Aug 14, 2026 08:59 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
मुख्य बातें
- देश के कुछ बाजारों में हरा धनिया 220-230 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है
- धनिया बेहद जल्दी खराब होने वाली फसल है
- बारिश के कारण खेतों से मंडियों तक इसकी आवक प्रभावित होते ही कीमतों पर तत्काल असर पड़ता है

धनिया के बढ़े दाम
अकसर देखा गया है कि लोग सब्जी खरीदने जाते हैं तो दुकानदार से मुफ्त में धनिया देने को कहते हैं। अगर आप भी ऐसे लोगों में हैं तो आपको अपनी आदत में सुधार लाने की जरूरत है। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि धनिया के दाम सातवें आसमान पर हैं। भारी बारिश से आपूर्ति प्रभावित होने के बाद देश के कुछ बाजारों में हरा धनिया 220-230 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। इसके अलावा अदरक, लहसुन और प्याज की कीमतों में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। जुलाई में अदरक की महंगाई दर बढ़कर 83.62 फीसदी हो गई, जो जून में 50.41 फीसदी थी। इसी तरह लहसुन की महंगाई 17.93 फीसदी से बढ़कर 35.36 फीसदी हो गई। वहीं आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 16.56 फीसदी की गिरावट आई है। टमाटर और मटर भी पिछले साल के मुकाबले सस्ते हुए हैं।
क्यों बिगड़े हालात?
दरअसल, धनिया बेहद जल्दी खराब होने वाली फसल है। बारिश के कारण खेतों से मंडियों तक इसकी आवक प्रभावित होते ही कीमतों पर तत्काल असर पड़ता है। धनिया की सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। ईटी की एक खबर के मुताबिक नासिक जैसे प्रमुख आपूर्ति केंद्रों से आवक प्रभावित होने के कारण थोक बाजार में धनिया की कीमत करीब 175 रुपये प्रति किलो और खुदरा बाजार में 220-230 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
महंगाई पर पड़ा असर
इसका असर देश की कुल खाद्य महंगाई पर भी पड़ा है। जुलाई के महीने में भारत की खाद्य महंगाई बढ़कर 5.52 फीसदी हो गई जबकि जून में यह 5.32 फीसदी थी। खाद्य महंगाई का दबाव अब चावल में भी दिखाई देने लगा है। देश में चावल की औसत खुदरा कीमत मई में 42.92 रुपये प्रति किलो थी, जो जुलाई में बढ़कर 44.35 रुपये हो गई। हालांकि, चीनी की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम स्टॉक को लेकर चिंता के बीच घरेलू चीनी कीमतें बढ़ी हैं।
इस महंगाई के पीछे मौसम की भूमिका अहम है। जून में देश में सामान्य से करीब 39.8 फीसदी कम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई में अचानक भारी बारिश और फिर बारिश में ब्रेक जैसी स्थिति देखने को मिली। बारिश का यह असमान पैटर्न खेती के लिए चुनौती बन रहा है। लंबे सूखे दौर से बुवाई और फसल विकास प्रभावित हो सकता है, जबकि अचानक तेज बारिश खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाने के साथ मंडियों तक उपज की आवाजाही भी बाधित कर सकती है
