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चंद्रयान-3 से ग्लोबल स्पेस लीडरशिप तक: जिस देश ने साइकिल पर ढोए रॉकेट के पुर्जे, आज बना निवेशकों का नया ठिकाना

August 23, 2026

राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव, खासकर निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की तेजी से बढ़ती भूमिका ने देश को दुनिया भर के निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर लगातार अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है और यह देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बढ़ती ताकत में साफ दिखाई देता है। प्रधानमंत्री ने नई तकनीक विकसित कर रही जेनरेशन जेड (Gen Z) की भी जमकर सराहना की। वहीं, राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के मौके पर इसरो अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए नवाचार, सहयोग और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय करने पर जोर दिया। अहमदाबाद में तीसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह के दौरान उन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की साधारण शुरुआत से लेकर आज की उपलब्धियों तक के सफर को भी याद किया।



विकसित भारत के लक्ष्य में अंतरिक्ष क्षेत्र की अहम भूमिका


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों का एक वीडियो साझा करते हुए कहा, 'मैंने अयोध्या में कहा था कि यह बदलाव के एक नए चक्र की शुरुआत है। इस नए चक्र में भारत वैश्विक व्यवस्था में अपनी अंतरिक्ष उपस्थिति का लगातार विस्तार कर रहा है और यह हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।'उन्होंने कहा कि भारत ने 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का संकल्प लिया है और इस लक्ष्य को हासिल करने में अंतरिक्ष क्षेत्र की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक में भारत की बढ़ती क्षमता देश की व्यापक विकास यात्रा का अहम हिस्सा बन रही है।

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निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने बनाई वैश्विक पहचान


प्रधानमंत्री मोदी ने देश के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने कहा,'भारत की निजी अंतरिक्ष प्रतिभा दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रही है। आज भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।'उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स की बढ़ती भागीदारी से भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को नई गति मिली है। इससे देश में अंतरिक्ष से जुड़ी तकनीकों, नवाचार और निवेश के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

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रॉकेट से सैटेलाइट तक नई तकनीक बना रही Gen Z


प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं की क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज Gen Z के इंजीनियर, डिजाइनर, कोडर और वैज्ञानिक नई-नई तकनीक विकसित कर रहे हैं। प्रोपल्शन सिस्टम, कंपोजिट मटेरियल, रॉकेट स्टेज और सैटेलाइट प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में भारत के युवा काम कर रहे हैं, जिनकी कुछ समय पहले तक कल्पना भी नहीं की जाती थी। उन्होंने कहा कि युवाओं की यह तकनीकी क्षमता भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



ISRO की सफलता अगली पीढ़ी को कर रही प्रेरित


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसरो की सफलता भारत की अगली पीढ़ी के वैज्ञानिकों को प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा कि इसरो की उपलब्धियों को देखकर देश के कई बच्चे यह सपना देखने लगे हैं कि बड़े होकर वे भी वैज्ञानिक बनेंगे। उनके मुताबिक, अंतरिक्ष अभियानों की सफलता ने बच्चों और युवाओं के बीच विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के प्रति रुचि को बढ़ाने का काम किया है।



23 अगस्त को मनाया जाता है राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस


भारत में हर साल 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जाता है। यह दिन 2023 में चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट हुई ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग की याद में मनाया जाता है। इस उपलब्धि के साथ भारत चंद्रमा के इस क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बना था। चंद्रयान-3 की यह सफलता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित हुई और इसने देश की वैज्ञानिक तथा तकनीकी क्षमताओं की बढ़ती ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया।



2026 की थीम- विकसित भारत से वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व तक


राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 का आयोजन 'टुवर्ड्स विकसित भारत: इनोवेटिंग, कोलैबोरेटिंग एंड एस्पायरिंग टू ग्लोबल स्पेस लीडरशिप' यानी 'विकसित भारत की ओर: नवाचार, सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की आकांक्षा' थीम के तहत किया जा रहा है। यह थीम भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ नवाचार, साझेदारी और वैश्विक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में देश की बढ़ती भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा को दर्शाती है।



डॉ. वी. नारायणन ने नवाचार और सहयोग पर दिया जोर


राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस 2026 के संदेश में इसरो अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने विज्ञान और तकनीक की सीमाओं को लगातार आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे साझेदारियां विकसित करना भी जरूरी है, जो भारत के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत कर सकें। उन्होंने भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए अधिक नवाचार, सहयोग और महत्वाकांक्षी प्रयासों की आवश्यकता बताई।



साइकिल से रॉकेट के पुर्जे ढोने से शुरू हुआ सफर


अहमदाबाद, गुजरात में तीसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस समारोह के दौरान डॉ. वी. नारायणन ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के शुरुआती दौर को याद किया। उन्होंने कहा, 'जब हमने देश का अंतरिक्ष कार्यक्रम शुरू किया था, तब रॉकेट के पुर्जों को पुराने साइकिलों पर ले जाया जाता था। हमारे पास कोई दूसरा वाहन नहीं था। उस बेहद साधारण शुरुआत से आगे बढ़ते हुए आज हम नौ क्षेत्रों में दुनिया में नंबर एक स्थान पर पहुंच चुके हैं।' उन्होंने इसे पूरे भारतीय अंतरिक्ष समुदाय, अकादमिक जगत और औद्योगिक साझेदारों की उपलब्धि बताया। उनके मुताबिक, इन सभी के योगदान ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को मजबूत बनाने और उसे वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।



चंद्रयान-3 की सफलता सिर्फ सॉफ्ट लैंडिंग तक सीमित नहीं


डॉ. नारायणन ने चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा कि मिशन ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि चंद्रयान-3 की उपलब्धि केवल चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित उतरने तक सीमित नहीं है। मिशन के दौरान बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़े हासिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि चंद्रयान-3 से प्राप्त पूरा डेटा दुनिया भर के वैज्ञानिक समुदाय के लिए उपलब्ध करा दिया गया है, ताकि वैज्ञानिक इन आंकड़ों का इस्तेमाल चंद्रमा से जुड़े शोध और नई खोजों के लिए कर सकें।



140 करोड़ भारतीयों को प्रेरित करना भी बड़ी उपलब्धि


इसरो अध्यक्ष ने कहा कि चंद्रयान-3 की प्रमुख उपलब्धियों में से एक यह भी है कि इस मिशन ने दुनिया भर में मौजूद 140 करोड़ भारतीयों को प्रेरित किया। उन्होंने इसे मिशन की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल किया और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चंद्रयान-3 की सफलता ने देश में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर उत्साह और गौरव की भावना को और मजबूत किया। चंद्रयान-3 की सफलता ने न केवल भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रदर्शन किया, बल्कि देश के करोड़ों लोगों को यह विश्वास भी दिलाया कि सीमित संसाधनों से शुरू हुआ भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम आज दुनिया के अग्रणी अंतरिक्ष अभियानों में अपनी जगह बना चुका है।



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भारत के अंतरिक्ष सफर में पूरे समुदाय की भूमिका


डॉ. नारायणन ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा को किसी एक संस्था या व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे अंतरिक्ष समुदाय के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों, निजी क्षेत्र और औद्योगिक साझेदारों के योगदान से भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपनी मजबूत वैश्विक पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य और इसरो के वैज्ञानिकों की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बीच भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रह गया है। निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स, युवाओं और वैश्विक निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने इसे देश की आर्थिक और तकनीकी प्रगति के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल कर दिया है।