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25 लाख टन गन्ना एथेनॉल में, इसी वजह से बढ़ी चीनी की कीमत? मीडिया रिपोर्ट के दावे पर सरकार ने क्या कहा

August 22, 2026

Time Published: Saturday, August 22, 2026, 10:37 [IST]

Sugar Price Hike India: देश में चीनी की कीमतों में तेज उछाल के पीछे गन्ने का बड़ा हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में भेजे जाने को अहम वजह माना जा रहा है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 25 लाख टन चीनी लायक गन्ना एथेनॉल में चला गया, जिससे चीनी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। यही वजह है कि चीनी की कीमत पिछले कुछ महीनों में तेजी से बढ़ी और आम उपभोक्ता पर सीधा असर पड़ा।

रिपोर्ट में चीनी के दाम 40% तक बढ़ने की बात कही गई है। दूसरी तरफ आटा, चावल और मैदा भी महंगे हुए हैं, जिससे रसोई का बजट बिगड़ रहा है।

Sugar Price Hike India

25 लाख टन गन्ना एथेनॉल में गया, चीनी की सप्लाई पर असर

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया है कि करीब 25 लाख टन चीनी लायक गन्ना एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो गया। इसका सीधा असर चीनी की उपलब्धता पर पड़ा और बाजार में सप्लाई घटने से कीमतों पर दबाव बढ़ा। सरकार ने एथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए गन्ने के इस्तेमाल को बढ़ाया है। लेकिन जब चीनी उत्पादन के लिए उपलब्ध गन्ना कम हुआ, तो बाजार में कीमत बढ़ने लगी और इसका असर ग्राहकों तक पहुंचा।

चीनी के दाम 40% तक बढ़े, रसोई का खर्च बढ़ा

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में चीनी की कीमत पिछले तीन महीने में करीब 40% तक बढ़ चुकी है। यानी जिस चीनी के लिए कुछ समय पहले कम कीमत चुकानी पड़ती थी, अब उसी पर परिवारों को ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। चीनी के महंगे होने का असर केवल चाय या मिठाई तक सीमित नहीं है। बिस्किट, मिठाई, बेकरी और दूसरे खाद्य उत्पादों की लागत बढ़ने से आम आदमी की रसोई प्रभावित हो सकती है।

70 रुपये किलो के पार पहुंची कीमत, आम आदमी पर सीधा असर

चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। दिल्ली- NCR में कई जगह चीनी 70 रुपये किलो से अधिक कीमत पर बिकने की बात सामने आ रही है। ऐसे में रोजाना चाय-कॉफी से लेकर त्योहारों पर बनने वाली मिठाइयों तक खर्च बढ़ सकता है। खास बात यह है कि चीनी की कीमत बढ़ने का असर अप्रत्यक्ष रूप से उन उत्पादों पर भी पड़ता है, जिनमें चीनी कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल होती है।

तीन महीने में चीनी 19 रुपये तक महंगी होने का दावा

रिपोर्ट में जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों की तुलना करते हुए बताया गया है कि चीनी के दाम में तीन महीने में करीब 19 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज हुई। इसी अवधि में कई अन्य खाद्य वस्तुओं के भाव भी बढ़े हैं। चीनी के मामले में यह उछाल सबसे ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि इसका इस्तेमाल लगभग हर घर में रोजाना होता है। कीमत बढ़ने से मध्यम वर्ग और कम आय वाले परिवारों पर अतिरिक्त खर्च का दबाव बढ़ा है।

मिलों का स्टॉक घटा, उत्पादन और उपलब्धता पर सवाल

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में मिलों के शुरुआती स्टॉक का भी जिक्र है। पिछले साल मिलों के पास करीब 47 लाख टन शुरुआती स्टॉक था, जबकि इस बार यह करीब 32 लाख टन बताया गया है। यानी बाजार में शुरुआती उपलब्धता पहले के मुकाबले कम रही। जब उत्पादन के लिए गन्ने का एक हिस्सा एथेनॉल की ओर गया और मिलों का स्टॉक भी घटा, तब चीनी की सप्लाई और कीमत दोनों पर दबाव बढ़ने की स्थिति बनी।

सरकार ने क्या कहा?

चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार ने साफ किया है कि इसकी मुख्य वजह एथेनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल नहीं है। सरकार के मुताबिक एथेनॉल के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12% था, जो 2025-26 में घटकर करीब 9% रह गया है। इस बार चीनी उत्पादन भी अनुमान से कम रहने की आशंका है। राज्यों ने शुरुआत में 343 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया था, लेकिन अब यह करीब 306 लाख टन रहने की उम्मीद है। गन्ने में रेड रॉट, टॉप बोरर, ज्यादा बारिश और जलभराव से भी नुकसान हुआ है।

दुनिया भर में क्या है हाल?

चीनी की कीमतों में तेजी का असर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। सरकार के अनुसार, 2026-27 में दुनियाभर में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी रहने का अनुमान है। वैश्विक बाजार में सप्लाई पर दबाव बढ़ने से कीमतों में भी तेजी आई है। 30 जून को चीनी की कीमत करीब 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी करीब दो महीने में अंतरराष्ट्रीय कीमत 16% से ज्यादा बढ़ी। त्योहारी सीजन में बढ़ती मांग और वैश्विक सप्लाई की कमी ने भी घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया है।

घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा कदम

घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति देने का फैसला किया है। इसके अलावा राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से क्रशिंग शुरू करने की सलाह दी गई है। सरकार का अनुमान है कि अक्टूबर में सामान्य 3-4 लाख टन के मुकाबले चीनी उत्पादन 10 लाख टन से ज्यादा हो सकता है। साथ ही जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों पर 400 टन की स्टॉक लिमिट भी लगाई गई है।