Maternal Deaths Rajasthan: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में ढाई महीने के भीतर 23 गर्भवती महिलाओं की मौत से हड़कंप मच गया है. कोटा, भीलवाड़ा, बीकानेर और जोधपुर समेत कई जिलों से ये मामले सामने आए हैं.
Maternal Deaths Rajasthan: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में ढाई महीने के भीतर 23 गर्भवती महिलाओं की मौत से हड़कंप मच गया है. कोटा, भीलवाड़ा, बीकानेर और जोधपुर समेत कई जिलों से ये मामले सामने आए हैं.
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Maternal Deaths Rajasthan Photograph: (nn)
Maternal Deaths Rajasthan: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों से एक बेहद हैरान और डरा देने वाला मामला सामने आया है. राज्य में महज 2.5 महीने के भीतर 23 गर्भवती महिलाओं की मौत हो चुकी है. यह पूरी घटना राजस्थान के अलग-अलग जिलों के सरकारी अस्पतालों में हुई है, जहां महिलाएं उम्मीद के साथ बेहतर इलाज करवाने पहुंची थीं. कोटा, बांसवाड़ा, बीकानेर, भीलवाड़ा, जोधपुर और सीकर के अस्पतालों में सीजरियन डिलीवरी के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ती चली गई और उन्होंने दम तोड़ दिया. इस पूरी घटना ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी है.
संक्रमण और नकली दवाओं का जानलेवा जाल
शुरुआती जांच और कल्चर टेस्ट की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटर में जानलेवा बैक्टीरिया मौजूद था. सर्जरी से पहले ऑपरेशन थिएटर को पूरी तरह से साफ और सुरक्षित नहीं किया गया था. इसके अलावा महिलाओं को डिलीवरी के दौरान दिए जाने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में भी बड़ी गड़बड़ी पाई गई. खुद स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर यह बात मानी गई कि इन इंजेक्शनों में दवा की जगह पानी मिला हुआ था. सवाल यह उठ रहा है कि जब केंद्र सरकार और दूसरे राज्यों ने संबंधित दवा कंपनी को पहले ही ब्लैकलिस्ट कर दिया था, तो फिर राजस्थान के अस्पतालों में उसकी सप्लाई कैसे होती रही?
जवाबदेही से बचता सरकारी तंत्र
सरकारी तंत्र अब भी कमियों को छिपाने के लिए नई-नई दलीलें पेश कर रहा है. कभी महिलाओं के हाई रिस्क केस होने का बहाना बनाया जा रहा है, तो कभी भीषण गर्मी और बीपी को वजह बताया जा रहा है. हालांकि मूल सवाल यह है कि आखिर अस्पतालों में घटिया दवाएं और गंदे ऑपरेशन थिएटर किसके भरोसे छोड़े गए थे. जब तक इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और भ्रष्ट दवा माफिया पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक आम जनता का सरकारी अस्पतालों पर भरोसा बहाल होना मुश्किल नजर आता है.
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