंस प्राइस तय होगा।
  • 3:20 PM- 3:25 PM: खरीदार और बिकवाल मार्केट और लिमिट दोनों तरह के ऑर्डर दे सकेंगे।
  • 3:25 PM- 3:30 PM: केवल लिमिट ऑर्डर स्वीकार किए जाएंगे। इस दौरान दिए गए मार्केट ऑर्डर में बदलाव या रद्दीकरण नहीं हो सकेगा।
  • 3:28 PM- 3:30 PM: किसी भी पल अचानक ऑर्डर की एंट्री बंद हो जाएगी (रैंडम क्लोजर)।
  • 3:30 PM- 3:35 PM: सभी ऑर्डर्स का मिलान करके फाइनल क्लोजिंग प्राइस तय किया जाएगा।

क्लोजिंग प्राइस तय करने का नया तरीका

अब तक शेयरों का क्लोजिंग प्राइस ट्रेडिंग के आखिरी 30 मिनट के वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) से तय होता था। नए नियम के तहत, F&O शेयरों में सभी बाय और सेल ऑर्डर्स को एक साथ मिलाकर एक ‘सिंगल इक्विलिब्रियम प्राइस’ निकाला जाएगा, जो आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस बनेगा। इसी तरह, डेरिवेटिव्स के VWAP कैलकुलेशन की विंडो को भी बदलकर दोपहर 3:10 बजे से 3:40 बजे तक कर दिया गया है।

यह भी पढ़ें: बैंक ग्राहकों के लिए बड़ा बदलाव! RBI ने बदले डिपॉजिट नियम, 1 अक्टूबर से लागू होंगे नए प्रावधान

इस बदलाव से क्या फायदा होगा?

इस नई व्यवस्था से बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर पारदर्शी कीमतें तय होंगी। आखिरी वक्त में बड़े ट्रेड्स के कारण कीमतों में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव पर लगाम लगेगी और बड़े निवेशकों के लिए सौदे पूरे करना आसान और सटीक हो जाएगा।

सम्बंधित ख़बरें

Follow Navbharatlive whatsapp