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नन्हे डांसर्स ने मंच पर दिखाया गजब का आत्मविश्वास: डी’फेस्ट 2026 के दूसरे सोलो राउंड में 180 प्रतिभागियों ने छह कैटेगरी में दी शानदार प्रस्तुतियां - Jaipur News

August 9, 2026

जयपुर26 मिनट पहले

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छोटी उम्र, बड़ा टैलेंट और मंच पर गजब का आत्मविश्वास। जयपुर के नन्हे डांसर्स ने रविवार को डी’फेस्ट 2026 सीजन-10 के दूसरे सोलो राउंड में अपनी प्रस्तुतियों से यह साबित कर दिया। बस्कर्स की ओर से आयोजित स्कूल डांस फेस्टिवल के दूसरे सोलो राउंड का आयोजन तिलक नगर स्थित डी-स्पेस स्टूडियो में हुआ। पिछले राउंड से चयनित 180 प्रतिभागियों ने छह अलग-अलग कैटेगरी में अपनी नृत्य प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

इस राउंड में प्रतिभागियों के सामने केवल डांस प्रस्तुत करने की चुनौती नहीं थी, बल्कि उनकी नृत्य कुशलता, तकनीक, भाव-भंगिमा, लय और मंचीय आत्मविश्वास को भी परखा गया। बच्चों ने फोक, क्लासिकल, सेमी-क्लासिकल और फ्रीस्टाइल वेस्टर्न सहित विभिन्न नृत्य शैलियों में प्रस्तुतियां देकर दर्शकों और निर्णायकों को प्रभावित किया।

प्रदेशभर के बच्चे इस ऑडिशन में हिस्सा लेने आए है।

प्रदेशभर के बच्चे इस ऑडिशन में हिस्सा लेने आए है।

अलग-अलग थीम पर बच्चों ने प्रस्तुतियां दी।

अलग-अलग थीम पर बच्चों ने प्रस्तुतियां दी।

भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक ने दिखाई शास्त्रीय नृत्य की खूबसूरती

क्लासिकल डांस कैटेगरी में नन्हे कलाकारों ने अपनी हाव-भाव, नृत्य मुद्राओं और शास्त्रीय तकनीक से भारतीय नृत्य परंपरा की खूबसूरती को मंच पर उतारा। भरतनाट्यम की सधी हुई मुद्राएं, ओडिसी की विशिष्ट देहभंगिमा और कथक की लयकारी व पदचाप ने प्रस्तुतियों को खास बनाया।

कम उम्र के प्रतिभागियों के लिए इन शास्त्रीय नृत्य शैलियों की तकनीकी बारीकियों को मंच पर प्रस्तुत करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन बच्चों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रस्तुतियां दीं।

रंग-बिरंगी पोशाकों और ऊर्जा से सजा फोक डांस

फोक डांस में राजस्थान सहित भारतीय लोक संस्कृति की झलक दिखाई दी। रंग-बिरंगी पारंपरिक पोशाकों में बच्चों की ऊर्जावान प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहीं। लोक संगीत की लय पर बच्चों के कदम और पारंपरिक अंदाज ने मंच पर उत्सव जैसा माहौल बना दिया।

फोक डांस की प्रस्तुतियों में बच्चों की ऊर्जा और समूहों में दिखाई देने वाली तालमेल की क्षमता खास तौर पर नजर आई। इन प्रस्तुतियों के जरिए नन्हे कलाकारों ने लोक संस्कृति और परंपरा को अपने अंदाज में मंच पर जीवंत किया।

दिखा वेस्टर्न डांस का नया अंदाज

फ्रीस्टाइल वेस्टर्न कैटेगरी में बच्चों ने आधुनिक डांस फॉर्म्स की अपनी मजबूत पकड़ दिखाई। पॉपिंग, लॉकिंग और जैज की प्रस्तुतियों में म्यूजिक्लिटी यानी संगीत की बीट और लय को समझते हुए बॉडी मूवमेंट का इस्तेमाल देखने को मिला।

वहीं, कंटेम्परेरी और हिप-हॉप की प्रस्तुतियों में बच्चों ने अपनी बॉडी कंट्रोल, फ्लोर मूवमेंट, एनर्जी और क्रिएटिव एक्सप्रेशन से प्रभावित किया। कई प्रस्तुतियों में अलग-अलग डांस एलिमेंट्स का खूबसूरत संगम भी देखने को मिला, जिससे साफ नजर आया कि स्कूल स्तर पर डांस की तैयारी और बच्चों की तकनीकी समझ पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है।

8 से 12 साल के बच्चों में दिखा गजब का आत्मविश्वास

डी’फेस्ट के दूसरे सोलो राउंड की सबसे खास बात रही 8 से 12 वर्ष की उम्र के नन्हे प्रतिभागियों का आत्मविश्वास। बड़ी संख्या में बच्चों ने बिना झिझक मंच संभाला और अपनी प्रस्तुतियां पूरे आत्मविश्वास के साथ दीं।

कई बच्चों की प्रस्तुतियों में उम्र से कहीं आगे की मंचीय समझ और डांस टेक्निक दिखाई दी। दर्शकों की तालियों ने भी बच्चों का उत्साह बढ़ाया। हर प्रस्तुति के बाद हॉल में गूंजती तालियां इस बात का प्रमाण रहीं कि नन्हे डांसर्स ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से दर्शकों का दिल जीत लिया।

दूसरे सोलो राउंड के बाद चयनित प्रतिभागी 16 अगस्त को अगले राउंड में पहुंचेंगे। इस चरण में उनकी म्यूजिकलिटी और डांस टेक्निक को परखा जाएगा। इसके बाद चयनित प्रतिभागियों को बिरला ऑडिटोरियम में होने वाले अंतिम चरण में अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।

बच्चों के बीच डी’फेस्ट के फिनाले को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। प्रतियोगिता आगे बढ़ने के साथ प्रतिभागियों में अपनी प्रस्तुति को और बेहतर करने और फिनाले तक पहुंचने की होड़ भी दिखाई दे रही है।

अनुभवी निर्णायकों ने परखी प्रतिभा

दूसरे सोलो राउंड में प्रतिभागियों का मूल्यांकन अनुभवी निर्णायकों के पैनल ने किया। डॉ. सुधाकर दवे, रेशमी चौहान, ईश्वर शर्मा, रुचि माथुर, सीनियर फ्रीस्टाइल कोरियोग्राफर राहुल योगी, रोहित सैनी एवं एजाज आलम ने निर्णायक की भूमिका निभाई।

निर्णायकों ने बच्चों की नृत्य तकनीक, प्रस्तुति, लय, भाव-भंगिमा और मंचीय आत्मविश्वास जैसे विभिन्न पहलुओं को परखा।

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