रायपुर12 मिनट पहलेलेखक: प्रणेश सिंह
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राजधानी में खेलों को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं कराने के लिए 2010 में करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम बनाया गया था। लेकिन यह खेल के बजाय धार्मिक, सामाजिक और व्यावसायिक आयोजनों का केंद्र बन गया है।
पिछले तीन साल में यहां 36 कार्यक्रम हुए। इनमें खेल प्रतियोगिताएं सिर्फ 3 थीं, जबकि 33 आयोजन धार्मिक-सामाजिक या व्यावसायिक थे। सुशासन तिहार समेत कई सरकारी कार्यक्रम भी यहां होते हैं। हालांकि, ऐसे आयोजनों से निगम को किराया नहीं मिलता और इनका अलग रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता।
स्टेडियम के एसी, कुर्सियों, लाइट, पेंट और सफाई सहित रखरखाव पर नगर निगम हर साल बड़ी रकम खर्च करता है। इसी वजह से इसका सामान्य किराया एक दिन का 4.13 लाख रुपए है। बड़े धार्मिक-सामाजिक और व्यावसायिक आयोजनों के लिए संस्थाएं यह राशि देकर स्टेडियम बुक करती हैं। इस बीच खबर है कि इंडोर स्टेडियम को एक बार फिर संवारा जाएगा। नगर निगम इसके नवीनीकरण पर करीब 7 करोड़ रुपए खर्च करेगा।
सबसे बड़ा बदलाव सेंट्रल एयर कंडीशनिंग सिस्टम में किया जाएगा। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप फ्लोरिंग, एलईडी लाइटिंग, वाटरप्रूफिंग, पेंटिंग और ड्रेनेज का काम होगा।
शौचालयों का नवीनीकरण भी किया जाएगा। चार हजार दर्शकों की क्षमता वाले स्टेडियम में पुरानी सीटों की मरम्मत के साथ नई सीटें भी लगाई जाएंगी। यहां बैडमिंटन, बास्केटबॉल और वॉलीबॉल प्रतियोगिताओं के अलावा सांस्कृतिक, सामाजिक और सरकारी कार्यक्रम होते हैं। अब सवाल यह है कि 7 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद स्टेडियम में खेल आयोजनों की संख्या बढ़ेगी या यह पहले की तरह गैर-खेल कार्यक्रमों का केंद्र बना रहेगा।

दो खेल संघों के दफ्तर, फिर भी आयोजन कम स्टेडियम परिसर में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ और जिला शतरंज संघ के कार्यालय हैं। ओलंपिक संघ के कार्यालय से प्रदेश में विभिन्न खेल गतिविधियों का समन्वय किया जाता है। इसके बावजूद स्टेडियम में खेल प्रतियोगिताओं की संख्या बेहद कम है। इससे खेल संघों की सक्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
हर साल सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता मई 2024 में स्टेडियम में 7वीं एमएमए इंडिया नेशनल चैंपियनशिप हुई। जुलाई 2025 में वाको इंडिया सीनियर एवं मास्टर्स राष्ट्रीय किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप और फरवरी 2026 में 37वीं फेडरेशन कप वॉलीबॉल चैंपियनशिप कराई गई। यानी तीन साल में हर साल औसतन सिर्फ एक खेल आयोजन हुआ।
सीधी बात - मीनल चौबे, महापौर, रायपुर
किराए पर देने से निगम को होती है आय
इंडोर स्टेडियम में खेल आयोजन नहीं के बराबर हैं, फिर भी इसे संवारने पर खर्च क्यों किया जा रहा है? जवाब: खेल संघ हमारे पास आते हैं तो हम स्टेडियम जरूर उपलब्ध कराते हैं। कुछ आयोजन होते भी हैं। इसका रखरखाव करना नगर निगम की जिम्मेदारी है।
खेल के बजाय धार्मिक-सामाजिक आयोजन ज्यादा क्यों हो रहे हैं? जवाब: इन आयोजनों से निगम को अच्छा किराया मिलता है। यह सही है। यह निगम की आय का प्रमुख स्रोत भी है। खेल आयोजनों के लिए भी ज्यादातर लोग सुभाष स्टेडियम लेते हैं।
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