सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी में फर्जी डिग्री सर्टिफिकेट जारी करने से जुड़ा धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है. यूनिवर्सिटी के फाइनेंस और अकाउंट्स डिपार्टमेंट के एक कर्मचारी पर आरोप है कि उसने एक रिक्शा चालक से उसके बेटे के लिए बैचलर ऑफ कॉमर्स (BCom) डिग्री सर्टिफिकेट दिलाने के बदले 3 लाख रुपये लिए.
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डिग्री के लिए ठगे 3 लाख रुपये.
हर मां-बाप का सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़-लिखकर जिंदगी में आगे बढ़े. इसी उम्मीद में कई परिवार अपनी जिंदगी भर की कमाई तक दांव पर लगा देते हैं. लेकिन जब इसी भरोसे का फायदा उठाकर कोई ठगी कर ले, तो सिर्फ पैसे ही नहीं सपने भी टूट जाते हैं. ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी से सामने आया है, जहां एक रिक्शा चालक से उसके बेटे के लिए BCom की डिग्री दिलाने के नाम पर 3 लाख रुपये ऐंठने का आरोप यूनिवर्सिटी के एक कर्मचारी पर लगा है. अब इस पूरे मामले की आधिकारिक जांच शुरू हो गई है.
क्या लगाया आरोप?
शिकायतकर्ता महेश कदम ने आरोप लगाया कि जब वह अपने बेटे की पढ़ाई-लिखाई से जुड़ी जानकारी लेने यूनिवर्सिटी गए, तो उनकी मुलाकात रमेश मुखेकर से हुई जो फाइनेंस और अकाउंट्स डिपार्टमेंट में काम करते थे. आरोप है कि मुखेकर और उनके कुछ साथियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे 3 लाख रुपये के बदले बिना सामान्य एकेडमिक प्रक्रिया का पालन किए BCom डिग्री सर्टिफिकेट दिला सकते हैं. लेकिन पैसे देने के बाद महेश ने दावा किया कि उन्हें डिग्री से जुड़े जो डॉक्यूमेंट मिला उनपर उन्हें शक हुआ. ऐसा इसलिए क्योंकि सर्टिफिकेट पर मौजूदा नाम सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी के बजाय यूनिवर्सिटी ऑफ पुणे लिखा था.
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हर साल के लिए अलग-अलग सर्टिफिकेट
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोर्स पूरा होने पर एक ही डिग्री सर्टिफिकेट देने के बजाय हर एकेडमिक सेशन के लिए अलग-अलग डिग्री सर्टिफिकेट जारी किए गए थे. दस्तावेजों के फर्जी होने का शक होने पर महेश ने वाइस-चांसलर के ऑफिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई. जुलाई 2025 के यूनिवर्सिटी रिकॉर्ड से पता चलता है कि रमेश मुखेकर SPPU के फाइनेंस और अकाउंट्स डिपार्टमेंट में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर (अकाउंट्स) के तौर पर काम कर रहे थे.
1 महीने बाद की कार्रवाई
शिकायतकर्ता की मदद कर रहे सोशल एक्टिविस्ट धम्मरत्न गायकवाड़ ने कहा कि शिकायत दर्ज होने के लगभग एक महीने बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की. उन्होंने जांच शुरू होने का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है.
एक आधिकारिक बयान में यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन्स एंड इवैल्यूएशन ने कहा कि उन्हें एक शिकायत मिली है जिसमें आरोप लगाया गया है कि यूनिवर्सिटी के नाम पर फर्जी मार्कशीट, डिग्री सर्टिफिकेट और उससे जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए, जिससे एक छात्र के साथ आर्थिक धोखाधड़ी हुई. आरोपों को गंभीरता से लेते हुए, वाइस-चांसलर ने मामले के हर पहलू की जांच के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाई है. यूनिवर्सिटी ने कहा है कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद, जो लोग दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
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