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वर्षों की मेहनत से मिली थी नौकरी, अब सरकार के एक फैसले से 2628 युवाओं का भविष्य संकट में

August 19, 2026

Ranchi News :  झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सरकार का हालिया फैसला एक तरफ परीक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगाता है, तो दूसरी तरफ उन युवाओं के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर देता है, जिन्होंने इन्हीं परीक्षाओं को पास कर नौकरी हासिल की थी. 

भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद सरकार ने JPSC और JSSC से जुड़ी कई परीक्षाओं को रद्द करने, कुछ प्रक्रियाओं पर रोक लगाने और कई मामलों की जांच कराने का फैसला लिया है. यह फैसला उन छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जो लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे थे.

उनका तर्क था कि अगर परीक्षा व्यवस्था ही संदेह के घेरे में है, तो उसके आधार पर होने वाली नियुक्तियां कैसे निष्पक्ष मानी जाएंगी. लेकिन इसी फैसले का दूसरा पहलू भी है. उन युवाओं का, जिन्होंने वर्षों तक परीक्षा की तैयारी की, परीक्षा में सफलता हासिल की और नियुक्ति पत्र लेकर नौकरी ज्वॉइन की. अब उनकी नियुक्तियां भी सवालों के घेरे में आ गयी हैं. 

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जिस नौकरी के लिए सालों मेहनत की, आज वही सवाल बन गई

सरकारी नौकरी किसी युवा के लिए सिर्फ एक नौकरी नहीं होती. उसके पीछे वर्षों की मेहनत, परिवार की उम्मीदें और बेहतर भविष्य का सपना जुड़ा होता है. किसी ने नौकरी की तैयारी के लिए दूसरी नौकरी छोड़ी तो किसी ने परिवार की आर्थिक स्थिति के बावजूद कोचिंग और किताबों पर पैसे खर्च किए. किसी के माता-पिता ने बेटे या बेटी की नौकरी लगने के बाद घर की स्थिति सुधरने का सपना देखा.

जब नियुक्ति हुई तो घरवालों ने मिठाई बांटी. माता-पिता ने रिश्तेदारों को फोन कर गर्व से कहा होगा कि उनका बेटा या बेटी अब सरकारी अधिकारी है. सरकारी नौकरी मिलने के बाद कई लोगों ने अपनी नई जिंदगी की शुरुआत भी की. लेकिन अब वही नियुक्ति संकट में है और इसके भविष्य को लेकर सवाल खड़ा हो गए हैं.

सरकार के फैसले से 2628 नियुक्त अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है.  इनमें 11वीं से 13वीं JPSC के माध्यम से नियुक्त 342 अधिकारी, 54 FRO, 63 CDPO, 237 महिला पर्यवेक्षिका और JSSC CGL से नियुक्त 1932 सहायक शामिल हैं. इन युवाओं का सवाल सीधा है कि अगर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी हुई, तो उसकी कीमत हम क्यों चुकाएं?

एक तरफ आंदोलनकारी छात्र, दूसरी तरफ नियुक्त अभ्यर्थी

इस पूरे मामले में दो तरह की पीड़ा सामने आ रही है.  एक तरफ वे छात्र हैं, जो लंबे समय से मांग कर रहे थे कि जिन परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई है, उन्हें रद्द किया जाए और निष्पक्ष तरीके से दोबारा परीक्षा ली जाए. दूसरी तरफ वे युवा हैं, जिन्होंने उन्हीं परीक्षाओं को पास किया, नियुक्ति हासिल की और अब अपनी नौकरी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं. दोनों की चिंता अपनी जगह जायज है. यहीं से सरकार की असली परीक्षा शुरू होती है.

कई परीक्षाओं पर चला रद्दीकरण का हथौड़ा

सरकार ने सिर्फ JSSC-CGL को रद्द नहीं किया है.  झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा 2023 और 2025 की नियमित एवं बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद्द किया गया है. पुरानी पांचवीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा से जुड़ी 2013, 2016 और 2021 की परीक्षाएं भी कार्रवाई के दायरे में आयी हैं. सिविल जज जूनियर डिवीजन की 2015, 2018 और 2023 की परीक्षाओं को भी रद्द किया गया है. 

इसके अलावा CDPO, FRO, ACF, APP, ड्रग इंस्पेक्टर और फूड सेफ्टी ऑफिसर जैसी कई नियुक्ति परीक्षाएं भी प्रभावित हुई हैं. विश्वविद्यालयों के गैर-शैक्षणिक पदों, इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर और JET 2024 जैसी परीक्षाएं भी इस पूरे घटनाक्रम से प्रभावित हुई हैं. यानी सवाल अब किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है. सवाल झारखंड की पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता का है

कुछ परीक्षाएं रुकीं, कुछ पर जांच

सरकार ने कुछ परीक्षाओं को सीधे रद्द करने के बजाय अगले आदेश तक रोक दिया है. Food Analyst, Project Manager, Deputy Director Prosecution, Director, Inspector of Factories और Boiler Inspector जैसी नियुक्ति प्रक्रियाएं फिलहाल आगे नहीं बढ़ेंगी.

इन परीक्षाओं में इस्तेमाल की गयी एजेंसियों की भूमिका और उनकी विश्वसनीयता की जांच CID करेगी. कई अन्य परीक्षाओं को भी जांच के दायरे में रखा गया है. इससे साफ है कि सरकार अब केवल किसी एक परीक्षा या एक एजेंसी से जुड़े मामले को नहीं देख रही, बल्कि पूरी परीक्षा व्यवस्था को नए सिरे से जांचने की कोशिश कर रही है.

