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अभिभावकों को भुगतनी पड़ रही बच्चों की गलतियों की सजा, यवतमाल में नाबालिगों को वाहन देने पर 279 केस दर्ज| Navbharat Live

July 27, 2026

अभिभावकों को भुगतनी पड़ रही बच्चों की गलतियों की सजा, यवतमाल में नाबालिगों को वाहन देने पर 279 केस दर्ज

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सार

Yavatmal Traffic Rules : यवतमाल पुलिस ने नाबालिग बच्चों को दोपहिया और चारपहिया वाहन चलाने देने वाले 279 अभिभावकों पर कार्रवाई की है। जनवरी से 23 जुलाई तक ₹13.80 लाख का जुर्माना वसूला गया।

yavatmal police action against parents minor driving

नाबालिग वाहन चालक- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)

विस्तार

Yavatmal Police Action: नाबालिग बच्चों को दोपहिया और चारपहिया वाहन चलाने के लिए देने वाले अभिभावकों के खिलाफ यवतमाल पुलिस ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। संशोधित मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199 अ के तहत जनवरी से 23 जुलाई तक जिले में 279 अभिभावकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। इनसे पुलिस ने 13 लाख 80 हजार रुपये का जुर्माना वसूल किया है। मोटर वाहन कानून के अनुसार यदि कोई नाबालिग वाहन चलाते समय नियमों का उल्लंघन करता है या दुर्घटना का कारण बनता है, तो इसके लिए संबंधित अभिभावक या वाहन मालिक को जिम्मेदार माना जाता है।

ऐसे मामलों में 25 हजार रुपये तक का जुर्माना, तीन वर्ष तक की सजा, संबंधित वाहन का एक वर्ष के लिए पंजीयन रद्द करना तथा नाबालिग को 25 वर्ष की आयु पूरी होने तक ड्राइविंग लाइसेंस नहीं देने का प्रावधान है। स्कूल और ट्यूशन खत्म होने के बाद कई नाबालिग बच्चे तेज रफ्तार से दोपहिया वाहन चलाते, रेस लगाते और खतरनाक स्टंट करते दिखाई देते हैं। कई बार एक ही बाइक पर तीन से चार विद्यार्थी बैठकर यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हैं।

₹13.80 लाख का जुर्माना वसूला

इसके अलावा साइलेंसर में अवैध बदलाव कर तेज आवाज में वाहन चलाने और कर्कश हॉर्न का इस्तेमाल करने से सड़क पर चलने वाले पैदल यात्रियों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो रहा है। मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को सार्वजनिक सड़कों पर वाहन चलाने की अनुमति नहीं है। केवल 16 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं को 50 सीसी से कम क्षमता वाली बिना गियर की दोपहिया गाड़ी चलाने का लाइसेंस मिल सकता है। लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि कई नाबालिग बच्चे 150 से 350 सीसी क्षमता वाली तेज रफ्तार बाइक चलाते नजर आते हैं।

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दुर्घटना होने पर नहीं मिलेगा बीमा लाभ

नाबालिग चालक से दुर्घटना होने पर वाहन बीमा का दावा भी मंजूर नहीं होता। ऐसी स्थिति में न्यायालय द्वारा तय की गई क्षतिपूर्ति राशि अभिभावकों को अपनी जेब से भरनी पड़ सकती है। जिला यातायात विभाग प्रमुख ज्ञानोबा देवकते ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए नाबालिगों के हाथ में वाहन की चाबी न सौंपें। नियमों का पालन कर सड़क सुरक्षा में सहयोग करने का भी आह्वान किया गया है।

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