क्या आपका इलेक्ट्रिक स्कूटर भी पहले के मुकाबले आधा चलने लगा है? अक्सर लोग इसे बैटरी की खराबी मान लेते हैं, लेकिन असली वजह चार्जिंग से जुड़ी वो गलतियां हैं जो लगभग हर कोई करता है.बदलें ये 3 आदतें
Written By : नीलेश ओझा | Updated at : 21 Oct 2026 08:47 AM (IST)

इलेक्ट्रिक स्कूटर चार्जिंग टिप्स
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- राइड के बाद तुरंत चार्ज न करें, बैटरी ठंडा होने दें।
- बैटरी को 20-80% के बीच चार्ज करने का नियम अपनाएं।
- हमेशा मूल चार्जर उपयोग करें और रातभर प्लगइन न छोड़ें।
पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से तंग आकर कई लोगों ने इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीद तो लिया लेकिन कुछ ही महीनों बाद एक शिकायत सामने आने लगती है. शुरुआत में जो स्कूटर फुल चार्ज पर 100 या 120 किलोमीटर तक आराम से दौड़ता था धीरे-धीरे उसकी रेंज 70-80 किलोमीटर पर आकर सिमट जाती है. ऐसे में लोग सोचने लगते हैं कि स्कूटर कंपनी ने बैटरी घटिया क्वालिटी की दी है. लेकिन इनमें से ज्यादातर मामलों में दिक्कत स्कूटर की बैटरी में नहीं बल्कि उसे चार्ज करने के हमारे गलत तरीकों में होती है.
लिथियम-आयन बैटरी बेहद संवेदनशील होती है और हमारी छोटी-छोटी गलतियां उसकी लाइफ और ड्राइविंग रेंज दोनों को तेजी से गिरा देती हैं. अगर आप भी हर दिन रेंज घटने की परेशानी से दो-चार हो रहे हैं तो चार्जिंग के दौरान बस 3 आसान आदतें अपनाकर अपने स्कूटर को पहले जैसा दमदार बना सकते हैं.
राइड खत्म होते ही तुरंत चार्जर लगाने से बचें
अक्सर लोग ऑफिस से घर लौटते ही सबसे पहला काम यह करते हैं कि स्कूटर खड़ा किया और तुरंत चार्जर का प्लग ऑन कर दिया. अगर आप भी ऐसा करते हैं तो अपनी यह आदत आज ही बदल लीजिए. जब आप स्कूटर को 10-15 किलोमीटर या फिर उससे ज्यादा चलाते हैं, तो मोटर के साथ-साथ बैटरी पैक का टेंपरेचर भी काफी बढ़ जाता है. गर्म बैटरी में अचानक हाई वोल्टेज करंट डालने से उसके सेल्स पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है.
इससे बैटरी का केमिकल कंपोजिशन तेजी से डैमेज होने लगता है. जिसे थर्मल स्ट्रेस कहते हैं. इसका सीधा असर स्कूटर की ओवरऑल रेंज पर पड़ता है. हमेशा ध्यान रखें कि लंबी राइड के बाद स्कूटर को कम से कम 20 से 30 मिनट तक किसी छायादार जगह पर खड़ा रहने दें. जब बैटरी का टेंपरेचर नॉर्मल कमरे के टेंपरेचर जितना ठंडा हो जाए तभी चार्जर कनेक्ट करें.

20 से 80 प्रतिशत वाला रूल फॉलो करें
Phone की तरह हम इलेक्ट्रिक स्कूटर को भी तब तक चलाते रहते हैं जब तक डिस्प्ले पर 2-3% बैटरी न दिखने लगे, और फिर रातभर उसे 100% तक चार्ज होने के लिए छोड़ देते हैं. यह तरीका बैटरी की सेहत के लिए खतकनाक साबित होता है. लिथियम-आयन बैटरी को 0% तक ले जाना या लगातार 100% पर फुल चार्ज रखना दोनों ही सिचुएशन्स में भारी इंटरनल रेजिस्टेंस पैदा करता है.
बैटरी को सही रखने के लिए हमेशा 20-80 रूल फाॅलो करें. यानी जैसे ही बैटरी का लेवल 20% के आसपास पहुंचे उसे तुरंत चार्ज पर लगा दें और 80 से 85% चार्ज होते ही प्लग निकाल लें. हफ्ते या महीने में सिर्फ एक या दो बार ही बैटरी को पूरा 100% तक चार्ज करें जिससे उसके सभी सेल्स ठीक से कैलिब्रेट हो सकें. इस ट्रिक से आपकी बैटरी की लाइफ सालों-साल नई जैसी बनी रहेगी.

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लोकल चार्जर से चार्ज न करें
जल्दबाजी के चक्कर में कई लोग किसी भी अनब्रांडेड या लोकल फास्ट चार्जर से स्कूटर चार्ज करने की गलती कर बैठते हैं. हमेशा याद रखें कि स्कूटर के साथ मिले ओरिजिनल चार्जर या फिर कंपनी द्वारा ऑथराइज्ड चार्जर का ही इस्तेमाल करें. लोकल चार्जर का वोल्टेज फ्लक्चुएशन बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को पूरी तरह बिगाड़ सकता है. जिससे आग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है. इसके अलावा बहुत से लोगों की आदत होती है कि रात को सोते समय चार्जर ऑन कर दिया और सुबह आंख खुलने पर बंद किया.
भले ही मॉडर्न स्कूटर्स में ऑटो-कट की सुविधा मिलती है लेकिन पूरी रात चार्जर प्लग-इन रहने से बैकग्राउंड में ट्रिकल चार्जिंग चलती रहती हैजो बैटरी सेल्स को लगातार गर्म रखती है. इसलिए टाइमर का इस्तेमाल करें और जरूरत पूरी होते ही पावर स्विच बंद कर दें जिससे आपकी बैटरी हमेशा लंबी रेंज देती रहे.
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About the author नीलेश ओझा
नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.
कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.
पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.
उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.
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Published at : 21 Oct 2026 08:47 AM (IST)
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