जन्म के 24 घंटे में पता चलेगा सिकल सेल:इंदौर के MGM में न्यूबोर्न स्क्रीनिंग को मिलेगा केंद्र का साथ; HLA Typing भी होगी शुरू
इंदौर6 घंटे पहले
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इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) स्थित Center for Competency for Sickle Cell Disease में अब जन्म के शुरुआती समय में ही सिकल सेल बीमारी की पहचान करने की तैयारी है। सेंटर में Newborn Screening को बड़े स्तर पर शुरू करने की योजना बनाई जा रही है। केंद्र सरकार ने सेंटर की सुविधाओं और कामकाज का निरीक्षण करने के बाद इसके लिए वित्तीय और उपकरण संबंधी मदद देने का आश्वासन दिया है।
इस सुविधा के शुरू होने के बाद बच्चे में बीमारी के लक्षण आने या गंभीर स्थिति बनने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जन्म के समय ही स्क्रीनिंग के जरिए सिकल सेल का खतरा पहचाना जा सकेगा। इसका सबसे ज्यादा फायदा मध्यप्रदेश के जनजातीय और सिकल सेल प्रभावित क्षेत्रों में मिलेगा।
एमवायएच में फिलहाल सिकल सेल एनीमिया के करीब 1400 मरीज रजिस्टर्ड हैं। इन्हें अस्पताल में उपचार और अन्य जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं।
HLA Typing की सुविधा भी होगी
एमवायएच अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने बताया कि Newborn Screening के साथ सेंटर में HLA Typing की सुविधा विकसित करने की भी तैयारी है। इसके लिए केंद्र सरकार से सहयोग मिलने का आश्वासन मिला है। आवश्यक उपकरण, रिएजेंट्स और अन्य संसाधनों को शामिल करते हुए संशोधित प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा रहा है।
HLA Typing के जरिए शरीर की कोशिकाओं पर मौजूद ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन (HLA) की पहचान और मिलान किया जाता है। यह कई चिकित्सा प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

एमवाय अस्पताल में अब तक इतने मरीजों को मिला लाभ।
केंद्रीय सचिव ने किया सेंटर का निरीक्षण
19 अगस्त को जनजातीय कार्य मंत्रालय की केंद्रीय सचिव रंजना चोपड़ा ने MGM मेडिकल कॉलेज के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग स्थित सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस फॉर सिकल सेल डिजीज का निरीक्षण किया। उन्होंने सेंटर में चल रहे काम और उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की।
उन्होंने सेंटर को सिकल सेल से प्रभावित जनजातीय आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने और राष्ट्रीय उन्मूलन लक्ष्य हासिल करने की दिशा में रोल मॉडल बताया।
गंभीर मरीजों के लिए रेड सेल एक्सचेंज की सुविधा
सेंटर में Red Cell Exchange की सुविधा भी उपलब्ध है, जो देश के चुनिंदा संस्थानों में ही है। दूसरे राज्यों और जनजातीय क्षेत्रों से गंभीर मरीज यहां रेफर होकर पहुंचते हैं। ऐसे मरीजों में सिकल सेल की मात्रा बढ़ने और हीमोग्लोबिन बेहद कम होने पर हालत तेजी से बिगड़ सकती है।
ऐसे मामलों में Apheresis Machine के जरिए Red Cell Exchange किया जाता है। एक मरीज के लिए इस प्रक्रिया में करीब 15 से 18 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ सकती है। प्रक्रिया के बाद शरीर में सिकल सेल की मात्रा करीब 10 से 15% तक लाने में मदद मिलती है।

सेंटर ऑफ कंपीटेंसी में मिला सिकल सेल पीड़ित मरीजों को लाभ
एक ही सेंटर पर जांच से इलाज तक सुविधा
सेंटर में Bone Marrow Transplant और Chorionic Villus Sampling (CVS) जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इससे सिकल सेल की जांच, गर्भावस्था के दौरान आनुवंशिक स्थिति की जानकारी और गंभीर मरीजों के उपचार की कई सुविधाएं एक ही सेंटर पर मिल रही हैं।
29 मार्च 2025 को हुआ था शुभारंभ
एमवायएच में प्रदेश के पहले Center of Competency for Sickle Cell Disease का शुभारंभ 29 मार्च 2025 को राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन का लक्ष्य रखा है।
इन 5 जिलों में 75% मरीज
मध्यप्रदेश में सिकल सेल से प्रभावित करीब 75% मरीज अलीराजपुर, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, झाबुआ और डिंडौरी जैसे पांच आदिवासी जिलों में केंद्रित हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में जन्म से ही स्क्रीनिंग शुरू होने पर बीमारी की समय रहते पहचान और उपचार में मदद मिलेगी।
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