बंगाल की खाड़ी में उठे नए मौसमी हलचल के कारण विकसित हो रहा 'चक्रवाती तूफान अर्नब' (Cyclone Arnab) अब भारत के पूर्वी तटीय और मैदानी राज्यों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनता जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD Ranchi) द्वारा जारी ताजा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, इस चक्रवाती तूफान और उसके साथ बन रहे कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) का सीधा और व्यापक असर झारखंड के मौसम पर देखने को मिलेगा। राज्य में अगले कुछ दिनों तक बादलों की आवाजाही के साथ गर्जन, तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 29 नवंबर तक राज्य के कई प्रमुख और संवेदनशील जिलों के लिए बाकायदा ऑरेंज अलर्ट (Orange Alert) और येलो अलर्ट (Yellow Alert) जारी कर दिया है। चक्रवात के असर से न केवल तापमान में भारी गिरावट आएगी, बल्कि धान की कटाई कर रहे किसानों की फसलों पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आइए जानते हैं कि झारखंड के कौन-कौन से जिले इस चक्रवाती तूफान से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं और शासन-प्रशासन की ओर से आम जनता के लिए क्या-क्या दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
#1 इन जिलों के लिए जारी हुआ 'ऑरेंज अलर्ट': मूसलाधार बारिश और 40-50 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग की चेतावनी के मुताबिक, चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का सबसे ज्यादा और सीधा असर झारखंड के दक्षिणी, दक्षिण-पूर्वी और मध्य भागों में देखने को मिलेगा। विभाग ने विशेष रूप से पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर), पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा), सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, खूंटी और रांची जिलों के लिए तेज बारिश और वज्रपात का 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। इन जिलों में 29 नवंबर तक मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके साथ ही तटीय हवाओं के प्रभाव से 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की पूरी संभावना है। प्रशासन ने ऑरेंज अलर्ट वाले इलाकों में लोगों को गैर-जरूरी यात्राओं से बचने, कच्चे मकानों व पेड़ों से दूर रहने और आकाशीय बिजली की कड़क के दौरान पक्के मकानों में शरण लेने की सख्त ताकीद की है।
#1 रांची, बोकारो और धनबाद समेत इन जिलों में 'येलो अलर्ट': जानिए कैसा रहेगा मौसम का हाल
चक्रवात के व्यापक फैलाव को देखते हुए झारखंड के मध्य और उत्तर-पूर्वी हिस्सों के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है। राजधानी रांची, रामगढ़, हजारीबाग, गुमला, बोकारो, धनबाद, गिरिडीह, देवघर, दुमका और जामताड़ा जैसे जिलों में गर्जन के साथ हल्की से मध्यम स्तर की बारिश होने का अनुमान जताया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 29 नवंबर तक पूरे प्रदेश में बादल छाए रहेंगे और सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ हो सकते हैं। दिन का तापमान 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है जिससे सिहरन और ठिठुरन अचानक बढ़ जाएगी। हालांकि, रात के न्यूनतम तापमान में बादलों की मौजूदगी के कारण थोड़ी बढ़ोतरी देखी जा सकती है, लेकिन बारिश रुकते ही राज्य में भीषण ठंड का दौर शुरू होने के पूरे आसार हैं।
#1 धान की पकी फसल काटने में जुटे किसानों की बढ़ी चिंता, मौसम विभाग ने दी ये बड़ी सलाह
झारखंड में यह समय खरीफ फसल यानी धान की कटाई और खलिहानों में अनाज सुखाने का मुख्य सीजन होता है। चक्रवाती तूफान अर्नब के कारण बिन मौसम हो रही इस बारिश ने राज्य के लाखों किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। खेतों में खड़ी और कटी पड़ी धान की फसल के पानी में डूबकर खराब होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इसे ध्यान में रखते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय और मौसम केंद्र रांची ने किसानों के लिए कृषि-एडवाइजरी जारी की है। किसानों को सलाह दी गई है कि जो फसलें पहले ही काटी जा चुकी हैं, उन्हें तुरंत सुरक्षित स्थानों या तिरपाल (Tarpaulin) से ढककर खलिहानों में पहुंचाएं। इसके अलावा, खेत में पानी के जमाव को रोकने के लिए जल निकासी (Drainage) की तुरंत व्यवस्था करें और अगले कुछ दिनों तक फसलों में किसी भी प्रकार का रासायनिक छिड़काव या उर्वरक डालने का काम पूरी तरह रोक दें।
#1 जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम अलर्ट मोड पर, आपातकालीन नंबर जारी
चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के खतरे को देखते हुए झारखंड सरकार का आपदा प्रबंधन विभाग और सभी संबंधित जिलों के उपायुक्त (DC) पूरी तरह सतर्क हो गए हैं। संवेदनशील इलाकों में एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। बिजली विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि तेज हवाओं या पेड़ गिरने के कारण ट्रांसफॉर्मर और तारों को पहुंचने वाले नुकसान की तुरंत मरम्मत की जाए ताकि बिजली आपूर्ति बाधित न हो। शहरी स्थानीय निकायों को नालियों की सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि जलजमाव की स्थिति पैदा न हो। नागरिकों से अपील की गई है कि वे मौसम से जुड़ी आधिकारिक जानकारियों और अलर्ट्स पर ही भरोसा करें तथा किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबरों पर तुरंत संपर्क साधे।