सरकार के तीन बड़े कदम

परीक्षाओं को रद्द करना सरकार का एक बड़ा फैसला है.  लेकिन व्यवस्था में सुधार के लिए तीन अन्य महत्वपूर्ण कदम भी उठाये गये हैं. 

  • फास्ट ट्रैक कोर्ट :  JPSC और JSSC की परीक्षाओं में गड़बड़ी और कदाचार से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का अनुरोध किया जाएगा.
  • इंटर्नल विजलेंस सेल : JPSC और JSSC में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ बनाया जाएगा. इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी करना और संभावित गड़बड़ियों को समय रहते पकड़ना होगा.
  • हाईलेवल कमेटी :  वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी. यह समिति JPSC और JSSC की परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर सुधार के सुझाव देगी. समिति को दो महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है. 

लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिपोर्ट के बाद क्या होगा? क्योंकि झारखंड के युवा समितियां और रिपोर्टें पहले भी देख चुके हैं. अब उन्हें कागज पर सुझाव नहीं, नतीजा चाहिए.

छात्रों को जीत मिली, लेकिन नियुक्त युवाओं को क्या मिला?

इस फैसले का सबसे संवेदनशील पहलू यही है. जिन छात्रों ने सड़क पर उतरकर परीक्षा रद्द करने की मांग की थी, उनके लिए यह फैसला राहत की खबर है. लेकिन जिन युवाओं ने उसी परीक्षा को पास कर नौकरी हासिल की, उनके लिए यही फैसला चिंता का कारण बन गया है.

एक ही सरकारी आदेश ने कहीं उम्मीद जगायी है, तो कहीं भविष्य को लेकर डर पैदा कर दिया है. किसी परिवार में शायद यह कहा जा रहा होगा कि अब न्याय होगा. वहीं किसी दूसरे परिवार में सवाल उठ रहा होगा कि अब हमारी नौकरी का क्या होगा? सरकार को इन दोनों सवालों का जवाब देना होगा.

दोबारा परीक्षा हुई तो इन युवाओं का क्या होगा?

अगर किसी परीक्षा को दोबारा कराने का फैसला होता है, तो कई व्यावहारिक सवाल भी सामने आएंगे. क्या पहले से चयनित अभ्यर्थियों को उम्र में छूट मिलेगी? क्या उन्हें दोबारा परीक्षा में विशेष अवसर दिया जाएगा? तब तक उनकी नौकरी का क्या होगा? क्या उनकी सेवाएं जारी रहेंगी? दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लगेगा? इन सवालों पर स्पष्ट नीति बनाना जरूरी है. क्योंकि मामला सिर्फ परीक्षा का नहीं, 2628 परिवारों के भविष्य का है.

गलती सिस्टम की थी तो सजा सपनों को क्यों?

भर्ती व्यवस्था में गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. यदि किसी परीक्षा की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल हैं, तो उसे रद्द करना भी जरूरी हो सकता है. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में एक बात नहीं भूलनी चाहिए कि हर अभ्यर्थी गड़बड़ी में शामिल नहीं था. 

जिसने ईमानदारी से पढ़ाई की, परीक्षा दी, सफल हुआ, नियुक्ति पत्र लिया और नौकरी ज्वाइन की. उसके सपने की भी सुरक्षा होनी चाहिए. व्यवस्था को ठीक करने की कोशिश ऐसी होनी चाहिए, जिसमें दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोष युवाओं का भविष्य अनिश्चितता में न धकेला जाए.

क्योंकि नौकरी सिर्फ एक पद नहीं है. किसी के लिए यह मां-बाप की उम्मीद है. किसी के लिए परिवार चलाने का सहारा है. किसी के लिए वर्षों की मेहनत का फल है और किसी के लिए पहली बार अपने पैरों पर खड़े होने का मौका है. 

अब सरकार की असली परीक्षा

सरकार ने परीक्षाएं रद्द करने और जांच कराने का फैसला लिया है.  यह कदम आसान नहीं था. लेकिन असली चुनौती अब शुरू होगी. नई परीक्षाओं को समय पर कराना, पारदर्शी व्यवस्था तैयार करना, दोषियों तक पहुंचना, पुराने मामलों का जल्द निपटारा कराना और सबसे जरूरी उन युवाओं के भविष्य का रास्ता निकालना, जिनकी नौकरी अब संकट में है.

युवाओं को सिर्फ नई परीक्षा नहीं चाहिए, उन्हें नया भरोसा चाहिए. उन्हें भरोसा चाहिए कि अगली बार वे वर्षों की मेहनत के बाद सफल होंगे, तो किसी एजेंसी की कथित गड़बड़ी, किसी परीक्षा विवाद या किसी सरकारी आदेश की वजह से उनकी नौकरी संकट में नहीं पड़ेगी. 

झारखंड के लाखों युवा आज भी किताबें खोलकर बैठे हैं.  वे फिर पढ़ेंगे, फिर परीक्षा देंगे और फिर नौकरी की उम्मीद करेंगे. अब सरकार की जिम्मेदारी है कि उनकी इस उम्मीद को दोबारा किसी विवाद, गड़बड़ी या प्रशासनिक फैसले के बीच न फंसने दे. परीक्षा रद्द हुई है, कहानी खत्म नहीं हुई और अब असली परीक्षा सरकार की है.

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